NCRB : भारत में पशुओं पर होने वाले अत्याचार को भी पहली बार आंकड़ों में लिया गया
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NCRB : भारत में पशुओं पर होने वाले अत्याचार को भी पहली बार आंकड़ों में लिया गया

वर्ष 2020 में केरल के पलक्कड में गर्भिणी हथिनी ने पटाखों से भरा हुआ अन्नानास खा लिया था और फिर उसका जबड़ा क्षत-विक्षत हो गया था।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
May 10, 2026, 07:46 pm IST
in भारत
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत सरकार ने एक अनूठी पहल करते हुए पहली बार एनसीआरबी के आंकड़ों में पशुओं पर हो रहे अत्याचारों को भी शामिल किया है। वर्ष 2024 में पूरे भारत में पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के अंतर्गत कुल 9093 मामले दर्ज किये गए थे।

यह भारत सरकार द्वारा पहली बार कदम उठाया गया है। कुल 10,312 लोगों को गिरफ़्तार किया गया, मगर सबूतों के अभाव में 147 मामलों को छोड़ दिया गया।

पशु क्रूरता के मामले में दोषी ठहराए जाने की दर 80.5% है। हालांकि इस बात पर बहस होनी आवश्यक है कि पशुओं के साथ क्रूरता करने पर दंड कितना मिलता है। मगर एक बात जो इसमें मिसिंग है, वह है पशुओं के साथ बलात्कार करने पर दंड का अभाव।

भारतीय न्याय संहिता में पशुओं के साथ दुष्कर्म पर सजा नहीं है, हालांकि उसे पशु को पीड़ा पहुंचाने के आरोप में पशु क्रूरता अधिनियम के अंतर्गत लिया जा सकता है। फिर भी इसे सरकार को संज्ञान में लेना होगा कि बेसहारा कुत्तों और गायों के साथ इस तरह के कई मामले सामने आए हैं, और अपराधी यदि पशुओं के साथ ऐसा कर सकते हैं तो उनसे इंसान भी सुरक्षित नहीं है, यह आपराधिक मानसिकता है। ऐसी मानसिकता वाले व्यक्ति को दंड ही अंतिम उपाय है।

किन राज्यों में कितने मामले

आंकड़ों को राज्यवार देखा जाए तो महाराष्ट्र इसमें सबसे ऊपर है, जहां पशु क्रूरता के 2927 मामले सामने आए हैं। उसके बाद तेलंगाना है, जहां पर 1890 मामले आए हैं, केरल में 1510 मामले हैं और उसके बाद उत्तर प्रदेश में 1121 मामले सामने आए हैं। दिल्ली में ये आंकड़ा 35 है तो जम्मू-कश्मीर में यह 223 था।

कई राज्यों जैसे कि अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, लद्दाख, लक्षद्वीप और चंडीगढ़ में ऐसा एक भी मामला नहीं था। यह भी हो सकता है कि इन मामलों को दर्ज न किया गया हो।

तेलंगाना में कुत्तों को जहर देकर मारने की घटनाएं

जब इन आंकड़ों को एनसीआरबी ने पहली बार दर्ज किया है तो यह भी महत्वपूर्ण है कि कैसे तेलंगाना में अभी जनवरी में ही हजारों बेसहारा कुत्तों को जहर देकर मार दिया गया और यह भी पशु कार्यकर्ता कहते हैं कि आज भी उनकी हत्याएं चालू हैं, मगर मीडिया में नहीं आ रही हैं।

केरल में गर्भिणी हथिनी के मुंह में बम फटा था

वर्ष 2020 में घटी इस घटना ने पशु क्रूरता पर बहस आरंभ की थी। इस घटना में केरल के पलक्कड में 15 वर्षीय गर्भिणी हथिनी ने पटाखों से भरा हुआ अन्नानास खा लिया था और फिर उसका जबड़ा क्षत विक्षत हो गया था। दर्द और जलन को कम करने के लिए वह वेल्लियार नदी (Velliyar River) के पानी में खड़ी हो गई, जहाँ अंततः उसकी मौत हो गई थी।

