सोमनाथ मन्दिर पर दुर्दांत जिहादी लुटेरे मोहम्मद गजनी के हमले को पूरे हजार साल हो गए हैं। आज देश इसी मंदिर के पुन:निर्माण की 75वीं जयंती मना रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ठीक ही कहा है कि ‘अतीत के आक्रमणकारी आज समय की धूल बन चुके हैं। उनका नाम अब विनाश के प्रतीक के तौर पर लिया जाता है, जबकि सोमनाथ आज भी अपनी आशा बिखेरता हुआ प्रकाशमान खड़ा है। सोमनाथ हमें ये बताता है कि घृणा और कट्टरता में विनाश की विकृत ताकत हो सकती है, लेकिन आस्था में सृजन की शक्ति होती है।’ सोमनाथ मन्दिर पर एक-दो नहीं, बल्कि असंख्य आक्रमण हुए और इन हमलों का हिन्दू शूरवीरों ने बहादुरी से सामना किया।
कौन थे वीर हमीर सिंह
गहलोत राजवंश के क्षत्रिय कुल में जन्म लेने वाले महाप्रतापी हमीर सिंह गोहिल एक ऐसे वीर हैं, जिन्होंने सनातन परम्परा के मान्य द्वादशलिंगों में से प्रथम लिंग सोमनाथ मन्दिर को बचाने के लिए अपने प्राणों की चिंता नहीं की। उन्होंने दिल्ली के सुल्तान मोहम्मद तुगलक -(2) के गवर्नर जफर खान की सेना से युद्ध करते हुए अद्वितीय साहस का परिचय दिया। बात 14वीं शताब्दी की है। गुजरात के अमरेली जिले के अर्थिला के राजा थे भीम सिंह गोहिल। उनके तीन बेटे थे दुदाजी, अर्जुन और हमीर। गुजरात के हालात बदल रहे थे।
महाशिवरात्रि में शिवपूजा पर प्रतिबंध
दिल्ली के सुल्तान मोहम्मद तुगलक द्वितीय ने जूनागढ़ में अपने गवर्नर शम्सुद्दीन को हटाकर जफर खान को गवर्नर नियुक्त किया। जफर खान बेहद ही क्रूर और धर्मांध था। वह गुजरात में हिन्दुओं पर तरह-तरह से अत्याचार और मन्दिरों को ध्वस्त करता था। जफर खान का अगला निशाना था सोमेश्वर धाम यानी सोमनाथ मन्दिर। उसने सोमनाथ में रसूल खान को थानेदार नियुक्त किया और आदेश दिया कि मन्दिर में हिन्दुओं को इकट्ठा न होने दे। महाशिवरात्रि थी और हर कोई भगवान शिव का अभिषेक करना चाहता था। रसूल खान ने उन्हें रोकने के लिए श्रद्धालुओं के साथ मारपीट शुरू कर दी। इसे आक्रोशित हिन्दू श्रद्धालुओं ने रसूल खान को मार डाला। इससे जफर खान को सोमनाथ मन्दिर पर हमला करने का मौका मिल गया।
बदलते हालात में हिन्दुओं की तैयारी
उधर, भीम सिंह गोहिल और उनके दोनों बेटे बदले हालात के लिए तैयार हो रहे थे, जबकि हमीर सिंह को इसके बारे में जानकारी नहीं थी। एक दिन वे दरबारगढ़ आए और अपने सबसे बड़े भाई दूदाजी की पत्नी से खाना माँगा। तब उनकी बड़ी भाभी ने कहा, ‘क्यों देवर जी, इतनी जल्दी क्या है ? खाना खाकर सोमनाथ मन्दिर की रक्षा के लिए साका करने जाना है?’ हमीर को पहली बार सोमनाथ मन्दिर पर संकट के बारे में पता चला। उन्होंने अपनी भाभी से पूछा कि ‘क्या सोमनाथ पर संकट है?’ तब उनकी भाभी ने बताया कि दिल्ली का सूबेदार जफर खान अपने दल के साथ हमले के लिए रास्ते में है। यह बात सुनकर हमीर सिंह जी बिना खाना खाए ही खड़े हो गए। वे अपने 200 साथियों को लेकर जफर खान से लड़ने के लिए तैयारी करने लगे।
