सोशल मीडिया पर हाल ही में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा का एक वीडियो काफी चर्चा में रहा है, जिसे लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, इस वीडियो की गहराई से जांच करने पर इसकी वास्तविकता कुछ और ही निकलकर सामने आती है। यह वीडियो किसी राजनीतिक दल या संगठन के कार्यक्रम का नहीं है, बल्कि एक शैक्षणिक संस्थान में आयोजित कार्यशाला का है।
दरअसल, इंटरनेट पर प्रसारित हो रहा यह वीडियो मई 2024 का है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा कर रहे थे कि न्यायमूर्ति शर्मा किसी राजनीतिक मंच (जैसे RSS या BJP) से बोल रही थीं, लेकिन यह जानकारी पूरी तरह से गलत है।
न्यायमूर्ति शर्मा के वायरल वीडियो का सच
उन्होंने यह भाषण वाराणसी के प्रसिद्ध महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के विधि विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ लॉ) द्वारा आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में दिया था। इस कार्यक्रम का विषय ‘बदलते भारत में नए आपराधिक कानूनों की प्रासंगिकता’ (Relevance of New Criminal Laws in Changing India) था।
इस कार्यक्रम की कई तस्वीरें और वीडियो विधि महाविद्यालय के आधिकारिक फेसबुक पेज पर अपलोड किए गए हैं। इन तस्वीरों में विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य, छात्र और कई वरिष्ठ शिक्षाविद साफ तौर पर देखे जा सकते हैं। संस्थान ने न्यायमूर्ति शर्मा के लगभग सात मिनट लंबे संबोधन का पूरा वीडियो भी अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया था।
‘जब भी काशी आई, बाबा ने कुछ दिया’
वर्कशॉप के दौरान न्यायमूर्ति शर्मा का संबोधन काफी भावनात्मक और आध्यात्मिक रहा। उन्होंने वाराणसी (काशी) के प्रति अपनी गहरी आस्था और विश्वविद्यालय के साथ अपने जुड़ाव को शब्दों में पिरोया। उनके भाषण के मुख्य अंशों से यह साफ होता है कि वे अपने करियर की प्रगति को बाबा विश्वनाथ (भगवान शिव) की कृपा मानती हैं।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा वीडियो में अपनी उपलब्धियों का श्रेय RSS को नहीं बल्कि भगवान शिव और काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय को दे रही थीं.#SwaranakantaSharma #FactCheck
देखें वीडियो👇🏼 pic.twitter.com/05OQugn2yU
— BOOM Hindi (@BOOMLivehindi) April 27, 2026
भाषण के कुछ मुख्य बिंदु
न्यायमूर्ति शर्मा ने अपने संबोधन में बताया कि कैसे हर साल विश्वविद्यालय द्वारा आमंत्रित किए जाने पर उनकी पेशेवर भूमिका में सकारात्मक बदलाव आया। जब उन्हें पहली बार यहां बुलाया गया था, तब वे एक सत्र न्यायाधीश (सेशन जज) के रूप में कार्यरत थीं। अगले वर्ष जब वे फिर से आईं, तब उनकी पदोन्नति हो चुकी थी और वे पारिवारिक न्यायालय (फैमिली कोर्ट) की जिला न्यायाधीश थीं। उसके अगले साल जब उन्हें आमंत्रित किया गया, तो वे जिला एवं सत्र न्यायाधीश (डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज) बन चुकी थीं।
उन्होंने यह भी बताया कि आज जब वे इस कार्यशाला में वक्ता के रूप में शामिल हुईं, तो वे उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) की न्यायाधीश बन चुकी हैं। उन्होंने अपने संबोधन में विशेष रूप से ‘बाबा’ शब्द का प्रयोग किया, जिसका अर्थ वाराणसी के आराध्य देव बाबा भोलेनाथ (भगवान शिव) से है। उन्होंने कहा कि जब भी वे बनारस आती हैं, महादेव उन्हें कोई न कोई सौगात जरूर देते हैं।
जज स्वर्ण कांत शर्मा का असली वीडियो
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा असली वीडियो में कहती हैं, ‘मैं जब-जब बनारस आई हूं, बाबा ने मुझे कुछ दिया है। इसलिए जब भी मैं यहां बोलना शुरू करती हूं, तो यह प्रारंभ हमेशा महादेव से होता आया है। मुझे विश्वविद्यालय के रंजन जी और शिल्पी जी का स्नेह यहां खींच लाता है। जब आपने मुझे पहली बार आमंत्रित किया तो मैं सिर्फ एक सेशंस जज थी। अगले साल मैं फैमिली कोर्ट की डिस्ट्रिक्ट जज बनी। उसके अगले साल मैं डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज थी और आज बाबा ने मुझे हाईकोर्ट का जज बना दिया है। प्रभु से मेरी यही अर्जी है कि मैं वह हो जाऊं जो उनकी मर्जी है।’
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लगभग 90 सेकंड लंबा यह वीडियो न्यायमूर्ति शर्मा द्वारा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य के खिलाफ आबकारी नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार करने के तुरंत बाद प्रसारित होना शुरू हो गया। इस वीडियो के हवाले से दावा किया जा रहा था कि वह आरएसएस से जुड़ी हैं इसलिए उनको खुद को इस केस से अलग कर लेना चाहिए। मगर सच्चाई कुछ और निकली।
यह मामला इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे सोशल मीडिया पर बिना संदर्भ के वीडियो साझा करने से भ्रामक सूचनाएं फैलती हैं।
















