बंगाल में BJP के जीत के 5 बड़े कारण, युवा मतदाताओं ने MODI पर जताया भरोसा; TMC के गुंडाराज-भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ा
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बंगाल में BJP के जीत के 5 बड़े कारण, युवा मतदाताओं ने MODI पर जताया भरोसा; TMC के गुंडाराज-भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ा

पश्चिम बंगाल में 15 साल बाद सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC की विदाई होने जा रही है। सूबे में BJP प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है।

Written byLalit FularaLalit Fulara
May 4, 2026, 07:03 pm IST
in विश्लेषण

नई दिल्ली: पूरे देश की नजरें पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों पर टिकी हुई थी। गली-मोहल्लों से लेकर मेट्रो तक में बस एक ही बात हो रही थी कि इस बार पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है। इससे यह तो साफ था कि पूरे देश की जनभावनाएं यही थी कि पश्चिम बंगाल में इस बार ‘कमल’ खिलना चाहिए। जिस तरह से सूबे में BJP ने धुआंधार प्रचार किया था और ममता बनर्जी के भ्रष्टाचार और गुंडाराज को मुख्य फोकस करते हुए जनता से TMC को उखाड़ फेंकने का आवाह्न किया था, उससे साफ ही संकेत मिल रहे थे कि बंगाल में बड़ा सत्ता परिवर्तन होगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की लगातार रैलियां और BJP के चाणक्य कहे जाने वाले गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah ) का चुनावों में बंगाल में काफी लंबा समय गुजारा- ये सभी बातें इस तरफ इशारा कर रही थी कि पश्चिम बंगाल BJP के लिए अहम है और वहां जरूर सत्ता परिवर्तन होगा।

लेकिन जैसे ही सोमवार सुबह 8 बजे से ही मतगणना शुरू हुई और धीरे-धीरे रुझान आने लगे और लगभग सभी सीटों पर बीजेपी प्रत्याशी बढ़त बनाते हुए दिखे उससे साफ हो गया कि सूबे में कमल खिलने जा रहा है। शाम चार बजे तक के रुझानों और धीरे-धीरे रुझानों के नतीजों में तब्दील होने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि पश्चिम बंगाल में 15 साल बाद सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है।  चुनाव आयोग के मुताबिक सूबे में बीजेपी 205 सीटों के रुझानों में आगे है और 40 सीटें जीत ली है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC की विदाई लगभग तय हो गई है। बंगाल में BJP की वापसी के कई महत्वपूर्ण कारण हैं लेकिन 5 अहम कारणों पर एक नजर डालते हैं।

#1.TMC के गुंडाराज को मुद्दा बनाना
ममता बनर्जी 2011 में लेफ्ट को सत्ता से बेदखल कर बंगाल की मुख्यमंत्री बनी थीं। वह लगातार तीन बार मुख्यमंत्री बनीं। लेकिन उनके 15 साल के कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार, हिंसा और गुंडाराज काफी बढ़ा। बीजेपी ने इस चुनाव में TMC के इसी गुंडाराज को मुद्दा बनाया। इसके साथ ही ममता बनर्जी के भ्रष्टाचार को भी जोर-शोर से प्रचारित किया। जनता भी TMC की गुंडई से तंग आ गई थी। इसलिए जनता ने ममता के भ्रष्टाचार और गुंडाराज के खिलाफ बीजेपी को बंपर वोट गिए।

#2. SIR का विरोध करना ममता बनर्जी को पड़ा भारी
बंगाल में एसआईआर (SIR) का ममता बनर्जी ने काफी विरोध किया था। ममता बनर्जी इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपनी दलीलें देने पहुंचीं। SIR के दौरान 90 लाख के अधिक लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। ये सारे लोग या तो मर चुके थे या फिर वोटर थे ही नहीं। SIR में कटे नामों का भी चुनाव में असर दिखा। इससे पहले तक आरोप लगता आया है कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में वोटों का फर्जीवाड़ा कर जीतती आई हैं। सूबे में बांग्लादेशी लोगों के नाट भी वोटर लिस्ट से कटे जिसका फायदा बीजेपी को हुआ।

#3. कानून-व्यवस्था और हिंसा को BJP ने बनाया मुद्दा
पश्चिम बंगाल चुनावों में BJP ने हिंसा और कानून व्यवस्था का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। संदेशखाली जैसी घटनाओं को BJP ने बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठाया। जिसका असर महिला वोटरों और शहरी मध्यम वर्ग पर पड़ा। कोलकाता के आरजी कर में महिला डॉक्टर का दुष्कर्म और हत्या के मामले को भी BJP ने हिंसा और कानून व्यवस्था से जोड़कर जोर-शोर से उठाया। BJP ने पीड़िता की मां को चुनावी मैदान में उतारा और स्वयं पीएम मोदी ने उन्हें दिलासा दी। वो मंच पर पीएम मोदी के साथ नजर आईं।

#4. युवा फैक्टर सबसे अहम- पीएम मोदी और बीजेपी पर जताया भरोसा
बंगाल विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा और निर्णायक फैक्टर युवा मतदाताओं का रहा। राज्य में कुल मतदाता 6.44 करोड़ हैं। इनमें 1.4 से 1.7 करोड़ युवा हैं। 18 से 19 वर्ष के 5.2 लाख से अधिक युवा पहली बार वोट डाल रहे थे। ऐसे में BJP के बेरोजगारी, भर्ती घोटाले और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों ने युवाओं को अपनी ओर आकर्षित किया और युवाओं ने बदलाव और भ्रष्टाचार बंगाल के लिए वोट डाला।

#5. BJP की चुनाव रणनीति और PM मोदी की रैलियां
BJP ने इस बार बंगाल के चुनाव प्रचार की कमान स्थानीय नेताओं को सौंपी। BJP ने रणनीति बदली। गृह मंत्री अमित शाह ने इस बार चुनावों में बंगाल में काफी लंबा समय गुजारा। वह आखिरी समय में बंगाल में करीब 15 दिनों तक रहे और उन्होंने दो दर्जन से अधिक चुनावी रैलियां की। पीएम मोदी ने भी बंगाल में लगातार रैलियां की और युवा मतदाताओं को लुभाया। जिसका असर यह हुआ कि महिला और युवा मतदाताओं ने इस बार बीजेपी के पक्ष में वोट किया।

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Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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