पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद भी टीएमसी के कार्यकर्ता हिंसा से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला दक्षिण 24 परगना जिले के फलता इलाके का है, जहां हाशिमनगर गांव के लोगों ने आरोप लगाया है कि भाजपा को वोट देने की वजह से तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता उन्हें धमका रहे हैं। शनिवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-17 को जाम करके सुरक्षा की मांग की।
गांव में क्या हो रहा है
हाशिमनगर के लोग बताते हैं कि मतगणना के बाद से तनाव बढ़ गया। बड़ी संख्या में महिलाएं भाजपा के झंडे लेकर सड़क पर आईं। उनका आरोप है कि स्थानीय पंचायत प्रधान और तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान के करीबी इसराफिल चोकदार और उसके साथी घर-घर जाकर धमकी दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें जान से मारने और घर जलाने की धमकियां मिल रही हैं। एक प्रदर्शनकारी महिला फातिमा बीबी, जो भाजपा महिला मोर्चा से जुड़ी हैं, ने बताया कि 30 अप्रैल से यह सिलसिला चल रहा है। उन्होंने कहा, “इसराफिल और उसके लोग आकर कह रहे हैं कि चार मई के बाद खून-खराबा होगा।”
पुलिस की कार्रवाई
चुनाव आयोग के निर्देश पर पुलिस ने इस मामले में एक्शन लिया। इसराफिल चोकदार और टीएमसी कार्यकर्ता सलाउद्दीन शेख के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही तीन टीएमसी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी किया गया। स्थिति को देखते हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान मौके पर पहुंचे। सीआरपीएफ के उप-कमांडेंट ने ग्रामीणों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया। लोगों ने सीआरपीएफ को वहां लगातार तैनात रखने की मांग की है।
मतदान के दौरान के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दिन भी कुछ गड़बड़ हुई। कई लोगों को मतदान करने से रोका गया। जब उन्होंने विरोध किया तो उनके घरों में घुसकर मारपीट की गई और उन्हें इलाका छोड़ने की धमकी दी गई। प्रदर्शनकारियों ने राज्य पुलिस पर भी सवाल उठाए। कुछ का कहना है कि उन पर बल प्रयोग हुआ, लेकिन पुलिस ने लाठीचार्ज के आरोपों से इनकार किया है।
चुनाव आयोग का रुख
निर्वाचन आयोग ने इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने साफ चेतावनी दी है कि अगर आरोपियों के खिलाफ सही कार्रवाई नहीं हुई तो थाने और पुलिस अधिकारियों पर भी एक्शन लिया जाएगा।











