ममता बनर्जी को अब लोकतंत्र की याद आ रही है। पिछले 12 सालों से ममता बनर्जी ने जिस तरह से पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की हत्या की और गुंडाराज कायम करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, अब सत्ता से बाहर होने के बाद वो लोकतंत्र की दुहाई दे रही हैं। ममता बनर्जी बंगाल में TMC की करारी शिकस्त से बौखला उठी हैं और आरोप लगा रही हैं कि BJP ने वोटों को लूटा है और लोकतंत्र की हत्या की है।
जबकि पश्चिम बंगाल का पूरा चुनाव ही ममता बनर्जी और टीमएसी (TMC) की गुंडागर्दी व हिंसा को दूर कर लोकतंत्र की बहाली का चुनाव था। BJP ने विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ा और बंगाल की जनता ने ममता की गुंडागर्दी, हिंसा, लचर कानून व्यवस्था और मुस्लिम तुष्टिकरण के खिलाफ वोट डाला जिसके परिणामस्वरूप सूबे में पहली बार कमला खिला। अब ममता बनर्जी जब सत्ता से बाहर हो गई, भवानीपुर में खुद की सीट भी नहीं बचा पाई तो उन्हें लोकतंत्र की याद आ रही है।
ममता इतनी बौखलाई क्यों हैं?
पश्चिम बंगाल में TMC की जमीन खिसकते ही ममता बनर्जी की बौखलाहट भी बढ़ गई है। ममता दहाड़ते हुए नहीं बल्कि बौखलाते हुए कह रही हैं कि हम चुनाव हारे नहीं हैं बल्कि भाजपा ने चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर जनादेश का अपहरण किया है। अब बताइए इससे पहले तक जब ममता बनर्जी जीतती थीं तब उनके ये आरोप कहां गए थे? यह बात सच है कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में हिंसा, डर और वोटरों को धमकाकर जीत का तमगा पहनती थीं। लेकिन इस बार पश्चिम बंगाल के मतदाताओं ने डर से डरकर नहीं बल्कि डटकर वोट दिया है।

ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में करती आई हैं ‘वोट की डकैती’
ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में अभी तक वोटों की डकैती करती आई थीं। लेकिन इस बार उनकी यह डकैती नहीं चली। अब वो उल्टा बीजेपी पर वोटों की डकैती का आरोप लगा रही हैं। यह उनकी बौखलाहट ही है। जब इंसान की जमीन खिसकती है तो बौखलाहट बढ़ जाती है। ममता बनर्जी ऐसे ही पेश आ रही हैं। यह बात सच है कि ममता बनर्जी के 12 सालों के शासन काल में पश्चिम बंगाल ने एक काला अध्याय देखा जो अब श्वेत होने की ओर बढ़ रहा है। हिंसा, भय और भ्रष्टाचार के बादल छटने की ओर हैं।
चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी कर रही हैं अनगल बयानबाजी
चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी अनगल बयानबाजी कर रही हैं। वह पश्चिम बंगाल में अपनी हार को भाजपा और चुनाव आयोग के बीच मैच फिक्सिंग बता रही हैं। अब ममता बनर्जी कह रही हैं कि उनकी लड़ाई बीजेपी से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से थी। यह बयान देकर ममता बनर्जी क्या साबित करना चाहती हैं? क्या वह चुनाव आयोग पर संदेह जताकर और आरोप लगाकर लोकतंत्र की हत्या नहीं कर रहीं?

















