Tarun Vijay Speech Gorakhpur Narad Jayanti । गोरखपुर : ‘विश्व संवाद केन्द्र, गोरखपुर’ के तत्वाधान में ‘आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जयन्ती’ के अवसर पर योगीराज बाबा गम्भीर नाथ प्रेक्षागृह में “वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य और भारतीय पत्रकारिता” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी में मंच पर मुख्य वक्ता पत्रकार व स्तंभकार ‘पाञ्चजन्य’ के पूर्व सम्पादक तरुण विजय जी, कार्यक्रम अध्यक्ष ‘गीता प्रेस गोरखपुर’ के मुख्य न्यासी देवी दयाल अग्रवाल जी, गोरक्ष प्रांत संघचालक महेंद्र अग्रवाल जी, विश्व संवाद केन्द्र गोरखपुर के अध्यक्ष प्रो ईश्वर शरण विश्वकर्मा उपस्थित रहे। संचालन चन्द्रमणि ओझा, आभार ज्ञापन डॉ. दिनेश मणि त्रिपाठी ने किया।
मुख्य वक्ता तरुण विजय जी ने कहा कि यह क्षेत्र गोरखनाथ जी की पुण्य धरा है, गोरक्षा से अनुप्राणित गोरखाओं की धरती है, गीता प्रेस की धरती है। ऐसी पुण्य धरा पर आकर रोमांचित हूँ। कलम के कलुष का प्रतिनिधित्व करने वाले पाश्चात्य समूह से युद्ध का समय है। यह वह समर है, जिसमें समस्त विश्व के अब्राह्मिक समाज को तोड़ने में जुटे हुए हैं।
स्मृति-भ्रंश बनाम स्मृति-जागरण: भारतीयता को बचाने का एकमात्र रास्ता
भारत का भारतत्व भारत की स्मृति से जुड़ा हुआ है। जो वीरधर्मा पत्रकार है, वह न तो झुकेगा, न टूटेगा, यह भारतीय पत्रकारिता का गुण है। शब्द की शक्ति ही भारत की वैचारिक छवि को विजय दिला सकती है। आक्रामकों ने हिन्दुओं में स्मृति-भ्रंश का लाभ उठाया। आज आवश्यकता है ‘स्मृति-जागरण’ की। वैचारिक कलुष से मुक्त होने का हथियार है कलम। जिन क्षेत्रों का सम्यक प्रतिनिधित्व नहीं होता है, उसे समाज के सामने लाने की जरूरत है। अपने कश्मीर के बारे में बताया जाए कि श्रीनगर नहीं, परिहासपुरा थी राजधानी। यह पत्रकार का काम है। पुरुषपुर, जिसे आज पेशावर कहते हैं, बौद्ध धर्म का एक महत्वपूर्ण केन्द्र था। ये कौन बताएगा कि भारत का निकोबार होर्मुज स्ट्रेट से भी महत्वपूर्ण है।
तरुण विजय का आह्वान: ‘कलम के कलुष’ के खिलाफ युद्ध का समय
उन्होंने कहा कि कलम का कलुष मिटाने वाले को पत्रकार कहते हैं। जो डरे नहीं, झुके नहीं, वह पत्रकार है। ‘आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वत:’। दुःख होता है यह देखकर कि कई समाचार पत्र ऐसे हैं जो स्वयं को ‘राष्ट्रीय’ लिखते हैं, लेकिन उनकी पत्रकारिता नोएडा से शुरू होकर दिल्ली तक समाप्त हो जाती है। हमारी दृष्टि समग्र होनी चाहिए। अगर आप स्मृति नहीं जगाएँगे कि सवा लाख वर्ग किलोमीटर भूमि हमें वापस लेना है, तो हमारे बच्चों को कैसे पता चलेगा? भारत का तत्व सुरक्षित रखना भारत की कलम का पहला कर्तव्य होना चाहिए। यह भारत के ‘वैचारिक स्वातंत्र्य’ के समर का काल है। और ऐसे समय में हमें नारद जी की स्मृति व अनुकरण प्रासंगिक है।
देवर्षि नारद सम्मान: गोरखपुर के इन दिग्गज पत्रकारों का हुआ अभिनंदन
इस अवसर पर पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकार डॉ. राकेश राय (दैनिक जागरण), अभिमन्यु चौधरी (हिन्दुस्तान), डॉ. केशव कुमार श्रीवास्तव (स्वतंत्र चेतना), मृत्युंजय शंकर सिन्हा (स्वतंत्र पत्रकार), प्रेम नाथ पराया (दैनिक जागरण), राजीव पाण्डेय (DDNews), प्रदीप कुमार तिवारी (NewsTV9 भारतवर्ष), अहमद अली (News18), अजीत सिंह (News24), गुणानन्द ध्यानी (RbhartNews रिपब्लिक भारत), गणेश पाण्डेय (दैनिक भास्कर), पवन (ANI News), अरुण कुमार राय (Jansamvad kranti जनसंवाद क्रांति गोरखपुर), मनीष तिवारी (दूरदर्शन), अभिषेक श्रीवास्तव (CT1News), गजेन्द्र त्रिपाठी (Aajtak आज तक), अंकित जी (gorakhpurNews), मनीष द्विवेदी (आकाशवाणी), आर. जे. सोनी पाठक (FM तड़का), निवेदिता (नव्या जागरण साप्ताहिक पत्रिका), ओंकार द्विवेदी आदि पत्रकारों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

















