लंदन का टावर हैमलेट्स: मुस्लिमों का बहुमत बढ़ा और डेमोग्राफिक चेंज भी, बांग्लादेशियों का वर्चस्व बढ़ा
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लंदन का टावर हैमलेट्स: मुस्लिमों का बहुमत बढ़ा और डेमोग्राफिक चेंज भी, बांग्लादेशियों का वर्चस्व बढ़ा

टावर हैमलेट्स 2021 जनगणना: 39.9% मुस्लिम और 34.6% बांग्लादेशी आबादी। जानिए कैसे ब्रिटेन के इस बरो में डेमोग्राफिक परिवर्तन हुआ, लुत्फुर रहमान की अस्पायर पार्टी का वर्चस्व और विविधता का दोहरा मापदंड।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
May 17, 2026, 02:02 pm IST
inविश्व
London tower Hamlets Muslim crowed

प्रतीकात्मक तस्वीर

लंदन जहां पर गोरों का राज था। जहां से गोरे अर्थात श्वेत पूरी दुनिया जीतने निकले थे और देखते ही देखते छा गए थे अपनी नीतियों के सहारे पूरे विश्व पर। उनके विषय में कहा जाता था कि उनका सूरज कभी डूबता नहीं। एक समय था कि हर जगह के शासक होने का वे सपना देखते थे। मगर समय ने करवट ली। अब उनके अपने ही देश में जहां उनकी अपनी बेटियाँ ही नरक का अनुभव कर रही हैं क्योंकि मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग्स उन्हें तरह-तरह के जाल में फंसा रहे हैं तो वहीं कई क्षेत्रों में डेमोग्राफ़िक परिवर्तन के माध्यम से और भी कई तरह से सत्ता और विमर्श पर कब्जा कर रहे हैं।

जहां बर्मिंघम में अनगिनत मुस्लिम काउन्सलर चुने गए, तो वहीं लंदन के टावर हेमलेट्स नामक बरो (स्थानीय शासन की एक इकाई, जैसे कि नगर निगम) में बहुमत में मुस्लिम काउन्सलर चुने गए हैं। यह हैरान करने वाला इसलिए और है कि जहां इस बरो में इतने कम व्हाइट काउन्सलर चुने गए हैं, तो इसे किसी भी प्रकार से नस्लवादी न कहकर “सबसे डाइवर्स” काउंसिल कहा जा रहा है।

क्या है टावर हैमलेट्स की डेमोग्राफी?

सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि टावर हैमलेट्स की डेमोग्राफी क्या है और यह ऐसी क्यों है? साल 2021 की जनगणना के अनुसार, वहाँ पर 39.9 प्रतिशत मुस्लिम हैं और यहाँ पर 34.6% बांग्लादेशी मुस्लिम हैं। मीडिया के अनुसार, 2021 की जनगणना में कुल 3.10 लाख की जनसंख्या में अधिकतर मुस्लिम आबादी बांग्लादेशी मूल की है। हालांकि वहाँ पर कुछ सोमाली मुस्लिम भी हैं, मगर बांग्लादेशी मुस्लिम अधिक हैं।

इसे भी पढ़ें: तालिबान का नया शरिया कानून: कुंवारी लड़कियों की चुप्पी को शादी की सहमति माना जाएगा

ऐसा क्यों हुआ?

अब जो दूसरा प्रश्न उठता है वह यह कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? लंदन में एक निगम में बांग्लादेशी इतने कैसे हो गए कि वे अब काउन्सलर के पद पर इस तरह से आ गए हैं कि श्वेत समुदाय को इस निगम की सत्ता से ही बाहर कर दिया? दरअसल, यह कहानी आरंभ हुई 18वीं या कहें 19 वीं सदी से, जब भारत में औपनिवेशिक शासन था। भारत का ही उस समय अंग रहे सिल्हट से अंग्रेजों ने सस्ते मजदूर लेकर जाने आरंभ किये। सिल्हट के कई लोग अंग्रेजों के पानी के जहाजों पर काम करते थे और कई लोग फिर वहाँ पर बस गए। उसके बाद 1994-50 के दशक में जब ब्रिटेन में मजदूरों की कमी हुई तो ब्रिटिश सरकार ने कॉमनवेल्थ देशों से कामगारों को बुलाया, जिनमें पाकिस्तानी और बांग्लादेशी भी थे। सिल्हट से पुरुष फैक्ट्री, टेक्सटाइल, और रेस्टोरेंट्स आदि में काम करने के लिए आए। और उसके बाद वर्क परमिट के कारण वे और भी लोगों को लेकर आए और धीरे-धीरे वहाँ पर यह चेन बन गई। यह भी कहा जाता है कि 1971 में इममिग्रेशन एक्ट के बाद फैमिली रीयूनियन तेजी से हुई और जहां पहले केवल आदमी थे, वहीं अब परिवार भी आ गए।

इसका नतीजा यह हुआ कि जो क्षेत्र पहले व्हाइट वर्किंग क्लास के थे, वहाँ पर डेमोग्राफिक परिवर्तन के चलते बांग्लादेशी मूल के इतने लोग हो गए कि पहले तो उन्होनें व्हाइट वर्किंग क्लास को खत्म किया और अब टावर हैमलेट्स कि काउंसिल पर कब्जा कर लिया है।

क्या है दलवार संख्या?

