ममता बनर्जी का खौफ! ऐक्सिस माई इंडिया के प्रदीप गुप्ता का बंगाल पर Exit पोल जारी न करने का निर्णय
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ममता बनर्जी का खौफ! ऐक्सिस माई इंडिया के प्रदीप गुप्ता का बंगाल पर Exit पोल जारी न करने का निर्णय

पश्चिम बंगाल एक्जिट पोल 2026 में एक्सिस माई इंडिया ने Exit Poll जारी क्यों नहीं किया? 70-80% मतदाताओं की अभूतपूर्व चुप्पी, सर्वेक्षकों की गिरफ्तारी और ममता सरकार के डर के माहौल की सच्चाई। लोकतंत्र पर उठते सवाल।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
May 2, 2026, 10:18 am IST
inविश्लेषण, पश्चिम बंगाल
West bengal Axis my India survey

एक्सिस माई इंडिया के चीफ प्रदीप गुप्ता (बाएं से) और ममता बनर्जी

Exit पोल के मौसम में जहां एक तरफ असम, केरल और तमिलनाडु के Exit पोल जारी हो गए हैं और सरकारें किसकी बन रही हैं, वह साफ दिख रहा है तो वहीं बंगाल के डाटा को लेकर एक अभूतपूर्व भ्रम है। यह भ्रम भयानक है, क्योंकि इससे ममता बनर्जी का खौफ और आम जनता की निरीहता तो दिखाई पड़ती ही है, परंतु सबसे ज्यादा जो दिखाई देता है वह है कथित प्रगतिशीलों का इस विषय पर मौन रह जाना।

यह सुविधजानक चुप्पी इस बात पर जो जश्न मनाती है कि ऐक्सिस माई इंडिया के प्रदीप गुप्ता ने इसलिए आँकड़े जारी नहीं किये क्योंकि वहाँ की जनता मुंह नहीं खोल रही है तो ऐसे में अन्य एजेंसी कैसे आँकड़े जारी कर सकती हैं? जाहिर है कि उनके आँकड़े फर्जी है और भाजपा की जीत के दावे झूठे हैं। मगर यहीं पर पेच हैं। यहाँ पर प्रश्न यह करना चाहिए कि आखिर वह कौन सा भय है जिसके चलते बंगाल की जनता इस सीमा तक भयभीत है कि वह अपना मुंह खोलने के लिए तैयार ही नहीं है। आखिर कौन सा कारण है जिसके चलते वहाँ की जनता अभूतपूर्व चुप्पी साधे बैठे हुए हैं।

इसे भी पढ़ें: दिल्ली में केजरीवाल की ‘जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’ में 38 करोड़ का घोटाला

डर का माहौल क्यों है?

ये डर का माहौल क्यों हैं? जो लोग भाजपा के पक्ष में आए हुए exit पोल की हंसी यह कहते हुए उड़ा रहे हैं कि आखिर कैसे चुप मतदाताओं के बीच आँकड़े जारी हो गए हैं, वे लोग इस बात पर बात ही नहीं कर रहे हैं कि आखिर लोग इतने डरे हुए क्यों हैं कि बात ही नहीं कर रहे हैं।

प्रदीप गुप्ता ने कहा कि उनकी एजेंसी ने पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के एग्जिट पोल जारी न करने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि सर्वे में 70% से 80% मतदाताओं ने यह बताने से इनकार कर दिया कि उन्होंने किसे वोट दिया है। इसे “अभूतपूर्व मतदाता चुप्पी” और डर का माहौल बताया गया, जिससे सटीक सर्वे करना असंभव हो गया।

क्यों है यह अभूतपूर्व चुप्पी?

अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यह अभूतपूर्व चुप्पी क्यों हैं? और इसी चुप्पी पर बात करने से लोग डरते हैं। क्या किसी राजनेता का खौफ इतना हो सकता है कि वहाँ की जनता यह बताने से ही डरने लगे कि उसने वोट किसे दिया है?

