एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ जैसी वैधानिक सुरक्षा देने का विरोध किया है। ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ एक देवी की स्तुति है, इसलिए इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जा नहीं दिया जा सकता। उनके मुताबिक ‘जन गण मन’ पूरे भारत और उसके लोगों का सम्मान करता है और किसी खास धर्म का समर्थन नहीं करता।
ओवैसी का विवादित बयान
ओवैसी ने कहा कि धर्म और राष्ट्र एक नहीं होते। उन्होंने संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी प्रस्तावना “हम भारत के लोग” से शुरू होती है, न कि “भारत माता” से। उनका कहना है कि भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां हर नागरिक को अपनी आस्था और विचार रखने की आजादी है। उनका कहना है कि संविधान सभा में कुछ लोगों ने देवी या ईश्वर के नाम से प्रस्तावना शुरू करने की मांग की थी, लेकिन उन सभी प्रस्तावों को खारिज कर दिया गया था।
Vande Mataram is an ode to a goddess. It cannot be treated on par with the national anthem. Jana Gana Mana celebrates India and its people, not a particular religion. Religion ≠ nation. The man who wrote Vande Mataram was sympathetic to the British Raj and despised Muslims.…
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) May 7, 2026
वंदे मातरम् पर राजनीति तेज
ओवैसी ने ‘वंदे मातरम’ के लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय पर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि लेखक मुसलमानों के प्रति नफरत रखते थे। उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर और सुभाष चंद्र बोस जैसे कई नेताओं ने भी इसके कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई थी।
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दूसरी ओर बीजेपी नेताओं ने ओवैसी के बयान की आलोचना की है। एन. रामचंदर राव ने कहा कि ओवैसी हर सांस्कृतिक प्रतीक को धार्मिक खतरे के रूप में देखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह वही राजनीति है जिसका इस्तेमाल कभी मुहम्मद अली जिन्ना ने किया था। दरअसल, केंद्र सरकार ने प्रस्ताव पास किया है कि ‘वंदे मातरम्’ को बाधित करना अब ‘जन गण मन’ की तरह दंडनीय माना जाएगा। सरकार का कहना है कि यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन की पहचान रहा है और इसे सम्मान देना जरूरी है।

