गायों के मुंह में बम फटने की घटनाएं

हाल ही में मध्यप्रदेश और कर्नाटक से घटनाएं सामने आई थीं, जिनमें गायों के मुंह में बम फट गए थे। कहा जाता है कि किसान जंगली सूअरों के लिए खाने में बम रखते हैं कि वे आयें और खाएं तो वे मर जाएं। मगर इनका शिकार गायें तथा हाथी होते हैं। मध्यप्रदेश में बैतूल में हाल ही में आटे की लोई में रखे बम फटने से 3 गायों की मौत हो गई थी और 8 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गई हैं।

इसके साथ ही बेसहारा कुत्तों के साथ दुष्कर्म, उनकी पूंछ में पटाखे बांधने, पिल्लों को जिंदा जलाने जैसी तमाम घटनाएं आए दिन सामने आती रहती हैं।

परंतु इन घटनाओं का रिकार्ड रखना अपने आप में महत्वपूर्ण है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इससे सरकार के सरोकार भी परिलक्षित होते हैं।

अमेरिका में हैं पशुओं के लिए “execution chamber”

अमेरिका के कैलिफोर्निया से ऐसा दृश्य सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर सभी को झकझोर कर रख दिया है। यह कैलिफोर्निया में पशुओं के एक्सक्यूशन चैंबर से था। कई कुत्तों को मारने के लिए लेकर जाया जा रहा है। इसे वे लोग दया मृत्यु की संज्ञा देते हैं। पश्चिमी देशों में बेसहारा पशुओं को मार देना आम है और वहाँ पर यह सरकारी स्तर पर होता है। अमेरिका जैसे विकसित देश जहां पर सड़कों पर कुत्ते दिखाई नहीं देते हैं, वहाँ पर हर साल लाखों कुत्तों को शेल्टर होम्स में मार दिया जाता है। सड़क पर यदि कुत्ता दिखता है तो उसे शेल्टर होम में ले जाया जाता है और वहाँ पर यदि किसी ने उसे गोद लिया तो ठीक है, नहीं तो जगह के अभाव के कारण फिर उसे मार दिया जाता है।

हाल ही में मोरक्को में जहां वर्ष 2030 में फीफा विश्व कप से पहले सड़कों से लाखों कुत्तों को हटाकर मारा जा रहा है। तुर्किए में भी हाल ही के नियम के अनुसार बेसहारा कुत्तों को सड़क से हटाकर शेल्टर होम में डालने की नीति की पशु प्रेमियों द्वारा आलोचना की जा रही है।

लोगों को अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के आने के बाद उन अमेरिकी कुत्तों की तस्वीरें याद होंगी, जिनके विषय में यह दावा किया गया था कि वे सेना की यूनिट के कुत्ते थे और जिन्हें अमेरिकी सैनिक छोड़ गए थे। हालांकि बाद में पेंटागन से यह सफाई आई थी कि पिंजरे में बंद ये कुत्ते सेना के नहीं बल्कि निजी ठेकेदारों के थे। वहीं भारत की सेना ने अपने एक भी स्निफर डॉग को अफगानिस्तान में नहीं छोड़ा था और वहाँ से माया,रूबी और बॉबी सहित तीनों ही खोजी कुत्ते भारत सुरक्षित आ गए थे।

यह दिखाता है कि भारत की सरकार कहीं न कहीं सजग है और उसके लिए सभी का जीवन और संरक्षयां महत्वपूर्ण है।

एनसीआरबी में आँकड़े शामिल करना कहीं न कहीं पशु सुरक्षा के विषय में लोगों को जागरूक करने के लिए एक कदम भी हो सकता है और पशु प्रेमियों के लिए भी यह राहत की खबर है क्योंकि अब उनके पास भी आँकड़े हैं।

 

Topics: एनसीआरबी पशु क्रूरतापशुओं का संरक्षणएनसीआरबी के आंकड़े
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