भुवनेश्वर। ओडिशा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित दसवीं बोर्ड की परीक्षा में विद्या भारती द्वारा संचालित सरस्वती शिशु विद्या मंदिरों के छात्र छात्राओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी है। पिछले अनेक वर्षों की तरह 2026 के दसवीं बोर्ड की परीक्षा में विद्या भारती से संबद्ध शिक्षा विकास समिति के कुल 322 विद्यालयों के 99.97 प्रतिशत छात्र- छात्राओं को सफलता मिली है। सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के दो छात्रों ने पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहे हैं।
शिक्षा विकास समिति ओडिशा के अध्यक्ष डॉ किशोर महांति ने बताया कि राज्य के कुल 322 शिशु विद्या मंदिरों के 15214 छात्र छात्रा दसवीं बोर्ड की परीक्षा में बैठे थे। इसमें से 15,209 छात्र छात्राओं को सफलता मिली है जो कि 99.97 प्रतिशत है । 322 में से 317 सरस्वती शिशु मंदिरों का परीक्षा का परिणाम शत प्रतिशत रहा । इसमें से 15 विद्यालय ऐसे हैं जिसके सभी छात्र छात्राओं ने 60 प्रतिशत से अधिक अंक लेकर उत्तीर्ण हुए हैं। डॉ महांति ने बताया कि पूरे प्रदेश में 24 सौ छात्र छात्राओं ने ए-1 यानी 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाने में सफलता पायी है । इन 24 सौ छात्र छात्राओं में राज्य के शिशु मंदिरों के कुल 779 छात्र छात्र 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किया है ।

उन्होंने बताया कि सरस्वती शिशु मंदिरों के 2586 छात्र छात्राएं ए2, 3674 छात्र छात्राएं बी1 ग्रेड में उत्तीर्ण हुए हैं । इसी तरह 3878 छात्र छात्राएं बी2 ग्रेड में उत्तीर्ण हुए हैं । 2865 छात्र छात्राओं ने सी ग्रेड में सफलता हासिल की है। डॉ महांति ने बताया कि सरस्वती शिशु विद्यामंदिरों के दो छात्रों ने पूरे राज्य में टॉप किया है । इनमें मयुरभंज जिला मुख्यालय बारिपदा के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के पार्थ सारथी महांत व बालेश्वर जिले के सोरो स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के आशुतोष नायक ने छह सौ में से 588 अंक हासिल किया है।
शिक्षा विकास समिति के प्रदेश सचिव सरोज हाती ने बताया कि पिछले दो दशकों से सरस्वती शिशु विद्या मदिरों के छात्र छात्राएं ओडिशा में दसवीं बोर्ड की परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन करते आ रहे हैं । इसका कारण है कि इन विद्यालयों में विद्यार्थियों को भारतीयता से ओतप्रोत चरित्र निर्माण के साथ साथ अध्ययन के क्षेत्र में कैसे वे श्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकेंगे इस पर पहली कक्षा से ही ध्यान दिया जाता है। उन्होंने बताया कि सरस्वती शिशु विद्या मंदिरों में केवल किताबी शिक्षा पर ही ध्यान नहीं दिया जाता बल्कि छात्र छात्राओं के समग्र विकास पर सुनियोजित तरीके से ध्यान दिया जाता है । 2020 की राष्ट्रीय़ शिक्षा नीति ओडिशा में 2025 में शुरु की गई है जिसमें पंचकोषीय शिक्षा की बात कही गई है । उन्होंने बताया कि यह पंचकोषीय शिक्षा ओडिशा के शिशु विद्यामंदिरों में 1977 से दी जा रही है । यही कारण है कि यहां से निकलने वाले छात्र छात्राएं अच्छे अंकों के साथ साथ अच्छे चरित्रवान व्यक्ति के रुप में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं ।
उन्होंने बताया कि यहां पहली कक्षा से ही विज्ञान मेला, गणित मेला, संस्कृति मेला व खेलकुद की प्रतियोगिताओं का आय़ोजन विद्यालय स्तर से लेकर संकुल, जिला व प्रादेशिक स्तर पर किया जाता है और इसके लिए बच्चों को लगातार प्रोत्साहित किया जाता है। शिक्षा विकास समिति ओडिशा के प्रांत परीक्षा संयोजक मनोज कुमार दाश का कहना है कि बच्चों में गणित व विज्ञान की सोच को विकसित कराने के लिए समिति द्वारा विशेष प्रयास किये जाते हैं । शिशु विद्या मंदिर विद्यालयों के सफलता के पीछे यह भी एक प्रमुख कारण है। उनका कहना है कि राज्य भर के समस्त सरस्वती शिशु विद्या मंदिरों में वैदिक गणित की शिक्षा दी जाती है ताकि ये बच्चे भारत के प्राचीन ज्ञान को आत्मसात कर सकें।
इसके साथ साथ प्रत्येक साल श्रीभारती कृष्ण गणित प्रतिभा परीक्षा का आयोजन किया जाता है । तीसरी, पांचवी, सातवीं व नौवीं कक्षा के बच्चों में यह परीक्षा की जाती है । 10:1 के अनुपात में बच्चे इस परीक्षा में बैठते हैं । इन परीक्षाओं में सफलता हासिल करने वाले छात्र छात्राओं को प्रोत्साहन हेतु छात्र वृत्ति भी प्रदान की जाती है । शिक्षा विकास समिति ओडिशा द्वारा दसवीं बोर्ड के परीक्षा से पूर्व अर्धवार्षिक परीक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले पूरे प्रदेश के छात्र छात्राओं के लिए मेधावी मार्गदर्शन के नाम पर एक तीन दिवसीय शिबिर का आयोजन किया जाता है । यह आवासीय शिबिर होता है तथा पूरे प्रदेश के सभी 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले बच्चे इसमें शामिल होते हैं। इस तीन दिवसीय मेधावी मार्गदर्शन शिबिर में राज्य के विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को बुलाया जाता है और वे छात्र छात्राओं का मार्गदर्शन करते हैं । इस दौरान बच्चे अपने संदेह को दूर करते हैं तथा परीक्षा में किस तरह से लिखना है, इसके बारे में विशेषज्ञ उन्हें बताते हैं। कुल मिला कर मेधावी छात्र छात्राओं के लिए एक सुनहरा अवसर होता है। समिति के अध्यक्ष डॉ किशोर महांति का कहना है कि केवल परीक्षा में अंक अधिक लाना हमारा मूल उद्देश्य नहीं है । यह अध्ययन करने वाले बच्चों को श्रेष्ठ पढाई के साथ साथ नैतिक शिक्षा के साथ साथ भारतीय मूल्यों से ओतोप्रोत एक संवेदनशील व चरित्रवान नागरिक के रुप में विकसित करना विद्या भारती – शिक्षा विकास समिति का लक्ष्य है । यह प्रसन्नता की बात है कि इस उद्देश्य की प्राप्ति में लगातार सफलता मिल रही है।











