जयपुर । क्या आज की पीढ़ी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना व मूल संकल्प और स्वतंत्रता संग्राम में उसके वैचारिक योगदान से पूरी तरह परिचित है? जयपुर में हुए एक भव्य आयोजन में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने स्पष्टता के साथ इसी विषय पर अपनी बात रखी…
शनिवार को बिड़ला ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी के जीवन पर आधारित ‘युग प्रवर्तक डॉ. हेडगेवार’ नाटक का भव्य मंचन किया गया।
इस गौरवमयी अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने संघ के इतिहास और राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश दिया।

राज्यपाल ने उन आलोचकों को कड़ा जवाब दिया जो स्वतंत्रता संग्राम में संघ के योगदान पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा-
“लोग बोलते हैं कि स्वतंत्रता के लिए संघ ने क्या किया, तो यह जानने के लिए उन्हें गहराई से अध्ययन करना चाहिए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देश में ‘सुराज’ (अच्छा शासन) की स्थापना के लिए राष्ट्रव्यापी एकजुटता की आवश्यकता पर हमेशा बल दिया और इसी विचार को आगे बढ़ाया।”
उन्होंने आगे कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी के जीवन पर मंचित यह नाटक आज की पीढ़ी को उनके महान व्यक्तित्व, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण से परिचित कराने का एक बेहतरीन माध्यम है।
नदी के पुण्य प्रवाह की तरह चल रहा है संघ का कार्य: डॉ. रमेशचंद अग्रवाल
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. रमेशचंद अग्रवाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा कार्यों की तुलना पवित्र नदी से करते हुए कहा कि संघ का कार्य समाज में एक पुण्य प्रवाह की तरह निरंतर चल रहा है। आज देश भर में दिखाई दे रहा संघ का यह विशाल और राष्ट्रव्यापी स्वरूप वास्तव में स्वयंसेवकों के इसी भक्ति भाव और राष्ट्र-आराधना का अनूठा प्रतीक है।

आज की पीढ़ी के मार्गदर्शक हैं डॉ. हेडगेवार: महामंडलेश्वर गणेश दास जी महाराज
विशिष्ट अतिथि महामंडलेश्वर गणेश दास जी महाराज ने अपने संबोधन में डॉ. हेडगेवार जी के दूरदर्शी दृष्टिकोण को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि परम पूजनीय डॉ. हेडगेवार एक अत्यंत दूरदर्शी युगपुरुष थे, जिनके विचार और सिद्धांत आज की युवा पीढ़ी के लिए भी एक महान प्रेरणा स्रोत और सच्चे मार्गदर्शक हैं।
नागपुर की ‘नादब्रह्म’ टीम ने बिखेरा कला का जादू
इस प्रेरणादायी नाटक के पर्दे के पीछे की टीम की बात करें तो इसकी प्रस्तुति ने ऑडिटोरियम में मौजूद सभी दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया:
- लेखन: इस ऐतिहासिक नाटक का सशक्त लेखन डॉ. अजय प्रधान द्वारा किया गया है।
- निर्देशन: नाटक का कुशल निर्देशन विख्यात रंगकर्मी सुबोध सुरजीकर ने किया।
- निर्माता: इसके निर्माता पद्मकर धनोरकर हैं।
- प्रस्तुति: इस नाटक को नागपुर की सुप्रसिद्ध ‘नादब्रह्म’ टीम ने तैयार किया है। आपको बता दें कि नादब्रह्म नागपुर के 45 समर्पित स्वयंसेवकों का एक अनूठा संगठन है, जो कला के माध्यम से राष्ट्रचेतना जगाने का कार्य कर रहा है।
















