BJP Victory in West Bengal Analysis : भाजपा की पश्चिम बंगाल की जीत कई मायनों में काफी अलग है। भाजपा ने जिस तरह से पश्चिम बंगाल में सत्ता प्राप्त की है, उसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि भाजपा राज्य में लंबे समय के लिए सत्ता में आई है।
पश्चिम बंगाल में जो पार्टी एक बार सत्ता में आती है, वह लंबे समय तक सरकार में रहती है और एक बार सत्ता से बाहर होने पर फिर वह वापसी नहीं कर पाती है। क्या कांग्रेस और वाम दलों वाली राजनीतिक घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस पार्टी के साथ होने जा रहा है?
पश्चिम बंगाल का राजनीतिक इतिहास: सत्ता से बाहर मतलब राजनीति से बाहर?
क्या भाजपा 1977 से 2011 के वाम दलों के लंबे समय के सरकार के रिकॉर्ड को भी तोड़ सकती है? भाजपा एक बार अधिकतर राज्यों में सत्ता में आने के बाद लंबे समय तक सत्ता में रहती है। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव की तरह का ही प्रदर्शन पार्टी ने कई प्रदेशों में किया है। इनमें त्रिपुरा, हरियाणा, दिल्ली, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और ओडिशा प्रमुख हैं।
प्रदेश | प्रथम चुनाव | अगला चुनाव |
|---|---|---|
| त्रिपुरा | 0 | 36 |
| असम | 5 | 60 |
| हरियाणा | 4 | 47 |
| मणिपुर | 0 | 21 |
| ओडिशा | 23 | 78 |
| अरुणाचल प्रदेश | 11 | 41 |
इन सभी प्रदेशों के बारे में कहा जा सकता है कि पार्टी ने विधानसभा में प्रवेश के साथ ही मजबूती से सरकार बनाने में सफलता प्राप्त की। उसी प्रकार की जीत भाजपा ने पश्चिम बंगाल में दर्ज की है।
पश्चिम बंगाल में कोई भी दल एक बार सत्ता से बाहर हो जाता है तो फिर वह सत्ता में वापसी नहीं कर पाता है, बल्कि वह पार्टी कमजोर होकर समाप्ति के कगार पर चली जाती है। कांग्रेस पार्टी ने लगभग बेरोकटोक 1977 तक राज्य में सरकार चलाई। मगर 1977 में वाम दलों के सत्ता में आने के बाद कांग्रेस पार्टी मजबूत विपक्ष भी नहीं बन सकी।
चुनाव | सीटें लड़ी | जीत | वोट | वोट % |
|---|---|---|---|---|
| 1982 | 52 | 0 | 129,994 | 0.58 |
| 1987 | 57 | 0 | 134,867 | 0.51 |
| 1991 | 291 | 0 | 3,513,121 | 11.34 |
| 1996 | 292 | 0 | 2,372,480 | 6.45 |
| 2001 | 266 | 0 | 1,901,351 | 5.19 |
| 2006 | 29 | 0 | 760,236 | 1.93 |
| 2011 | 289 | 0 | 1,934,650 | 4.06 |
| 2016 | 291 | 3 | 5,555,134 | 10.16 |
| 2021 | 293 | 77 | 22,905,474 | 37.97 |
| 2026 | 294 | 206 | 29224167 | 45.84 |
ममता बनर्जी की हार: क्या भवानीपुर से शुरू हुआ तृणमूल का पतन?
कांग्रेस पार्टी से टूटकर ममता बनर्जी ने 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की। 2011 में वाम दलों को सत्ता से बाहर करके ममता बनर्जी ने सरकार में वापसी की और उसके बाद वाम दल इस मजबूत और महत्वपूर्ण राज्य से लगभग समाप्त हो गए हैं।
2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य चुनाव हार गए थे और उसके बाद वाम दलों के समाप्ति की शुरुआत हुई। ठीक उसी तरह से ममता बनर्जी 2026 में अपना भी चुनाव भवानीपुर विधानसभा सीट से चुनाव हार गई हैं।
जानकारों के मुताबिक वाम दलों की तरह ही तृणमूल कांग्रेस पार्टी भी अब हाशिये पर चली जाएगी। यह बड़ा संशय है कि क्या तृणमूल कांग्रेस पार्टी भाजपा को मजबूत विपक्ष के तौर पर चुनौती दे सकेगी। कांग्रेस पार्टी और वाम दल अब केवल नाम मात्र की ही पार्टी बनकर राज्य में रह गई हैं।
गुजरात से असम तक: भाजपा का ‘लगातार सत्ता’ वाला मॉडल
भाजपा की बड़ी उपलब्धि है कि एक बार जहाँ पार्टी सत्ता में आती है, लंबे समय तक पार्टी सरकार में रहती है। असम में पार्टी ने 2016 में सत्ता प्राप्त की और 2026 में लगातार तीसरी बार बड़े बहुमत के साथ पार्टी ने सत्ता में वापसी की है। त्रिपुरा में पार्टी ने 2023 में सत्ता प्राप्त की और 2023 में लगातार दूसरी बार सत्ता में है। अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता में है।
भाजपा का सबसे लंबे समय काल से पश्चिमी राज्य गुजरात में सत्ता में है। इस राज्य में पार्टी 1995 से सरकार बना रही है। प्रथम कार्यकाल में ही कांग्रेस पार्टी ने भाजपा में विद्रोह करवाकर कुछ समय के लिए भाजपा को सत्ता से बाहर करवाने में सफलता प्राप्त की थी।
मगर 1998 के चुनाव में गुजरात की जनता ने कांग्रेस और वाघेला की पार्टी राष्ट्रीय जनता पार्टी को चुनाव में धूल चटा कर फिर से पार्टी को सत्ता में वापसी करवाई थी। 2003 के बाद मध्यप्रदेश में पार्टी सत्ता में है। 2018 में कुछ समय के लिए पार्टी सत्ता से अलग हुई थी, मगर फिर से पार्टी ने सत्ता में वापसी कर ली।
छत्तीसगढ़ के गठन के समय से केवल एक बार ही भाजपा सत्ता से बाहर हुई है।
केसरिया कॉरिडोर: यूपी, बिहार और अब बंगाल में भाजपा का वर्चस्व
भाजपा हरियाणा में पहली बार 2014 में आई थी। 2024 में लगातार तीसरी बार बड़े बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है। उत्तराखंड में 2022 में भाजपा लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की है, जबकि राज्य के गठन के समय से ही चुनाव दर चुनाव वहां की सरकार बदलती रहती थी।
देश के राजनीतिक सीटों के लिहाज से सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 2022 में लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की है, तब जबकि 1991 के बाद कोई भी सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद सत्ता में वापसी नहीं कर पाई है।

















