त्तराखंड की वो घाटी जहां 1962 के बाद नहीं लौटा कोई गांववाला
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होम भारत उत्तराखंड

उत्तराखंड की वो घाटी जहां 1962 के बाद नहीं लौटा कोई गांववाला, अब फिर लौटेगी रौनक

1962 की चाइना लड़ाई मे नेलोंग और जादूँग दो भोटिया जनजाति के गाँव थे, ये गाँव तिब्बत से व्यापार का मुख्य पड़ाव हुआ करते थे। 1962 की लड़ाई के बाद भारतीय सेना ने इन दोनों गाँव के निवासियों को हर्षिल के पास बगोरी गाँव मे बसा दिया था।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Mahak Singh
May 9, 2026, 12:46 pm IST
in उत्तराखंड
घाटी

घाटी

गंगोत्री घाटी में हरसिल से गंगोत्री मंदिर तक लगभग 20 किलोमीटर तक घने देवदार के जंगल एक मनमोहक दृश्य बनाते हैं। हालांकि, इस हरी-भरी घाटी में, गंगोत्री से पांच किलोमीटर पहले, बाईं ओर एक घाटी है, जहां नदी के तल से लेकर पहाड़ की चोटी तक, केवल पत्थर ही दिखाई देते हैं। इस घाटी का नाम है नेलोंग और जादूँग घाटी।

1962 युद्ध के बाद उजड़े गाँव फिर बसेंगे

1962 की चाइना लड़ाई मे नेलोंग और जादूँग दो भोटिया जनजाति के गाँव थे, ये गाँव तिब्बत से व्यापार का मुख्य पड़ाव हुआ करते थे। 1962 की लड़ाई के बाद भारतीय सेना ने इन दोनों गाँव के निवासियों को हर्षिल के पास बगोरी गाँव मे बसा दिया था। तब से ये गॉव बीरान पड़े है। अब भारत सरकार पुनः इन दोनों गाँव के निवासियों को यहाँ बसाना चाह रही है। 1962 के समय जिन जिन परिवारों के यहाँ घर थे उन सबको भारत सरकार होमस्टे बनाकर दे रही है। मित्रों अगले कुछ वर्षो मे यहाँ हम मे से कुछ लोग होमस्टे ने रुकने का आनंद लेने वाले है। नेलोंग जादूँग घाटी को उत्तराखंड का तिब्बत भी कहा जाता है।

नेलोंग-जादूँग पर्यटन को बढ़ावा

नेलोंग जादूँग जाने के लिये inner line परमिट  बनाना जरुरी है इसके बिना आपको यहाँ प्रवेश नहीं मिलेगा। इसके सिवाय प्रति व्यक्ति 150/- रुपया और गाडी का 250/- रुपया फीस जंगलात विभाग की चौकी मे जमा करनी जरुरी है। छोटी गाडी और मोटर साइकिल यहाँ प्रवेश वर्जित है। मित्रों जब कभी आप गंगोत्री घूमने या तीर्थ यात्रा मे आये तो एक दिन जादूँग जाने की योजना जरूर बनाये। आपको गंगोत्री की हरी भरी घाटी से अलग अहसास महसूस होगा। सीएम पुष्कर सिंह धामी कहते है कि सीमांत गांवों को पुनः आबाद करना पीएम मोदी का विजन है, हमारी सरकार ने इन गांवों को आर्थिकी से जोड़ने के लिए कई योजनाएं शुरू की है इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

Topics: Inner Line Permitगंगोत्री ट्रिपउत्तरकाशी पर्यटनउत्तराखंड पर्यटनदेवदार जंगलKam Pushkar Singh Dhamiनेलोंग वैली1962 भारत-चीन युद्धJadung Valleyनेलोंग घाटीNelong Valley Uttarakhandजादूँग घाटीGangotri Travelगंगोत्री पर्यटनउत्तराखंड का तिब्बतनेलोंग-जादूँग यात्रा
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