यह अभूतपूर्व है! यह लोकतंत्र के मुंह पर बहुत बड़ा तमाचा है और यह बताता है कि बंगाल की राजनीति में परिवर्तन कितना आवश्यक है? बंगाल की राजनीति में किस सीमा तक आम लोगों का शोषण शामिल है, जिसने लोगों को डराकर रखा हुआ है। यह ममता बनर्जी के लोगों की हिंसा ही है, जिसने लोगों को इस सीमा तक भयांक्रांत कर रखा है कि वह मुंह ही नहीं खोल पा रहे हैं। वे यह बताने में अक्षम हैं कि आखिर उन्होनें वोट दिया किसे है?

यह किसी भी प्रांत के लिए या फिर कहें कि कथित बुद्धिजीवियों के लिए शर्म का विषय होना चाहिए था, मगर यही शर्मनाक बात कथित प्रगतिशीलों के लिए गर्व का विषय बनकर सामने आ रही है क्योंकि उन्हें यह लग रहा है कि भाजपा की विजय exit पोल वाले झूठ दिखा रहे हैं।

मगर कई Exit पोल तो ममता की भी जीत दिखा रहे हैं, तो क्या यह भी झूठे आँकड़े हैं? आखिर भाजपा से नफरत में आम लोगों से घृणा क्यों करने लगे हैं कथित प्रगतिशील लोग?

ऐक्सिस माई इंडिया के कई लोग गिरफ्तार भी हुए थे

और प्रगतिशीलों की इस चुप्पी के बीच जिस विषय पर बात नहीं हो रही है वह है कि प्रदीप गुप्ता की टीम के कई सर्वेक्षकों को ममता बनर्जी की सरकार ने जेल की हवा भी खिला दी थी। उन्होनें एक वीडियो में बताया कि कोलकाता में उनके लोग एक गैर-राजनीतिक सर्वे (non-political survey) कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। और उसके बाद उनकी टीम के लोगों को लगभग 21 से 24 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। मगर सरकार से उन्हें कोई भी राहत नहीं मिली। राहत उन्हें मिली कोलकता उच्च न्यायालय से।

इतनी बड़ी बात पर भी कथित प्रगतिशील खेमे में कोई भी प्रश्न नहीं है कि आखिर एक गैर राजनीतिक सर्वे करने पर भी लोगों को हिरासत में क्यों लिया जा सकता है? आखिर वह क्या कारण है कि लोग जेल चले गए? उन्होनें कोई अपराध तो नहीं किया था, बस कुछ सर्वे ही तो कर रहे थे?

सच्चाई से क्यों डर रही है ममता सरकार

आखिर आंकड़ों से या सच्चाई से ममता सरकार इतना डरती क्यों है? क्यों वह वहाँ पर अपना खौफ का माहौल बनाए रखना चाहती है? क्यों उसे न ही सर्वे करने वाले चाहिए, न ही केन्द्रीय बल चाहिए और यहाँ तक कि उसे चुनाव आयोग भी नहीं चाहिए?

और भारत का कथित प्रगतिशील वर्ग इस बात लहालोट हो रहा है कि जब लोग बोल ही नही रहे हैं तो आँकड़े कैसे exit पोल के जारी हो रहे हैं? मगर वह इस बात पर मौन है कि सर्वे करने पर गिरफ़्तारी क्यों है और यह डर का माहौल आखिर क्यों है? या फिर क्या “बोल कि लब आजाद है तेरे कहने वाले लोग” इतना डर गए हैं कि वे बोलना ही नहीं चाहते हैं? क्योंकि कहा भी गया है कि “डर सभी को लगता है, गला सभी का सूखता है, प्यास सभी को लगती है”

Topics: पश्चिम बंगाल एक्सिस माई इंडिया एक्जिट पोलममता बनर्जी डर का माहौलबंगाल exit poll 2026
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