ईरान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। एक तरफ इजरायल और अमेरिका के साथ सैन्य तनाव ने देश की सुरक्षा को खतरे में डाला है। वहीं दूसरी तरफ आर्थिक नाकाबंदी ने आम नागरिकों का जीवन दूभर कर दिया है। इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर चल रही अंतरराष्ट्रीय अटकलों पर ईरानी प्रशासन ने पहली बार चुप्पी तोड़ी है।
दरअसल, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने ताजा बयान में देश की जनता को एक नए किस्म के युद्ध के लिए तैयार रहने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने सैन्य मोर्चे पर अपनी श्रेष्ठता साबित कर दी है, लेकिन अब असली लड़ाई अर्थव्यवस्था और संस्कृति के लिए लड़नी है।
आर्थिक और सांस्कृतिक जिहाद
खामेनेई ने कहा कि इस्लामी गणराज्य ने युद्ध के मैदान में अपने शत्रुओं (अमेरिका और इजरायल) को अपनी ताकत दिखा दी है। अब दुनिया मानती है कि ईरान सैन्य रूप से पीछे नहीं है। उन्होंने ‘आर्थिक जिहाद’ शब्द का प्रयोग करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब ईरान को प्रतिबंधों के बावजूद अपने दुश्मनों को निराश करना होगा। इसके लिए स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को एकमात्र रास्ता बताया गया है।
सर्वोच्च नेता खामेनेई ने उद्योगपतियों और व्यापार मालिकों से भावनात्मक अपील की है कि वे इस संकट के समय में छंटनी (लेऑफ्स) से बचें। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को नौकरी से निकालना देश की आर्थिक स्थिति को और कमजोर करेगा।
ईरान ने कबूला बमबारी में घायल हुए थे सुप्रीम लीडर
पिछले काफी समय से दुनिया भर की मीडिया में यह चर्चा थी कि मोजतबा खामेनेई एक हमले में मारे गए हैं या गंभीर रूप से बीमार हैं। अब ईरान के ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ के सदस्य अयातुल्ला मोहसिन कोमी ने इन दावों पर से पर्दा उठाया है। अयातुल्ला कोमी ने पुष्टि की है कि जिस इमारत को दुश्मनों ने निशाना बनाया था, मोजतबा खामेनेई वास्तव में उस समय वहीं मौजूद थे। उन्होंने इसे अल्लाह का करिश्मा बताया कि धमाके से ठीक कुछ मिनट पहले वे कमरे से निकलकर आंगन में आ गए थे। इस हमले में कई अन्य अधिकारी मारे गए और मोजतबा को भी कुछ चोटें आईं, लेकिन वे सुरक्षित हैं।
ईरानी अधिकारियों का दावा है कि घायल होने के बावजूद मोजतबा पूरी तरह सक्रिय हैं। वे न केवल रणनीतिक फैसले ले रहे हैं, बल्कि ईरान की बातचीत करने वाली टीम (निगोशिएटिंग टीम) को हर पल निर्देश भी दे रहे हैं। कोमी ने उन्हें धरती पर खुदा का सबूत बताते हुए पश्चिमी देशों की उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें उनके नेतृत्व करने में अक्षम होने की बात कही गई थी।
ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था
ईरान इस समय जिस आर्थिक संकट से जूझ रहा है, वह बीते दशकों में सबसे गंभीर है। अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी ने ईरान की कमर तोड़ दी है। वहां की मुद्रास्फीति 50 प्रतिशत से अधिक है जिससे खाद्य सामग्री और बुनियादी चीजें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई हैं। ईरानी की मुद्रा रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है। डॉलर के मुकाबले रियाल की कीमत गिरने से आयात महंगा हुआ है। इसके साथ ही बेरोजगारी ने भी अपना फन फैलाना शुरू कर दिया है। बेरोजगारी भत्ते के लिए वहां अब तक 191000 नए आवेदन मिल चुके हैं। अमेरिकी नाकाबंदी के चलते मुख्य आय का स्रोत कच्चे तेल का कारोबार ठप पड़ा है।
ईरान के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे अपनी सीमा की रक्षा करनी है और दूसरी तरफ देश के भीतर बढ़ते जन-आक्रोश और आर्थिक तंगी को संभालना है। अगर ईरान इन दोनों मोर्चो को संभालने में कामयाब रहता है तो वहां का जन-जीवन फिर से पटरी पर आ सकता है।

















