अमेरिका द्वारा 5000 सैनिक वापस बुलाने पर बोला जर्मनी-हमें पहले से थी इसकी उम्मीद
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अमेरिका द्वारा 5000 सैनिक वापस बुलाने पर बोला जर्मनी-हमें पहले से थी इसकी उम्मीद

अमेरिका ने जर्मनी से 5000 सैनिक वापस बुलाने का फैसला लिया है। ट्रंप की नाराजगी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बयान के बाद उठा यह कदम NATO में चिंता पैदा कर रहा है।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
May 3, 2026, 06:53 am IST
inविश्व
Germany US Tension

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज (बाएं) और ट्रंप

अमेरिका की स्थिति खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे जैसी है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अमेरिका ने जर्मनी से 5,000 सैनिक वापस बुलाने का फैसला लिया है। अब जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरीस पिस्टोरियस ने यह कदम पहले से ही दिख रहा था। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूरोप में खासकर जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी जर्मनी और अमेरिका दोनों के हित में है। NATO की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने कहा कि गठबंधन अमेरिका से इस फैसले के बारे में विस्तार से जानकारी ले रहा है।

अमेरिका के सैनिक कहां-कहां हैं?

जर्मनी में अभी अमेरिका के 36,000 से ज्यादा सक्रिय सैनिक तैनात हैं। यह यूरोप में अमेरिका की सबसे बड़ी तैनाती है। तुलना करें तो इटली में करीब 12,000 और ब्रिटेन में 10,000 सैनिक हैं। ट्रंप ने कहा है कि 5,000 से कहीं ज्यादा सैनिक वापस बुलाए जाएंगे। उन्होंने इटली और स्पेन से भी सैनिक हटाने का सुझाव दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह फैसला तब आया जब जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि अमेरिका ईरानी बातचीतकारों के सामने ‘अपमानित’ हुआ है। ट्रंप ने इस पर नाराजगी जताई। मर्ज ने छात्रों से बातचीत में कहा था कि अमेरिकियों के पास कोई साफ रणनीति नहीं है। ईरानी बातचीत में कुशल हैं या फिर बातचीत से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरी अमेरिकी राष्ट्र को ईरान के सामने अपमानित होना पड़ रहा है। ट्रंप ने जवाब में कहा कि मर्ज को लगता है ईरान के पास परमाणु हथियार होना ठीक है।

इसे भी पढ़ें: ईरान में नोबेल विजेता नरगिस मोहम्मदी हुईं जेल में बदहाली का शिकार और अस्पताल बना ठिकाना

इसके बाद ही अमेरिका ने सैनिक वापसी की घोषणा की। पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने बताया कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के आदेश पर यह कार्रवाई हो रही है। वापसी छह से बारह महीने में पूरी हो जाएगी।

NATO में चिंता

NATO के 32 सदस्य देशों में इस कदम को लेकर चिंता बढ़ गई है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि ट्रांस-अटलांटिक समुदाय के लिए सबसे बड़ी खतरा बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि गठबंधन का बिखरना है। हमें इस रुझान को रोकना चाहिए। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के दो वरिष्ठ सांसदों – सीनेटर रोजर विकर और प्रतिनिधि माइक रोजर्स – ने भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यूरोप से पूरी तरह सैनिक हटाने की बजाय मजबूत रोकथाम बनाए रखना अमेरिका के हित में है।

यूरोप को अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी

पिस्टोरियस ने कहा कि यूरोप को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी ज्यादा लेनी होगी। जर्मनी अपने सहयोगियों के साथ और करीबी से काम करेगा। जर्मनी सैन्य खर्च बढ़ा रहा है। ट्रंप पहले जर्मनी को NATO के 2% लक्ष्य से कम खर्च करने का ‘दोषी’ बताते थे। अब मर्ज सरकार में 2027 में जर्मनी 105.8 अरब यूरो (करीब 91 अरब पाउंड) रक्षा पर खर्च करने वाला है। कुल मिलाकर यह GDP का 3.1% होगा। NATO की प्रवक्ता ने कहा कि यूरोप को रक्षा में ज्यादा निवेश करना चाहिए और सुरक्षा की जिम्मेदारी ज्यादा उठानी चाहिए।

Topics: अमेरिका जर्मनी सैनिक वापसीट्रंप जर्मनी सैनिकयूरोप सुरक्षा जिम्मेदारीबोरीस पिस्टोरियस
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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