गीत संगीत, जीवंत संस्कृति वाले पंजाब की खूबसूरत विरासत धमाकों के घटनाक्रमों से दरक रही है। प्रतीत होता है कि रंगले पंजाब की हवा में एक बार फिर बारूद की गंध घोलने की साजिश रची जा रही है। इस पर संतोष कर सकते हैं कि अभी तक किसी भी घटनाक्रम में बड़े जानमाल की क्षति नहीं हुई, पर भय का वातावरण अवश्य व्याप्त हुआ है।
19 महीने में 24 विस्फोट की घटनाएं
गुरुओं की भूमि को पहले भी इसी तरह की साजिश के बूते दहलाने का काम हुआ था और बड़े प्रयासों के बाद उस पर अंकुश लगा था। एकबार फिर उसी तरह की छटपटाहट दिख रही है। नतीजा सामने है कि ताजा घटनाक्रम मुख्यमंत्री भगवंत मान के जालंधर दौरे से चंद घंटे पहले हुआ। धमाका 5 मई 2026 को बीएसएफ मुख्यालय के बाहर एक जोरदार विस्फोट हुआ। पंजाब में इस घटना सहित करीब 19 माह के बीच 24 घटनाक्रम सामने आ चुके हैं। अमृतसर-जालंधर में कल रात दो जोरदार धमाके हुए हैं।
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गुरुदासपुर में BJP नेता के शोरूम के बाहर भी फेंका था ग्रेनेड
इनमें ग्रेनेड फैंकने और धमाके सुर्खियों रहे हैं। पंजाब की आबोहवा में बारुद की घुलने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ी है। जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय के बाहर स्कूटी में धमाके की आवाज करीब एक किलोमीटर दूर तक सुनी गई। धमाके से पहले दुपहर को ही आतंकी वारदात का अलर्ट आ चुका था। इससे पहले राजपुरा शंभू रेल खंड पर ट्रैक उड़ाने की कोशिश और एक की मौत हो चुकी है। गुरदासपुर में भाजपा नेता के शोरूम के बाहर ग्रेनेड फेंकने की घटना ने भी सुरक्षा तंत्र को अलर्ट पर ला दिया था।
पंजाब में हिंदूवादी संगठनों को भी बनाया गया निशाना
सितंबर 2024 से अप्रैल 2026 तक पंजाब और चंडीगढ़ में ग्रेनेड और विस्फोटकों से जुड़ी करीब 22 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें पुलिस चौकियां, थाने, चेक पोस्ट, हिंदूवादी संगठनों के प्रतिनिधि, राजनीतिक नेता, धार्मिक स्थल और निजी मकान तक निशाने पर रहे। यही वजह है कि अब इन घटनाओं को अलग अलग घटनाएं नहीं, बल्कि एक सुनियोजित तौर पर देखा जा रहा है। सबसे पहले सुरक्षा ठिकानों को निशाना बनाया गया। दिसंबर 2024 में अमृतसर, गुरदासपुर, बटाला और मजीठा में लगातार पुलिस चौकियों और थानों पर ग्रेनेड हमले हुए। कहीं ग्रेनेड फटा, तो कहीं पिन नहीं निकलने या तकनीकी वजह से बड़ा नुकसान टल गया। इसके बाद 2025 में हमलों का दायरा बदल गया। अमृतसर में मंदिर को निशाना बनाया गया। जालंधर में भाजपा नेता के घर और एक यूट्यूबर के मकान पर हमला हुआ। इससे साफ संकेत मिला कि हमलावर सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों को चुनौती नहीं दे रहे, बल्कि समाज में डर और अस्थिरता का माहौल बनाना चाहते हैं।
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विदेश में बैठा खलिस्तानी नेटवर्क स्थानीय युवाओं को रहा है बहला
2025 के आखिर और 2026 में घटनाओं का दूसरा पहलू सामने आया। कई जगहों पर ग्रेनेड और विस्फोटक बरामद हुए। अमृतसर और फिरोजपुर में संयुक्त अभियानों के दौरान पाकिस्तान निर्मित ग्रेनेड मिलने की बात सामने आई। जनवरी 2026 में एजेंसियों की छापेमारी में विस्फोटक सामग्री मिली। इसके बाद 27 अप्रैल 2026 को राजपुरा शंभू रेल खंड पर धमाके ने खतरे को और गंभीर बना दिया। जांच में सामने आया कि रेल ट्रैक को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई थी। इस मामले में तरनतारन निवासी जगरूप सिंह की मौत हुई और चार संदिग्ध गिरफ्तार किए गए। शुरुआती जांच में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और विदेश में बैठे खालिस्तानी नेटवर्क से कनेक्शन की आशंका जताई गई।
इन घटनाओं का सबसे गंभीर पहलू यह है कि हमलों का तरीका छोटा जरूर है, लेकिन निशाने बेहद संवेदनशील चुने हैं। सुरक्षा एजेंसियां मान रही हैं कि छोटे हमलों के जरिये सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियां परखी जा रही हैं। यह भी संभावना है कि स्थानीय युवाओं का इस्तेमाल कर मॉड्यूल तैयार किए जा रहे हों और इनके असली हैंडलर सीमा पार या विदेश में बैठे हों। पंजाब पहले भी आतंकवाद और अलगाववाद का दौर देख चुका है। अस्सी और नब्बे के दशक की हिंसा के बाद लंबे समय में हालात सामान्य हुए थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में विदेशों से अलगाववादी बयानबाजी, सोशल मीडिया प्रचार, ड्रोन के जरिये हथियार सप्लाई और छोटे मॉड्यूल की सक्रियता लगातार सामने आती रही है। मौजूदा घटनाएं उसी कड़ी का नया रूप मानी जा रही हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ये घटनाएं सिर्फ चेतावनी हैं या किसी बड़े खतरे की घंटी। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां लगातार छापेमारी और निगरानी कर रही हैं। कई संदिग्ध पकड़े गए हैं, लेकिन असली चुनौती पूरे नेटवर्क और उसके मास्टरमाइंड तक पहुंचने की है। इन घटनाओं को अगर हल्के में लिया गया, तो पंजाब के अमन चैन के लिए ठीक नहीं होगा।
(राजेश शांडिल्य/ संपादक विश्व संवाद केंद्र)















