"जब संघ और समाज एकरूप होंगे, तब पूरा होगा हमारा कार्य": जबलपुर में बोले सुरेश सोनी जी, 'संघिका' पुस्तक का भी हुआ विमोचन
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“जब संघ और समाज एकरूप होंगे, तब पूरा होगा हमारा कार्य”: जबलपुर में बोले सुरेश सोनी जी, ‘संघिका’ पुस्तक का भी हुआ विमोचन

जबलपुर में RSS की जन गोष्ठी में सुरेश सोनी ने 'संघिका' पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष, पंच परिवर्तन और डॉ. हेडगेवार के विजन पर विस्तार से प्रकाश डाला। जानिए संघ के कार्य और समाज की वर्तमान चुनौतियों पर क्या बोले सुरेश सोनी।

Written byपाञ्चजन्य संवाददातापाञ्चजन्य संवाददाता — edited by Shivam Dixit
Apr 26, 2026, 08:43 pm IST
inभारत, संघ को जानें, संघ @100, मध्य प्रदेश
RSS leader Suresh Soni releasing 'Sanghika' book in Jabalpur during Jan Goshthi

अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी जी ने जबलपुर में 'संघिका' पुस्तक का लोकार्पण किया।

जबलपुर । राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जबलपुर महानगर के तत्वावधान में साहित्यकार एवं इतिहासकार श्रेणी की प्रमुख जन गोष्ठी तथा संघिका पुस्तक के लोकार्पण का आयोजन श्रीजानकीरमण महाविद्यालय में किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश जी सोनी , मुख्य अतिथि आदरणीय शरदचंद जी पालन एवं विशिष्ट अतिथि विभाग संघ चालक कैलाश गुप्ता जी रहे।

कार्यक्रम का शुभारम्भ

कार्यक्रम के शुभारम्भ में भारत माता की पूजा अर्चना के साथ हुआ, जिसमें वंदे मातरम का गायन श्रीजानकी बैंड के साथ हुआ।

अतिथि परिचय एवं पुस्तक विमोचन

अतिथि परिचय डॉ. अभिजात कृष्ण त्रिपाठी जी ने किया। इस प्रमुख जन गोष्ठी में डॉ. आनंद सिंह राणा द्वारा लिखित,महाकौशल प्रांत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास पर केंद्रित पुस्तक ‘संघिका’ के प्रथम भाग का विमोचन हुआ, जिसका पुस्तक परिचय और समीक्षा दीपक द्विवेदी जी ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम की प्रस्तावना अल्केश चतुर्वेदी जी ने किया।

डॉ. आनंद सिंह राणा द्वारा लिखित संघिका पुस्तक का विमोचन करते श्री सुरेश सोनी जी।

मुख्य अतिथि का संबोधन

मुख्य अतिथि शरदचंद पालन शताब्दी वर्ष पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्र के निर्माण में साहित्यकार और इतिहासकार की भूमिका को रेखांकित किया। एकल गीत नूपुर देशकर जी ने प्रस्तुत किया।

मुख्य वक्ता सुरेश जी सोनी का उद्बोधन

मुख्य वक्ता सुरेश जी सोनी ने कहा संघ एक उद्देश्य के साथ प्रारंभ हुआ।शताब्दी मनाना हमारा विचार नहीं था। इस देश के प्राचीन दर्शन एवं संस्कृति विश्व के लिए लाभदायक है लेकिन काल के प्रवाह में यह टूट गई। इसी विचार को स्थापित करना उद्देश्य है और यह यात्रा अपने उद्देश्य तक चलती रहेगी। संघ का कार्य कब पूरा होगा यह सभी पूछते हैं जिस दिन संघ और समाज एकरूप हो जाएगा तब तक संघ का कार्य चलता रहेगा ।

गोष्ठी में उपस्थित अतिथि

शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम

उन्होंने कहा- शताब्दी वर्ष के निमित्त लोगो से संपर्क, संवाद करे और इस उद्देश्य को समाजव्यापी बनाने के लिए गृह संपर्क के तहत 10 करोड़ से अधिक परिवारो के साथ सामाजिक सद्भाव की बैठकें हुई । 60000 स्थानों पर हिंदू सम्मेलन के आयोजन हुए है, उसी क्रम में ये जनगोष्ठी हुई ।

