प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बेंगलुरु में ‘द आर्ट ऑफ लिविंग’ फाउंडेशन की 45वीं वर्षगांठ के समारोह में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने नवनिर्मित ‘ध्यान मंदिर’ का उद्घाटन किया और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर की उपस्थिति में कई अन्य जनकल्याणकारी पहलों की शुरुआत की।
सेवा और संकल्प का ‘ध्यान मंदिर’
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में नवनिर्मित ‘ध्यान मंदिर’ को सेवा और सामूहिक कल्याण की भावना का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब मन में सेवा का भाव हो और इरादे पूरी तरह स्पष्ट हों तो हर प्रयास ईश्वर की कृपा से सकारात्मक फल देता है। यह ध्यान मंदिर उसी सामूहिक संकल्प का परिणाम है।
श्री श्री रवि शंकर द्वारा की गई प्रशंसा का विनम्रता से उत्तर देते हुए पीएम ने कहा, ‘गुरुदेव कह रहे थे कि कोई मुझे धन्यवाद नहीं दे सकता क्योंकि मैं आप सबका हूं। मैं यहां आप सबके बीच और आप सबके कारण ही हूं। गुरुदेव के आशीर्वाद से ‘कमल’ (विकास और गौरव का प्रतीक) देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।”
बेंगलुरु: सॉफ्टवेयर और अध्यात्म का अनूठा मेल
पीएम मोदी ने बेंगलुरु शहर की तारीफ करते हुए इसे भारत की ‘सांस्कृतिक और तकनीकी राजधानी’ का एक हाइब्रिड मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु आज दुनिया भर में अपनी ‘सॉफ्टवेयर और सेवाओं’ के लिए जाना जाता है, लेकिन इसकी एक और बड़ी पहचान इसकी आध्यात्मिक चेतना है। योग, ध्यान और प्राणायाम जैसी भारत की सांस्कृतिक विरासत को इस शहर ने नई ऊर्जा दी है। श्री श्री रवि शंकर ने दशकों पहले जो ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ का बीज बोया था, वह आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जो दुनिया के कोने-कोने में लोगों को मानसिक शांति और जीवन जीने की कला सिखा रहा है।
भारत की सांस्कृतिक विविधता पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में इतनी भाषाएं, इतने रिवाज और इतनी अलग-अलग पूजा पद्धतियां हैं, फिर भी क्या है जो हमें जोड़ता है? पीएम के अनुसार, इस विविधता का मूल आधार यह भावना है कि ‘हमें केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए जीना है।’ उन्होंने कहा कि भारत के सभी आध्यात्मिक आंदोलनों का अंतिम लक्ष्य मानवता की सेवा ही रहा है और ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के हर संकल्प में यह सेवा भाव स्पष्ट रूप से झलकता है।
सरकार से शक्तिशाली है समाज
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शासन के मूल मंत्र ‘सबका प्रयास’ को दोहराते हुए कहा कि कोई भी सरकार अकेले देश को महान नहीं बना सकती। उन्होंने कहा, ‘मेरा हमेशा से मानना रहा है कि समाज, राजनीति और सरकारों से कहीं अधिक शक्तिशाली होता है। कोई भी सरकारी अभियान या मिशन तभी सफल हो सकता है जब समाज उसमें अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करे।’
उन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा चलाए जा रहे ग्रामीण विकास केंद्रों, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों, जनजातीय उत्थान और जेल के कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य सुधारने वाली पहलों की सराहना की।
युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य और विकसित भारत
पीएम ने स्पष्ट किया कि ‘विकसित भारत’ का निर्माण केवल ऊंची इमारतों या बड़ी अर्थव्यवस्था से नहीं होगा बल्कि इसके लिए देश के युवाओं का मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त होना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि भारत आज डिजिटल क्रांति, स्पेस टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इकोसिस्टम में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। इसमें युवाओं की बड़ी भूमिका है। पीएम ने कहा कि विकसित भारत ऐसे युवाओं द्वारा बनाया जाएगा जो मानसिक रूप से शांत और सामाजिक रूप से संवेदनशील होंगे। इसके लिए योग और ध्यान को जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है।
संबोधन के समापन के करीब प्रधानमंत्री ने उपस्थित जनसमूह और फाउंडेशन से एक विशेष आग्रह किया। उन्होंने पर्यावरण सुरक्षा को राष्ट्र निर्माण का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने श्री श्री रवि शंकर और उनके अनुयायियों से आह्वान किया कि वे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को वैश्विक स्तर पर ले जाएं। उन्होंने कहा कि प्रकृति की रक्षा करना हमारी आध्यात्मिक जिम्मेदारी भी है।

