सरदार वेगड़ाजी का साथ
रास्ते में उन्हें द्रोणगढ़ा गाँव में भीलों के सरदार वेगड़ाजी मिल गए। दोनों मित्र थे। वेगड़ाजी भी हमीर सिंह के साथ जफर खान के खिलाफ युद्ध के लिए अपनी 1200 सैनिकों को लेकर निकल पड़े। वे सोमनाथ मंदिर के प्रांगण में पहुँचकर जफर खान की सेना का इंतजार करने लगे। जफर खान अपनी सेना के साथ जैसे सोमनाथ मन्दिर की ओर बढ़ा, दोनों ओर के सैनिकों में भीषण युद्ध हुआ। जफर खान के सैनिक गाजर-मूली की तरह काटे जाने लगे। आखिरकार जफर खान ने हाथियों पर लाई तोपों का प्रयोग शुरू कर दिया। इससे हमीर सिंह की सेना को भारी नुकसान हुआ। वेगड़ाजी अपनी सेना के साथ बाहरी रक्षा कवच के रूप में जफर खान से लड़ रहे थे। वहीं, हमीर सिंह मन्दिर और गर्भगृह को बचा रहे थे। इसी बीच जफर खान के एक महावत ने अपने हाथी को इशारा करके वेगड़ाजी को रौंद दिया। इससे हमीर सिंह के साथी वीर वेगड़ाजी वीरगति को प्राप्त हो गए।
मन्दिर की घेरेबंदी
जफर खान ने मन्दिर को तीन तरफ से घेर रखा था और चौथी तरफ समुद्र था। जफर खान की विशाल सेना को 200 राजपूतों की सेना ने रात भर उलझा कर रखा। रात में निर्णय हुआ कि सुबह होते ही जफर खान की सेना पर हमला किया जाएगा। ऐसा ही हुआ। सिर पर केसरिया कफन बाँधे शौर्यवान राजपूतों की सेना ने जफर खान पर हमला कर दिया। दोनों से तरफ से भीषण युद्ध हुआ था। जफर खान की विशाल सेना के बीच राजपूत वीरगति को प्राप्त होने लगे।
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बिना धड़ के लड़ा वीर राजपूत
इसी बीच जफर खान ने भी हमीर सिंह जी पर पीछे से हमला कर दिया। इससे उनका सिर कट कर धरती पर गिर गया, लेकिन धड़ युद्ध करता रहा। आखिरकार बेजान धड़ कब तक लड़ता? वीर हमीर सिंह गोहिल सोमनाथ को बचाते हुए भगवान शिव के धाम चले गए। अकेले हमीर सिंह ने 9 दिनों तक जफर खान को मन्दिर में घुसने नहीं दिया।
श्रद्धालु आज भी करते हैं इन्हें नमन
इस मन्दिर को बचाने के लिए अपना प्राण उत्सर्ग करने वाले वीर हमीर सिंह गोहिल व वीर वेगड़ाजी की प्रतिमा मन्दिर में स्थापित हैं। सोमनाथ मन्दिर के बाहर घोड़े पर सवार और हाथ में भाला लिए वीर हमीर सिंह गोहिल की आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई है। इसका मन्दिर और श्रद्धालुओं में विशेष महत्त्व है। सोमनाथ मन्दिर के शिखर पर फहराया जाने वाला ध्वज पहले वीर हमीर सिंह गोहिल के स्मारक पर चढ़ाया जाता है। उसके बाद मन्दिर के शिखर पर लगाया जाता है। आज इस अवसर पर हमारा दायित्व बनता है कि हम उन वीरों को श्रद्धासुमन अर्पित करें।
















