गत गत 9 मई को विश्व संवाद केंद्र, पटना द्वारा आद्य पत्रकार देवर्षि नारद स्मृति कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर ‘भारत के लोकतंत्र की आंतरिक शक्ति’ विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने कहा कि स्वतंत्रता के 80 साल बाद भारत नए लोकतंत्र के दौर में है और लोकतंत्र की नई परिभाषा गढ़ रहा है।
यह इसलिए हो सका है, क्योंकि भारत ने पश्चिम के लोकतंत्र से मुक्ति पा ली है। इसके साथ ही एक चुनौती भी है कि इस नए लोकतंत्र को गढ़ने में कई सामाजिक प्रश्न हल करने होंगे। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी भारत के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने भारत के संविधान को शत-प्रतिशत स्वीकार किया है। पहले के सारे प्रधानमंत्रियों ने संविधान में अपने-अपने तरीके से परिवर्तन के प्रयास किए। सबसे पहले पं. जवाहरलाल नेहरू ने 18 मई, 1951 को बने बनाए संविधान में असंवैधानिक तरीके से संशोधन कराया, जिसमें नागरिक अधिकारों पर आंशिक अंकुश लगाने का संदर्भ था।

इसके बाद इंदिरा गांधी ने तो संविधान की हत्या ही कर दी। आईआईटी, पटना के निदेशक प्रोफेसर टी. एन. सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि भारत जैसा विशाल देश तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए एक परिपक्व लोकतंत्र की ओर तेजी से बढ़ रहा है, यह संतोष की बात है।
समारोह में वर्ष 2026 के लिए देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद पत्रकारिता शिखर सम्मान वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्र को प्रदान किया गया। वहीं उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के लिए केशवराम भट्ट पत्रकारिता सम्मान वरिष्ठ पत्रकार सुबोध कुमार नंदन को तथा बाबूराव पटेल रचनाधर्मिता सम्मान वरिष्ठ छायाकार दीपक कुमार को प्रदान किया गया।

















