त्तराखंड की वो घाटी जहां 1962 के बाद नहीं लौटा कोई गांववाला
June 28, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत उत्तराखंड

उत्तराखंड की वो घाटी जहां 1962 के बाद नहीं लौटा कोई गांववाला, अब फिर लौटेगी रौनक

1962 की चाइना लड़ाई मे नेलोंग और जादूँग दो भोटिया जनजाति के गाँव थे, ये गाँव तिब्बत से व्यापार का मुख्य पड़ाव हुआ करते थे। 1962 की लड़ाई के बाद भारतीय सेना ने इन दोनों गाँव के निवासियों को हर्षिल के पास बगोरी गाँव मे बसा दिया था।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Mahak Singh
May 9, 2026, 12:46 pm IST
in उत्तराखंड
घाटी

घाटी

गंगोत्री घाटी में हरसिल से गंगोत्री मंदिर तक लगभग 20 किलोमीटर तक घने देवदार के जंगल एक मनमोहक दृश्य बनाते हैं। हालांकि, इस हरी-भरी घाटी में, गंगोत्री से पांच किलोमीटर पहले, बाईं ओर एक घाटी है, जहां नदी के तल से लेकर पहाड़ की चोटी तक, केवल पत्थर ही दिखाई देते हैं। इस घाटी का नाम है नेलोंग और जादूँग घाटी।

1962 युद्ध के बाद उजड़े गाँव फिर बसेंगे

1962 की चाइना लड़ाई मे नेलोंग और जादूँग दो भोटिया जनजाति के गाँव थे, ये गाँव तिब्बत से व्यापार का मुख्य पड़ाव हुआ करते थे। 1962 की लड़ाई के बाद भारतीय सेना ने इन दोनों गाँव के निवासियों को हर्षिल के पास बगोरी गाँव मे बसा दिया था। तब से ये गॉव बीरान पड़े है। अब भारत सरकार पुनः इन दोनों गाँव के निवासियों को यहाँ बसाना चाह रही है। 1962 के समय जिन जिन परिवारों के यहाँ घर थे उन सबको भारत सरकार होमस्टे बनाकर दे रही है। मित्रों अगले कुछ वर्षो मे यहाँ हम मे से कुछ लोग होमस्टे ने रुकने का आनंद लेने वाले है। नेलोंग जादूँग घाटी को उत्तराखंड का तिब्बत भी कहा जाता है।

नेलोंग-जादूँग पर्यटन को बढ़ावा

नेलोंग जादूँग जाने के लिये inner line परमिट  बनाना जरुरी है इसके बिना आपको यहाँ प्रवेश नहीं मिलेगा। इसके सिवाय प्रति व्यक्ति 150/- रुपया और गाडी का 250/- रुपया फीस जंगलात विभाग की चौकी मे जमा करनी जरुरी है। छोटी गाडी और मोटर साइकिल यहाँ प्रवेश वर्जित है। मित्रों जब कभी आप गंगोत्री घूमने या तीर्थ यात्रा मे आये तो एक दिन जादूँग जाने की योजना जरूर बनाये। आपको गंगोत्री की हरी भरी घाटी से अलग अहसास महसूस होगा। सीएम पुष्कर सिंह धामी कहते है कि सीमांत गांवों को पुनः आबाद करना पीएम मोदी का विजन है, हमारी सरकार ने इन गांवों को आर्थिकी से जोड़ने के लिए कई योजनाएं शुरू की है इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

Topics: Nelong Valley Uttarakhandजादूँग घाटीGangotri Travelगंगोत्री पर्यटनउत्तराखंड का तिब्बतनेलोंग-जादूँग यात्राInner Line Permitगंगोत्री ट्रिपउत्तरकाशी पर्यटनउत्तराखंड पर्यटनदेवदार जंगलKam Pushkar Singh Dhamiनेलोंग वैली1962 भारत-चीन युद्धJadung Valleyनेलोंग घाटी
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

चमोली में ‘रम्माण’ का भव्य आयोजन! यूनेस्को धरोहर में मुखौटों और रामलीला ने मोहा दिल

‘चाचा कम्प्रोमाइज्ड?’ नेहरू को लेकर भाजपा ने किया बड़ा हमला, 1962 युद्ध पर कांग्रेस से मांगा जवाब

उत्तराखंड रोपवे योजना: समिति गठित, कैंची धाम को काठगोदाम-हनुमानगढ़ी प्रोजेक्ट में शामिल

देहरादून : ISBT पहुंचे सीएम धामी, गंदगी देख खुद ही उठाई झाड़ू, अधिकारीयों को लगे फटकार

प्रदर्शनी

उत्तराखंड रजत जयंती उत्सव: FRI देहरादून में लगी भव्य प्रदर्शनी, आम जनता के लिए खुला दरवाजा

शारदा कॉरिडोर : सनातन और जन भावना के अनुरूप हो कॉरिडोर निर्माण कार्य – धामी

Load More

ताज़ा समाचार

भारत टैक्सी का शुभांरभ करते केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह

अमित शाह ने गुजरात के लिए ‘भारत टैक्सी’ का किया शुभारंभ, कहा-दो साल में 500 शहरों और गांवों तक पहुंचेगी सेवा

National Seminar at Dev Sanskriti Vishwavidyalaya

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी: जे.पी. नड्डा ने अंगदान को बताया मानव सेवा का सर्वोच्च कार्य

Bankim Chandra chattopadhyay Vande Matram

युवाओं के लिए बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की साहित्यिक विरासत, राष्ट्र चेतना का मंत्र

प्रतीकात्मक चित्र

NCB रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा: भारत में 100 गुना बढ़ी ड्रोन से ड्रग तस्करी, पंजाब बना सबसे बड़ा हॉटस्पॉट!

Emergency Andolan Aur Vishwasghat Book Launch Ajay Sethia Ram Bahadur Rai KN Govindacharya

आपातकाल लोकतंत्र नहीं, इंदिरा गांधी की सत्ता बचाने का फैसला था : रामबहादुर राय

Operation sindoor

ऑपरेशन सिंदूर पर कांग्रेस की ओछी राजनीति : रक्षा मंत्री के भाषण को गलत तरीके से किया जा रहा पेश, फैलाया जा रहा झूठ

Operation sindoor

ऑपरेशन सिंदूर: बलिदानी जवानों को लेकर मीडिया-सोशल मीडिया में फैली अफवाह, रक्षा मंत्रालय ने बताई सच्चाई

Haridwar Kumbh 2027 Highways Project NHAI Spur to Haridwar Bypass Road Construction

हरिद्वार कुंभ 2027: NHAI ने बिछाया सड़कों का जाल, दिल्ली-पश्चिमी यूपी से आना होगा बेहद आसान!

प्रतीकात्मक चित्र

मुहर्रम : स्कूल की दीवार तोड़कर ताजिया ले जाने की जिद, पुलिस ने रोका तो कर दिया हमला, 11 आरोपी गिरफ्तार

सुभाष आर्य

कांग्रेस ने अभी तक देश से माफी नहीं मांगी है

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies