नई दिल्ली/देहरादून: देहरादून में प्रतिबंधित कैप्टागन यानी ‘जिहादी ड्रग’ की फैक्ट्री का खुलासा हुआ है। NCB ने ऑपरेशन ‘RAGEPILL’ के तहत इसका खुलासा किया है। यह ड्रग सहसपुर में ग्रीन हर्बल फैक्ट्री में बनाया जा रहा था। फैक्ट्री मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह ‘जिहादी ड्रग’ इस फैक्ट्री में साल 2025 में तैयार किया गया था। NCB ने 182 करोड़ रुपये की कीमत का 227.2 किलो कैप्टागन ड्रग बरामद किया है। इसे विदेशों में भेजे जाने की तैयारी चल रही थी। आइए जानते हैं क्या है कैप्टागन ड्रग?
क्या है कैप्टागन?
कैप्टागन एक सिंथेटिक ड्रग है। इसे ‘जिहादी ड्रग’ भी बोला जाता है। इस ड्रग को आतंकी यूज करते हैं। मिडिल ईस्ट में इस ड्रग का अवैध कारोबार काफी बड़ा है। मोदी सरकार ने ड्रग्स के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है और साफ कहा है कि ड्रग्स नेटवर्क चाहे अंतरराष्ट्रीय हो या घरेलू, अब कहीं भी छूट नहीं मिलेगी। कैप्टागन को जिहादी ड्रग नाम इसके खतरनाक होने और जिहाद के लिए उकसाये जाने वाले आतंकियों को दिए जाने के कारण पड़ा है। इस ड्रग का असली नाम फेनेथिलीन है। इसे 1960 के दशक में दवाइयों के तौर पर बनाया गया था। खतरनाक होने के कारण बाद में इसे अधिकतर देशों में बैन कर दिया गया।
कई आतंकी संगठन इस ड्रग का यूज करते हैं। यह ड्रग थकान कम करता है और व्यक्ति को अधिक साहसी, आक्रामक और डर-रहित बनाता है। युद्ध या हिंसक गतिविधियों में इस ड्रग का यूज होता है।
हिंसक व्यवहार को बढ़ाता है ये ड्रग
कैप्टागन ड्रग लेने के बाद नींद कम लगती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। आतंकी इस ड्रग को इसलिए यूज करते हैं क्योंकि इससे दर्द का अहसास कम होता है। इस ड्रग से व्यक्ति अधिक हिंसक व्यवहार करने लगता है। यह एक ऐसा नशा है जो शरीर में जबरदस्त ऊर्जा भर देता है। सीरिया के विद्रोही लड़ाके इस ड्रग का यूज करते हैं। ISIS के आतंकी भी इस ड्रग का यूज करते हैं।
क्या है पूरा मामला?
NCB ने 16 मई को एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया कि दिल्ली के नेब सराय में बरामद कैप्टागन गोलियां, नवंबर 2025 में देहरादून स्थित ‘Ms Green Herbal’ में उसके और एक अन्य सीरियाई साथी द्वारा अवैध रूप से बनाई गई थीं। इसके बाद NCB ने 16 मई की रात को इस फैक्ट्री परिसर में तलाशी अभियान चलाया। जांच में पता चला कि फैक्ट्री का मालिक इस जिहादी ड्रग के अवैध निर्माण के लिए अपनी जगह का इस्तेमाल करने की अनुमति देने के बदले हर दिन करीब 50 हजार रुपये लेता था।
जांच के दौरान NCB को फैक्ट्री में हाईटेक मशीनरी लगी मिली। फैक्ट्री में टैबलेट बनाने की मशीनें, ग्रेनुलेशन यूनिट, कैप्सूल फिलिंग मशीन, कोटिंग मशीन, सीलिंग और ब्लिस्टर पैकेजिंग मशीनें लगी हुई थीं। साथ ही बड़ी मात्रा में केमिकल, कच्चा माल, कैप्सूल और पैकेजिंग सामग्री भी मिली है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस फैक्ट्री को अवैध ड्रग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था।