इस काउंसिल में लुत्फ़र रहमान की अस्पाइर पार्टी, जिसका आधार बांग्लादेशी मुस्लिम हैं, उसे 45 में 33 सीटें मिली हैं। ग्रीन पार्टी को 5 सीटें मिली हैं, लेबर को भी 5 सीटें मिली हैं, कंजरवेटिव को 1 और एक लिबरल डेमोक्रेट्स को मिली है। इसमें एक बार फिर से लुत्फ़र रहमान को मेयर चुना गया है। लुत्फ़र रहमान के नेतृत्व वाली अस्पाइर पार्टी का मुख्य वोटबैंक बांग्लादेशी मुस्लिम हैं और उससे उसी समुदाय के काउन्सलर चुनकर आए हैं।

ऐसा भी मीडिया में आया है कि रहमान एकदम निरंकुश तरीके से शासन चलाता है। उसके विषय में कहा जाता है कि यह वन मैंन शो है।

कहने के लिए एस्पायर की विचारधारा समाजवाद है, मगर इसकी जो भी नीतियाँ हैं, वह मुख्यतया बांग्लादेशी मुस्लिमों को ध्यान में रखकर ही बनाई गई हैं। जैसे कि बुजुर्गों और अक्षम लोगों के लिए फ्री होम केयर और गरीब बच्चों (जो कि अधिकतर बांग्लादेशी मुस्लिम समुदाय के ही हैं) के लिए फ्री स्कूल मील और स्कूल यूनिफ़ॉर्म। गरीबों के लिए प्रेग्नेंसी पेमेंट्स। और हजारों की संख्या में सस्ते घर का वादा। फ्री ट्रैवल पास। और कम इनकम वाले परिवारों के युवाओं के लिए फ्री लैपटॉप।

Just some of the promises for the residents of Tower Hamlets from some of their newly elected councillors.

Free laptops, free travel and most importantly, additional payments for pregnancies.

Thus incentivising demographic replacement.

Make it make sense. pic.twitter.com/26NxOhC9ek

— The Nationalist GB (@TheNatGB) May 10, 2026

लुत्फ़र रहमान पर है वोटों की हेराफेरी के आरोप

यह और भी चौंकाने वाली बात है कि मेयर लुत्फ़र रहमान पर पूर्व में वोटों की हेराफेरी, मजहबी आधार पर डराने-धमकाने और चुनावी रिश्वत के आरोप न केवल लगे हैं, बल्कि वह इसमें दोषी भी ठहराया जा चुका है। साल 2014 में एक विशेष अदालत द्वारा रहमान को इन सबका दोषी पाया गया था और जज ने यह भी लिखा था कि यह बहुत ही गंभीर मामला है। इसके बाद उसे अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था, मगर 5 साल के प्रतिबंध के बाद रहमान अपनी नई पार्टी अस्पाइर पार्टी के साथ लौटा और उसने शानदार विजय हासिल की।

डाइवर्स काउंसिल क्यों कहना?

एक जो सबसे बड़ा प्रश्न है वह यह कि आखिर इस लगभग श्वेत रहित काउंसिल को डाइवर्स काउंसिल क्यों कहा जा रहा है? क्या एक समुदाय को सत्ता से पूरी तरह से बाहर निकालने और उसके स्थान पर दूसरे समुदाय के आने को डाइवर्स क्यों कहा जा रहा है? ब्रिटेन को जहां एक लिबरल अर्थात उदार और मल्टी कल्चर वाला देश माना जाता है तो विविधता सभी के समावेशीकरण के साथ होनी चाहिए या फिर डेमोग्राफी बदलते ही एक मजहब के काउन्सलर चुने जाने पर विविधता कैसे हो सकती है?

यदि बहुमत व्हाइट्स का होता और जितने व्हाइट अभी टावर हैमलेट्स में चुने गए हैं, उतने मुस्लिम चुने जाते तो क्या इसे डाइवर्स कहा जाता या नस्लवाद? और अस्पाइर द्वारा केवल बांग्लादेशी लोगों को ही टिकट दिए जाने को डाइवर्स कैसे कहा जा सकता है?

Topics: इस्लामवादडेमोग्राफी चेंजलंदन टावर हैमलेट्स की जनसांख्यिकीटावर हैमलेट्स की मुस्लिम आबादी
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