ब्राजील में 'गणेश प्रतिमा' पर हंगामा क्यों? जोनस मासेटी ने की 'प्रथम पूज्य' की स्थापना, तो कट्टरपंथियों ने उगला जहर
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ब्राजील में ‘गणेश प्रतिमा’ पर हंगामा क्यों? जोनस मासेटी ने की ‘प्रथम पूज्य’ की स्थापना, तो कट्टरपंथियों ने उगला जहर

ब्राजील के पेट्रोपोलिस में भगवान गणेश की पहली प्रतिमा स्थापित होने के बाद नस्लवादी और हिंदूफोबिक टिप्पणियां सामने आई हैं। जानिए कैसे 'सांस्कृतिक उपनिवेशवाद' के नाम पर हिंदू धर्म को निशाना बनाया जा रहा है और भारत की सहिष्णुता के मुकाबले यह सोच कितनी संकीर्ण है।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by Shivam Dixit
May 14, 2026, 03:55 pm IST
in विश्व, मत अभिमत, धर्म-संस्कृति
Lord Ganesha Statue Brazil Controversy

ब्राजील: गणेश जी की प्रतिमा पर क्यों मचा हंगामा?

Lord Ganesha Statue Brazil Controversy । क्या एक शांतिप्रिय धर्म के आराध्य की प्रतिमा स्थापित करना ‘सांस्कृतिक उपनिवेशवाद’ है? ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में भगवान गणेश की पहली प्रतिमा की स्थापना ने वहां छिपे हिंदूफोबिया को बेनकाब कर दिया है…

ब्राजील में गणेश उत्सव: पद्म श्री जोनस मासेटी (विश्वनाथ) ने की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा

ब्राजील में 9 मई, 2026 को रियो डी जेनेरियो के पेट्रोपोलिस में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई। और यह कुछ गलत भी नहीं है। पूरे विश्व में तीसरे स्थान पर हिन्दू धर्म है और इसके अनुयायी पूरे विश्व में फैले हैं। वे भी चाहते हैं कि उन्हें अपने धर्म के पालन का अधिकार मिले, उनके भी मंदिर हों, उनके देवों को भी उसी प्रकार स्थान मिले, जैसे चर्च या मस्जिद आदि हैं।

मगर फिर बह ब्राजील में  रियो डी जेनेरियो के पेट्रोपोलिस में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित होते ही एक बहुत बड़े वर्ग की नफरत खुलकर सामने आ गई। यह नफरत नस्लवादी थी या हिन्दू धर्म के अस्तित्व से घृणा, यह समझना कठिन है। क्योंकि कुछ नस्लवादियों की नजर में हिन्दू धर्म तो बहुत ही निम्न है।

रो ब्राजील में भी रियो डी जेनेरियो के पेट्रोपोलिस में भगवान गणेश की प्रतिमा के स्थापित होते ही ऐसे लोग अपने-अपने नस्लवादी नफरती विचारों के साथ आगे आ गए। जबकि ब्राजील में पहली ही बार गणेश जी की प्रतिमा स्थापित हुई है, फिर भी लोगों को यह लग रहा है कि जैसे हिन्दू धर्म का अतिक्रमण हो रहा है।

शायद ये लोग हिन्दू धर्म को जानते या समझते नहीं है। पूरे विश्व में एकमात्र हिन्दू धर्म वाला भारत ही है, जो समस्त धर्मावलंबियों का स्वागत हृदय से करता है। वह न ही भेदभाव करता है और न ही वह अधिक पूछताछ करता है। वह सर्वे भवन्तु सुखिन: के सिद्धांत पर चलने वाला धर्म है।

वह तलवार लेकर या लोभ के वशीकरण द्वारा दूसरे मतावलंबियों को स्वयं की ओर आकर्षित नहीं करता है, फिर भी हिंदुओं के प्रति कुछ नस्लवादियों की इस सोच से तमाम प्रश्न उठते हैं।

नस्लवादी नफरत का खुलासा: ‘कीड़े’ और ‘शैतानी गंदगी’ जैसे शब्दों का हुआ प्रयोग

अब यह प्रश्न उठता है कि इस प्रतिमा के विषय में क्या कहा गया? वर्तमान में दक्षिण अमेरिका में 300,000 से 400,000 हिंदू रहते हैं, इसमें सबसे ज्यादा जनसंख्या गुयाना और सूरीनाम जैसे देशों में निवास करती है। ऐसे में ब्राजील जैसे देश में गणेश जी की यह प्रतिमा हिन्दू धर्म के अनुयाइयों के लिए बहुत ही महत्व रखती है।

