बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के बुरी तरह हारने के बाद ममता बनर्जी बौखला गई हैं। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने चुनाव आयोग पर कई आरोप भी लगाए।
ममता बनर्जी ने कहा कि वह न तो लोकभवन जाएंगी और न ही इस्तीफा देंगी। चुनाव आयोग को खलनायक बता दिया।
ममता बनर्जी के आरोप
एएनआई के मुताबिक ममता बनर्जी ने आरोप लगाते हुए कहा कि दुख की बात है कि चुनाव आयोग इस चुनाव में लोगों के संवैधानिक अधिकारों को लूटने और ईवीएम को लूटने वाला खलनायक बन गया। क्या आप बता सकते हैं कि वोटिंग के बाद ईवीएम में 80-90% चार्ज है, जो 40 से नीचे होता है? यह कैसे हो सकता है? चुनाव से दो दिन पहले, उन्होंने हमारे लोगों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया। हर जगह छापेमारी करना शुरू कर दिया। सभी IPS और IAS अधिकारियों को बदल दिया। उन्होंने अपनी पार्टी से लोगों को चुना और भाजपा ने सीधे चुनाव आयोग के साथ मिलकर खेल खेला। उन्होंने एसआईआर में 90 लाख नाम हटा दिए। जब हम कोर्ट गए, तो 32 लाख नाम शामिल किए गए। अपनी ज़िंदगी में इस तरह का चुनाव कभी नहीं देखा।
हार गईं तो कहा कि इंडी गठबंधन है साथ
ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने मतदान केंद्र में मुझे जाने नहीं दिया, केंद्रीय बलों और चुनाव अधिकारियों के माध्यम से हमारे कार्यकर्ताओं को टॉर्चर किया। धक्का मारते मारते मुझे बाहर निकाला गया, हमारे एजेंट को मारा गया। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, हेमंत सोरेन ने मुझे फ़ोन किया। इंडी गठबंधन के सभी साथियों ने मुझसे कहा कि वे पूरी तरह से मेरे साथ हैं। उल्लेखनीय है कि बंगाल चुनाव में ममता ने इंडी गठबंधन से अलग चुनाव लड़ा।
भाजपा नेता का बयान
भाजपा नेता सुभाष सरकार ने पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों पर कहा, “उन्हें याद करना चाहिए कि 2011 में कितनी हिंसा हुई। अभी तो मतगणना के 24 घंटे होने जा रहे हैं लेकिन तृणमूल के कितने लोग घायल हुए? भाजपा अलग पार्टी है, ‘पार्टी विद द डिफरेंस’।
भाजपा नेता अजय आलोक ने कहा, “देश की अखंडता और संप्रभुता के लिए बंगाल से तृणमूल कांग्रेस का निकलना बहुत ज्यादा जरूरी था और बंगाल की जनता ने एक ही निर्णय दिया है, ‘गेट लॉस्ट TMC’…।”
अगर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देंगी तो क्या होगा
ममता बनर्जी अगर इस्तीफा नहीं देंगी तो राज्यापाल के पास यह संवैधानिक अधिकार है कि वह उन्हें बर्खास्त करें। संविधान के अनुच्छेद 164 के जरिये राज्यपाल को यह शक्ति दी गई है। इसके तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और बर्खास्त करने का भी अधिकार है।

















