केरल की राजनीति में भाजपा ने द्विध्रुवीयता की राजनीति को तोड़कर नए राजनीति की शुरुआत की। भाजपा ने केरल विधानसभा चुनाव में 11.42% मतों के साथ तीन विधानसभा की सीट पर जीत दर्ज़ की है। विदित हो कि भाजपा ने 2016 में पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव में तीन सीट ही जीती थी। भाजपा लम्बे समय से केरल में कांग्रेस पार्टी नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और माकपा नीत लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट तक आपसी प्रतिस्पर्धा का शिकार बनती रही और भाजपा के मतदाता आखिरी समय में इन दोनों दलों के अनुसार ही मतदान करते रहे हैं।
भाजपा ने अपने लिए बनाया अलग मुकाम
मगर 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद अब भाजपा ने केरलम के इस द्विपक्षीय राजनीति को पीछा छोड़ते हुए अपने लिए मुकाम बनाया है। 2024 के लोकसभा के चुनाव में भाजपा थ्रिस्सूर लोकसभा की सीट जीतने के साथ ही तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट पर दूसरे पायदान पर रही थी। 2024 के लोकसभा के चुनाव में भाजपा 11 विधानसभा सीटों पर प्रथम पायदान पर और 9 सीटों पर दूसरे पायदान पर रहकर कुल 20 सीटों पर सीधे मुकाबले में रही थी। इसके बाद स्थानीय निकाय के चुनाव में भाजपा ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के चुनाव में 45 वर्षों के वाम दलों के कब्जे से मुक्त करके अपनी सरकार बनाई थी। वर्तमान चुनाव में एलडीएफ के हार का एक बड़ा कारण तिरुवनंतपुरमनगर निगम में उसकी हार भी है क्योंकि इस परिणाम ने पूरे राज्य में वाम दलों के कमजोर होने को इंगित किया था।
भाजपा इससे पूर्व 2016 में नेमोम सीट जीतकर राज्य में पहली बार अपना खाता खोला था। 2016 में इस सीट से ओलंचेरी राजगोपाल चुनाव जीतकर पहले भाजपा विधायक बने थे। इस बार भाजपा ने तीन विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज़ करने के साथ ही कई सीटों पर दूसरे पायदान पर रहकर दोनों गठबंधनों को अपनी ताकत का एहसास करवाया है।
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केरलम विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन

अब एनडीए का मुकाबला होगा यूडीएफ से
केरलम में अब आने वाले चुनावों में भाजपा नीत एनडीए का मुकाबला सीधे सत्तारूढ़ यूडीएफ गठबंधन से होगा। जनता ने एलडीएफ को उसके दस वर्षों के कुशासन के कारण पूर्णतः नकार दिया है। वाम दलों के समर्थकों ने भी इस बार अपने गठबंधन के लिए मतदान करने के लिए अधिक दिलचस्पी नहीं दिखाया, क्योंकि मुख्यमंत्री पी विजयन ने अपने दामाद मोहम्मद रियास को ही पूरे कार्यकाल में आगे बढ़ाने में लगे रहे। प्रथम बार के विधायक को महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी देकर उन्होंने अपने पार्टी के पुराने नेताओं को नज़रअंदाज किया। अतएव अब वाम दलों से जनता ने भी किनारा कर लिया है। अब भाजपा वाम दलों के बदले मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में आ गई है।
पी विजयन होंगे माकपा के आखिरी सीएम
बुद्धदेब भट्टाचार्य और माणिक सरकार जिस प्रकार पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में माकपा के आखिरी मुख्यमंत्री थे उसी प्रकार अब पी विजयन भी केरलम में माकपा के आखिरी मुख्यमंत्री साबित होंगे। वर्तमान चुनाव में यह यूडीएफ की जीत से अधिक एलडीएफ की हार है। मुख्य विरोधी होने का लाभ यूडीएफ को मिला है और वो दस सालों के एलडीएफ के सत्ता विरोधी लहर के कारण सरकार में आने में कामयाब हुई है।
केरलम में भविष्य के चुनावों में भाजपा नीत एनडीए की लड़ाई सीधे कांग्रेस पार्टी नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट से होगा और भाजपा पूरे देश में जिस आसानी से कांग्रेस पार्टी को मात देती है वैसे ही अब वो केरलम में कांग्रेस पार्टी नीत यूडीएफ को देगी। भाजपा अब आसानी से अन्य राज्यों गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों की तरह ही केरलम में भी कांग्रेस को मात दे सकेगी।

