फिर भी यह प्रश्न उठता है कि गणेश जी की प्रतिमा से किसी को क्या समस्या हो सकती है? जैसे ही इस प्रतिमा की प्राणप्रतिष्ठा का वीडियो वायरल हुआ, वैसे ही लोगों की नफरत खुलकर सामने आ गई।

एक्स पर नस्लवादी टिप्पणियाँ की जाने लगीं। जबकि इस प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा Instituto Vishva Vidya में अद्वैत वेदांता के ब्राज़ीलियन गुरु जोनस मासेटी के द्वारा की गई, जिन्हें विश्वनाथ के नाम से जाना जाता है और जिन्हें भारत की ओर से पद्म श्री भी दिया जा चुका है।

इस प्रतिमा की स्थापना से जहां कई लोगों में हर्ष, उल्लास एवं गर्व का भाव था, तो वहीं कुछ लोग भड़क गए। टाइम्सऑफइंडिया के अनुसार एक यूजर ने ट्रोल करते हुए लिहा कि भारतीय यहाँ पर cultural colonization 2.0 फैला रहे हैं। वहीं एक यूजर ने लिखा कि इससे पहले कि ये कीड़े इधर उधर फैले इन्हें बाहर कर देना चाहिए।

तो एक ने लिखा कि यह हिस्पैनिक अमेरिका है और तुम सबको देश से निकाल देना चाहिए। एक अन्य ने लिखा कि यह एक ईसाई महाद्वीप है।

सांस्कृतिक उपनिवेशवाद 2.0 का झूठा विमर्श: हिंदू धर्म के खिलाफ बढ़ती नफरत की पड़ताल

यह सब देखने में ऐसा लग सकता है कि कुछ सिरफिरे लोगों की सोच है, मगर यह गलतफहमी है। पिछले ही वर्ष अमेरिका के रीपब्लिकन नेता अलेक्जेंडर डंकन ने टेक्सास में हनुमान जी की विशाल प्रतिमा को निशान बनाकर पोस्ट किया था कि म टेक्सास में एक झूठे हिंदू देवता की झूठी मूर्ति को क्यों रहने दे रहे हैं? हम एक ईसाई राष्ट्र हैं।”

टेक्सास में हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर बहुत बवाल हुआ था। कई नस्लवादी लोगों ने इस प्रतिमा पर बहुत अधिक घृणात्मक टिप्पणियाँ की थीं। एक यूजर ने इस प्रतिमा को हिन्दू राक्षस बंदर की मूर्ति कहा था, तो वहीं एक पत्रकार ने हनुमान की मूर्ति को शैतानी कहा था।

सबसे मजे की बात यही है कि टेक्सास में शरिया कानून वाले इलाके अपने पाँव पसार रहे हैं, मगर उन पर ध्यान न देकर एक हनुमान जी की प्रतिमा पर ये नस्लवादी लोग शोर मचा रहे थे। एक यूजर ने इस प्रतिमा को शैतानी गंदगी भी पहले कहा था।

भारत में दुनिया का सबसे पहला चर्च

भारत के हिंदुओं को अपने यहाँ इंच भर जगह न देने वाले लोग कई बार संवाद और सहिष्णुता की परंपरा को एकतरफा कर देते हैं। जो लोग हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को अपने देशों में स्वीकार नहीं करते, उन्हें याद रखना चाहिए कि ईसाई परंपरा के अनुसार भारत में 52 ईस्वी में ही सेंट थॉमस द्वारा सबसे पहले चर्च स्थापित किए गए थे और भारत में स्थापित सात चर्चों की नींव में स्थानीय हिंदुओं का सक्रिय सहयोग था।

चर्चों को जगह देने वाले हिंदुओं का उपहास क्यों?

हिंदुओं के देवी देवताओं की प्रतिमाओं का विरोध करने वाले लोगों को भारत आना चाहिए और देखना चाहिए कि हिंदुओं की भूमि पर कैसे पूरे देश में बाजार, शॉपिंग मॉल, सड़कें और घर रोशनी, क्रिसमस ट्री, सैंटा क्लॉज़ और स्टार से सज जाते हैं — ठीक उसी तरह जैसे दीपावली के दौरान सजते हैं।

शहरों में क्रिसमस मार्केट लगते हैं, कैरोल गाए जाते हैं और लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं। यहाँ तक कि सरकारी छुट्टियाँ भी होती हैं।

 

Topics: Cultural ColonizationBrazil PetropolishinduphobiaAdvaita VedantaBrazil Hindu NewsLord Ganesha StatueJonas Masetti
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