खाड़ी युद्ध के चलते दुनिया में तेल का संकट बुरी तरह से गहरा गया है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। हालांकि, केंद्र सरकार लगातार रूस समेत दूसरे रास्तों से तेल की खरीद कर घरेलू मांग को पूरा कर रही है। इसी क्रम में अब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के चीफ फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि जुलाई-अगस्त तक तेल के बाजार ‘रेड जोन’ में पहुंच सकते हैं। कारण है घटते स्टॉक, बढ़ती मांग और मध्य पूर्व से तेल के निर्यात में कमी। गर्मियों की यात्रा सीजन शुरू होने वाला है, जिससे यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
बिरोल ने लंदन के थिंकटैंक चाथम हाउस में बात करते हुए कहा कि इस समस्या का सबसे महत्वपूर्ण समाधान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह और बिना शर्त फिर से खोलना है। उन्होंने बताया कि IEA के सदस्य देश अपनी रणनीतिक तेल भंडारण से और ज्यादा तेल छोड़ सकते हैं, जैसा उन्होंने मार्च में किया था। IEA इसकी समन्वय करने को तैयार है। अभी भी IEA के कुल रिजर्व का करीब 80% हिस्सा नहीं छोड़ा गया है।
मांग बढ़ रही है, सप्लाई घट रही है
बिरोल ने कहा कि स्टॉक कम हो रहे हैं, मध्य पूर्व से नया तेल नहीं आ रहा है और मांग बढ़ रही है, खासकर यात्रा सीजन की वजह से। अगर सुधार नहीं हुआ तो जुलाई-अगस्त में स्थिति मुश्किल हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मैंने पहले कभी ऊर्जा क्षेत्र में भू-राजनीति की इतनी लंबी और गहरी छाया नहीं देखी। बिरोल ने पहले ही इस तेल संकट को 1973, 1979 और 2022 (रूस-यूक्रेन) के संकटों से ज्यादा गंभीर बताया है। इस रुकावट की वजह से रोजाना 1.4 करोड़ बैरल तेल बाजार से गायब हो रहा है।
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उत्पादन में सुधार दूर
उनके अनुसार, तेल उत्पादन पूरी तरह सामान्य होने में कम से कम एक साल लग सकता है, यहां तक कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भी। कुछ देश जैसे इराक, जो अपने बजट के लिए तेल की आमदनी पर बहुत निर्भर हैं, कई सालों तक उत्पादन बढ़ाने के लिए फिर से निवेश नहीं कर पाएंगे।
मध्य पूर्व की ‘सुरक्षित सप्लायर’ वाली छवि को नुकसान पहुंचा है। बिरोल का अनुमान है कि देश अब सुरक्षित स्रोतों से तेल के लिए ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार रहेंगे। साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ भी रुझान बढ़ेगा।
देश अपनी रणनीति बदलेंगे
अगले कुछ सालों में सरकारें अपनी ऊर्जा नीतियों की समीक्षा करेंगी और ईंधन आयात के नए विकल्प ढूंढेंगी। लोग रिन्यूएबल्स, न्यूक्लियर और थोड़ा कोयला भी इस्तेमाल करेंगे। घरेलू स्तर पर जो ऊर्जा उत्पादन आर्थिक रूप से सही लगेगा, उसे बढ़ावा मिलेगा।
ईरान संकट और बातचीत
यह चेतावनी तब आई जब ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है, लेकिन बातचीत में दिक्कतें आ रही हैं। पाकिस्तान के इंटीरियर मिनिस्टर मोहसिन नकवी तेहरान में अपने दूसरे दौरे पर हैं। पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की यात्रा टल गई, जो संकेत देता है कि दोनों पक्षों के बीच समझौता अभी आसान नहीं है।
ईरान के सुप्रीम लीडर मोह्तबा खामेनेई ने कहा है कि उनका हाईली एनरिच्ड यूरेनियम किसी तीसरे देश जैसे रूस को निर्यात नहीं किया जाएगा। हालांकि इसे IAEA की निगरानी में कम शुद्धता में बदला जा सकता है। ईरान के पास 60% शुद्धता वाला 440.9 किलोग्राम यूरेनियम है।
ट्रंप ने इस मुद्दे पर अलग-अलग बयान दिए हैं। कभी कहते हैं कि यूरेनियम निर्यात जरूरी है, तो कभी कहते हैं कि यह पब्लिक रिलेशन के लिए ज्यादा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इसे हासिल कर लेगा और शायद नष्ट कर देगा। ईरान ने पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी का प्रस्ताव रखा है, लेकिन UAE ने इसे ‘काल्पनिक’ बताया। UAE के सीनियर डिप्लोमैटिक एडवाइजर अनवर गर्गाश ने कहा कि ईरान की कोशिशें हार के बाद नई हकीकत बनाने की कोशिश है।

















