भुवनेश्वर: राज्य के विद्यालय व जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने कहा है कि व्यक्ति के चरित्र निर्माण से ही राष्ट्र निर्माण संभव है। विद्या भारती शिक्षा विकास समिति, ओडिशा द्वारा संचालित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर इसी उद्देश्य को लेकर कार्य कर रहे हैं। वे भुवनेश्वर स्थित खनिज एवं प्रौद्योगिकी संस्थान परिसर के ऑडिटोरियम में आयोजित “मेधावी अभिनंदन-2026” कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम का आयोजन इस वर्ष 10वीं बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित करने के लिए किया गया था। मंत्री ने कहा कि विद्या भारती से जुड़े विद्यालय केवल श्रेष्ठ शिक्षा प्रदान नहीं कर रहे हैं, बल्कि वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र का भी निर्माण किया जा रहा है। यही कारण है कि इन विद्यालयों के छात्र शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ सामाजिक और नैतिक मूल्यों में भी आगे दिखाई देते हैं। गुरुजनों की निष्ठा और परिश्रम से मिली सफलता श्री गोंड ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सरस्वती शिशु विद्या मंदिरों का परीक्षा परिणाम अत्यंत उत्कृष्ट रहा है। उन्होंने कहा कि यह सफलता विद्यालयों में कार्यरत गुरुजनों और गुरुमाताओं की निष्ठा, समर्पण और अथक परिश्रम का परिणाम है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विद्यार्थियों को अनुशासन, नैतिकता और जीवन मूल्यों की भी शिक्षा देते हैं।

इसी कारण विद्या भारती द्वारा संचालित विद्यालयों के शिक्षक समाज में विशेष सम्मान के पात्र हैं। मंत्री ने कहा कि आज के समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को ऐसा नागरिक बनाना आवश्यक है जो समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझ सके। विद्या भारती से जुड़े विद्यालय इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहे हैं। समाज और राष्ट्र के प्रति दायित्व का बोध जरूरी अपने संबोधन में मंत्री नित्यानंद गोंड ने कहा कि वर्तमान समय में लोग केवल आर्थिक सफलता के पीछे भाग रहे हैं, लेकिन समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिस समाज के सहयोग से व्यक्ति आगे बढ़ता है, उसके प्रति कर्तव्य निभाना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती द्वारा संचालित विद्यालय बच्चों को केवल पुस्तक आधारित शिक्षा नहीं देते, बल्कि उनमें समाज सेवा, राष्ट्रप्रेम और भारतीय संस्कारों की भावना भी विकसित करते हैं।
यही कारण है कि इन विद्यालयों के विद्यार्थी आगे चलकर समाज के जिम्मेदार नागरिक बनते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं पर विशेष बल मंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि नीति में यह स्पष्ट प्रावधान है कि बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में दी जानी चाहिए ताकि वे विषयों को बेहतर ढंग से समझ सकें और अपनी संस्कृति से जुड़े रह सकें। उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार भी इस विषय को लेकर संवेदनशील है और मातृभाषा आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य कर रही है।

मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान समाज के लिए गौरव कार्यक्रम के दौरान दसवीं बोर्ड परीक्षा में 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 25 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान केवल उनके परिवारों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और राज्य के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता के पीछे उनके माता-पिता और शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। माता-पिता अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर मेहनत और त्याग करते हैं, वहीं शिक्षक धैर्य और प्रतिबद्धता के साथ उनका मार्गदर्शन करते हैं।
मंत्री ने सभी अभिभावकों और शिक्षकों को विद्यार्थियों की सफलता में उनकी अमूल्य भूमिका के लिए हार्दिक बधाई दी। टॉपर विद्यार्थियों को दिया प्रेरणादायी संदेश कार्यक्रम में मंत्री ने टॉपर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा और आदर्श हैं। उनकी मेहनत, अनुशासन और सफलता आने वाली पीढ़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के बाद भी विनम्रता बनाए रखें और निरंतर मेहनत करते रहें। आत्मविश्वास को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाकर आगे बढ़ने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम से ही जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। 8 विद्यालयों को भी किया गया सम्मानित इस अवसर पर ओडिशा के 8 सरस्वती शिशु विद्या मंदिरों को भी सम्मानित किया गया। इन विद्यालयों ने शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम हासिल करने के साथ-साथ सभी विद्यार्थियों को 60 प्रतिशत से अधिक अंक दिलाकर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। कार्यक्रम में यह जानकारी दी गई कि राज्य के 322 सरस्वती शिशु विद्या मंदिरों के कुल 15,214 विद्यार्थी इस वर्ष 10वीं बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें से 15,209 विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त की।

इस प्रकार विद्यालयों का कुल परीक्षा परिणाम 99.97 प्रतिशत रहा। इनमें से 317 विद्यालयों का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा, जबकि 15 विद्यालय ऐसे रहे जहां सभी विद्यार्थियों ने 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। राज्य के संयुक्त टॉपर भी हुए सम्मानित समारोह में ओडिशा के संयुक्त टॉपर रहे पार्थ सारथी महांत तथा अनिकेत पात्र सहित अन्य मेधावी विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया गया। पूरे राज्य में ए-1 ग्रेड यानी 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले लगभग 2400 विद्यार्थियों में से 779 विद्यार्थी शिशु विद्या मंदिरों से संबंधित रहे। इसे विद्यालयों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुशासित शैक्षणिक वातावरण का प्रमाण माना जा रहा है। ‘कृतित्व वर्तिका ’ स्मारिका का विमोचन कार्यक्रम के दौरान मेधावी विद्यार्थियों की उपलब्धियों पर आधारित स्मारिका “कृतित्व वर्णिका” का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीकांत तराई उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में विद्या भारती के अखिल भारतीय महामंत्री देशराज शर्मा तथा अध्यक्ष के रूप में डॉ. किशोरचंद्र महंती ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर शिक्षा विकास समिति, ओडिशा के सचिव डॉ. सरोज कुमार हाती ने अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया। संगठन सचिव तारक दास सरकार ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रांतीय परीक्षा संयोजक मनोज कुमार दास ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन पूर्व संभाग सचिव पंकज कुमार कर ने प्रस्तुत किया।

















