खाड़ी युद्ध के चलते ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है। इससे दुनियाभर में तेल की किल्लतें हो रही हैं। लेकिन, ईरान के तेल सप्लाई हो रहा था। हाल ही में अमेरिका ने भी होर्मुज स्ट्रेट के बाहरी इलाके में नेवल नाकेबंदी कर दी। इससे अब ईरान इन दिनों काफी मुश्किल में है। पेंटागन से जुड़े अनुमानों के मुताबिक, इस ब्लॉकेड से ईरान को करीब 4.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। Axios की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
यह ब्लॉकेड 13 अप्रैल को शुरू हुई थी, जब दोनों तरफ की बातचीत टूट गई। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग रूट्स में से एक होर्मुज स्ट्रेट से तेल ले जाने की ईरान की क्षमता बहुत कम हो गई है। अमेरिकी अधिकारी कहते हैं कि इसका मकसद ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखना और उसके क्षेत्रीय गतिविधियों के लिए फंडिंग को कमजोर करना है।
क्या कहता है अमेरिका
पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने प्रेस सचिव जोएल वाल्डेज के हवाले से कहा कि ब्लॉकेड पूरी ताकत से चल रही है और ईरान के वित्तीय नेटवर्क पर इसका “निर्णायक असर” पड़ रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सख्त लहजे में कहा कि वाशिंगटन का स्ट्रेट पर “पूरी कंट्रोल” है। उन्होंने कहा कि जब तक सामान्य “फ्रीडम ऑफ नेविगेशन” नहीं लौटती, तब तक ब्लॉकेड जारी रहेगी।
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ईरान के अंदर हालात
इस पूरे दबाव का असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिख रहा है। पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था अब और दबाव में है। हालात ये हो गए हैं कि ईरान की लीडरशिप के अंदर भी मतभेद बढ़ गए हैं। कुछ गुट जवाबी कार्रवाई की बात कर रहे हैं, जबकि कुछ दूसरे लोग फिर से बातचीत शुरू करने के पक्ष में हैं।
आईआरजीसी के जवान मारे गए
आर्थिक दबाव के बीच एक दुखद घटना भी हुई। उत्तर-पश्चिमी प्रांत जांजान में पुराने हमलों से बचे बिना विस्फोट आयुध को निष्क्रिय करने के दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के 14 सदस्य मारे गए। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी। यह घटना दिखाती है कि संघर्ष के खतरे अभी भी दूर-दराज के इलाकों में बने हुए हैं।
ट्रंप का बयान और मौजूदा स्थिति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कानून बनाने वालों को बताया है कि ईरान के साथ सीधे शत्रुतापूर्ण कार्रवाई बंद हो गई है। लेकिन इसके बावजूद अमेरिका ने प्रतिबंध और सख्त कर दिए हैं और इलाके में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत रखी है। ईरान की तरफ से बातचीत के लिए तैयार होने के संकेत मिले हैं, लेकिन वे किसी भी ऐसे शर्त को मानने से इनकार कर रहे हैं जो दबाव में थोपी जाए।

















