दिल्ली में केजरीवाल सरकार के दौरान किया गया एक और घोटाला सामने आ गया है। ये घोटाला शिक्षा की बात करने वाले केजरीवाल की गरीब और कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए चलाई गई मुफ्त कोचिंग योजना में हुआ है। इस योजना का नाम ‘जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’ था। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने इस मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। कुल 38 करोड़ रुपये के फर्जी बिलों का मामला है।
योजना क्या थी?
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना दिसंबर 2017 में शुरू हुई थी। शुरू में सिर्फ अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए थी। सितंबर 2019 में इसे बढ़ा दिया गया और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तथा आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के छात्रों को भी शामिल कर लिया गया।
योजना के तहत छात्रों को UPSC, JEE, NEET, बैंकिंग और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निजी कोचिंग संस्थानों में मुफ्त कोचिंग मिलती थी। इसके अलावा किताबों और आने-जाने के खर्च के लिए हर महीने 2,500 रुपये का वजीफा भी दिया जाता था। परिवार की सालाना आय 2 लाख से कम होने पर पूरी फीस सरकार देती थी। 2 से 6 लाख आय वाले परिवारों के लिए 75 प्रतिशत फीस कवर होती थी।
पहले साल 2018-19 में करीब 5,000 छात्रों ने नामांकन किया। 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 13,000 छात्रों ने दाखिला लिया, जिनमें से 4,000 मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे थे। इनमें से 1,303 छात्रों का चयन IIT जैसी अच्छी संस्थाओं में हुआ।
कैसे हुआ घोटाला?
कोविड के बाद योजना को फिर शुरू किया गया। अक्टूबर-नवंबर 2024 में इसे सक्रिय करने की कोशिश हुई लेकिन पैसे की हेराफेरी की शिकायतों के चलते इसे बंद कर दिया गया। जांच में पता चला कि कई कोचिंग संस्थानों ने फर्जी आय प्रमाण पत्र बनवाए। इन पर SDM की मुहर लगाकर छात्रों को पढ़ाने का फर्जी दावा किया गया। एक ही छात्र का नाम कई संस्थानों में दिखाया गया। सरकार ने इन फर्जी दावों पर 38 करोड़ रुपये के बिल चुकाए।
पिछले साल ACB ने दर्ज किया था केस
तत्कालीन उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के निर्देश पर ACB ने अगस्त 2025 में केस दर्ज किया था। करीब 8 महीने की जांच के बाद 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सभी को गुरुवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया और तिहाड़ जेल भेज दिया गया। गिरफ्तार किए गए लोगों में रवींद्र कुमार – रवींद्र इंस्टीट्यूट, मुखर्जी नगर, नरेंद्र कुमार गुप्ता – तक्षशिला इंस्टीट्यूट, रोहिणी, शंभू शरण – किरण इंस्टीट्यूट, मुखर्जी नगर और दिग्विजय कुमार – परिणाम इंस्टीट्यूट, मुखर्जी नगर शामिल हैं। इन चारों की चर्चा इसलिए है, क्योंकि ये बड़े संस्थान हैं जिनकी दिल्ली में कई ब्रांच हैं।
रवींद्र इंस्टीट्यूट के निदेशक ने तीन ट्यूशन सेंटर वालों को भी योजना के तहत पढ़ाने का ठेका दे दिया था। इसके अलावा करावल नगर स्थित आजाद कैलेट, यमुना विहार स्थित हर्षित और संजीव कुमार (कर्दमपुरी) को भी गिरफ्तार किया गया है।
इसके अलावा NGO ‘पहल’ (रोहिणी सेक्टर 20) के निदेशक जितेंद्र कुमार और रवींद्र इंस्टीट्यूट से जुड़े संजय कुमार को भी गिरफ्तार किया गया। सरकार ने योजना चलाने का काम इस NGO को सौंपा था।












