नई दिल्ली/देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में प्रतिबंधित कैप्टागन (Captagon) यानी ‘जिहादी ड्रग’ की फैक्ट्री का खुलासा हुआ है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ऑपरेशन ‘RAGEPILL’ के तहत इसका खुलासा किया और ग्रीन हर्बल फैक्ट्री के मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। यह फैक्ट्री देहरादून के सहसपुर में स्थित है। इस ऑपरेशन में NCB ने इस ड्रग को बनाने वाली मशीनों सहित कई आधुनिक मशीनों को जब्त किया है। दरअसल NCB ने ‘ऑपरेशन RAGEPILL’ के तहत दिल्ली से 227.2 किलो कैप्टागन टैबलेट और पाउडर जब्त किया था। यह ड्रग इसी फैक्ट्री में बनाया जा रहा था।
ड्रग को अंतरराष्ट्रीय मार्केट में सप्लाई की थी तैयारी
जब्त 227.2 किलो कैप्टागन टैबलेट और पाउडर को अंतरराष्ट्रीय मार्केट में सप्लाई करने की तैयारी थी। यह ‘जिहादी ड्रग’ ग्रीन हर्बल हाईटेक फैक्ट्री में साल 2025 में तैयार किया गया था। जांच एजेंसियों की तरफ से कहा गया है कि ग्रीन हर्बल हाईटेक फैक्ट्री में इस खतरनाक ड्रग को तैयार करने के लिए उसका मालिक हर दिन 50 हजार रुपये ले रहा था।
कैसे हुआ इस फैक्ट्री में ‘जिहादी ड्रग’ बनाने का खुलासा?
NCB ने 16 मई को एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया कि दिल्ली के नेब सराय में बरामद कैप्टागन गोलियां, नवंबर 2025 में देहरादून स्थित ‘Ms Green Herbal’ में उसके और एक अन्य सीरियाई साथी द्वारा अवैध रूप से बनाई गई थीं।
इसके बाद NCB ने 16 मई की रात को इस फैक्ट्री परिसर में तलाशी अभियान चलाया। जांच में पता चला कि फैक्ट्री का मालिक इस जिहादी ड्रग के अवैध निर्माण के लिए अपनी जगह का इस्तेमाल करने की अनुमति देने के बदले हर दिन करीब 50 हजार रुपये लेता था।
फैक्ट्री में आधुनिक मशीनें और बड़ी मात्रा में केमिकल बरामद
जांच के दौरान NCB को फैक्ट्री में हाईटेक मशीनरी लगी मिली। फैक्ट्री में टैबलेट बनाने की मशीनें, ग्रेनुलेशन यूनिट, कैप्सूल फिलिंग मशीन, कोटिंग मशीन, सीलिंग और ब्लिस्टर पैकेजिंग मशीनें लगी हुई थीं। साथ ही बड़ी मात्रा में केमिकल, कच्चा माल, कैप्सूल और पैकेजिंग सामग्री भी मिली है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस फैक्ट्री को अवैध ड्रग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था।
फैक्ट्री मालिक पहले भी ड्रग्स से जुड़े 2 मामलों में संलिप्त
जांच में सामने आया है कि इस फैक्ट्री का मालिक पहले भी ड्रग्स से जुड़े दो मामलों में आ चुका है। इनमें से एक मामला देहरादून पुलिस और दूसरा NCB दिल्ली जोनल यूनिट का है जो ट्रामाडोल और अन्य NRx दवाओं की सप्लाई से जुड़े हैं। इस मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। NCB पता लगा रही है कि इस नेटवर्क के तार किन-किन देशों और भारत के किन राज्यों से जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि प्रतिबंधित कैप्टागन किन देशों में भेजा जाना था। इसके पीछे कौन सा अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट सक्रिय है।
बता दें कि सबसे पहले इस जिहादी ड्रग के मामले का खुलासा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘ड्रग-फ्री इंडिया’ के संकल्प को दोहराते हुए किया था। उन्होंने अपने सोशल मीडिया साइट X पर ‘ऑपरेशन RAGEPILL’ के तहत एजेंसियों द्वारा पहली बार कैप्टागन ड्रग के बड़ी खेप के जब्त होने की जानकारी दी थी। उन्होंने जब्त 227.2 किलो कैप्टागन ड्रग की कीमत करीब 182 करोड़ रुपये बताई थी। अमित शाह के मुताबिक, यह ड्रग्स कंसाइनमेंट मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा था। इसे NCB ने समय रहते पकड़ लिया। उन्होंने साफ कहा कि भारत में ड्रग्स के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू है। देश में आने या यहां से गुजरने वाले हर ड्रग्स पर कड़ी कार्रवाई होगी।