स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख

स्वामी विवेकानंद शिकागो सम्मेलन में जाने से पूर्व 2 वर्ष भारत भ्रमण कर भारत को समझा और निष्कर्ष में।तीन बातें कही व्यक्ति निर्माण तंत्र बनाना होगा समाज अनेक समूह में बटा है इसे एक करना होगा। लोगो को राष्ट्र के प्रति जोड़ना होगा।संघ के संस्थापक हेडगेवार जी ने इसे ही व्याहारिक स्वरूप दिया।

आजादी के आंदोलन की शस्त्र अर्थात क्रांतिकारी धारा फड़के से खुदीराम बोस तक अनेक क्रन्तिकारी जुड़े रहे, एक अहिंसक धारा थी कांग्रेस उसकी वाहक बनी। देश का सामान्य जन उससे जुड़ा। सेना के बल पर आजादी की धारा आजाद हिंद फौज के रूप में रासबिहारी बोस एवं सुभाष चंद्र बोस ने रखी। राजनैतिक संघर्ष से कुछ नहीं होगा समाज में,सुधार जरूरी है यह कार्य समाज सुधारकों ने किया।

गोष्ठी में उपस्थित अतिथि

संघ संस्थापक का बहुआयामी कार्य

उन्होंने आगे कहा कि संघ के संस्थापक ने सभी धाराओं में काम किया, कलकत्ता गए अनुशीलन समिति से जुड़े शस्त्र धारा को समझा
कांग्रेस के अहिंसक धारा को भी जाना, 1920 कांग्रेस नागपुर अधिवेशन के प्रमुख रहे। सामाजिक सुधार घर वापसी अंतरजातीय विवाह गौ रक्षा आदि के लिए कार्य किया।सुभाष चंद्र बोस जी के साथ कार्य किया ।

समाज की वर्तमान स्थिति

उन्होंने कहा कि आज का मूल दोष क्या है समाज आत्मकेंद्रित हो गया जबकि सनातन संस्कृति का कार्य विश्वकल्याण करना है। ये गोष्ठी, चर्चा विचार को आचरण में लाना होगा इसीलिए शाखा शुरू हुई। 100 साल में पूरे देश में, 80000 स्थानों पर प्रतिदिन या साप्ताहिक शाखा लगती है। संघ अनुशासन का पर्याय है। संघ का स्वयंसेवक भाषा जाति क्षेत्र से परे होकर सोचता है उसके लिए देश प्रथम है निस्वार्थता संघ का आधार है।

संघ के वैचारिक बातों को लेकर भिन्न भिन्न संगठन बने जैसे मजदूर संघ, अखिल विद्यार्थी परिषद, कल्याण आश्रम सेवा भारती आदि।

संस्कृति संरक्षण के प्रयास

दीर्घकाल में सोए समाज को जगाने में संस्कृति रक्षा,एकात्मकता के लिए विभिन्न कार्य किए राममंदिर को पूर्णता तक पहुंचाया। हालांकि जो सोचा था वह अभी पूर्ण रुप से नहीं हुआ लेकिन वातावरण तो बना है। हिंदुत्व ही एक विचार है जो विश्व के संकटों को हल कर सकता है।

भारतीय दर्शन और एकात्मता

उन्होंने कहा कि वेदों से लेकर भक्ति काल के संतो तक ने विश्व कल्याण के लिए ,संपूर्ण प्रकृति, जीव चराचर के कल्याण से है हमने माना ईश्वर सबके अंदर है ,सब एक है एकम् सत्य विप्रा बहुधा वदंति अर्थात अंतर्निहित सब जुड़े हुए है। अब्राहमिक धर्म आपस में झगड़े है,लेकिन भारत में देव एवं असुर लड़ते है लेकिन एक जगह मिल जाते है तुलसी दास राम भक्त है लेकिन शिवपूजक हैं ।ईश्वर के रूप अनेक पर ईश्वर एक है।

भाषा और अभिव्यक्ति

उन्होंने आगे कहा कि भाषा में कोई विवाद नहीं भाषा तो केवल अभिव्यक्ति है। नरसी मेहता, त्यागराज कबीर सूरदास शंकर देव सबका भाव एक है भले भाषा अलग अलग है। समाज जीवन से धर्म निकल गया तो मानव पशु हो जाएगा। धर्म का अधिष्ठान हमारा मूल है

पंच परिवर्तन के प्रमुख विषय

उन्होंने कहा कि पंच परिवर्तन मुख्य विषय है- कुटुंब प्रबोधन सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। पश्चिमी विचार व्यक्तिवाद पर आधारित है मेरे अधिकार मेरे सुख आदि इसीलिए आज अमेरिका से लेकर यूरोप तक समाज में 50% से 60% तक सिंगल पेरेंट, अवसाद निराशा आदि है, आत्महत्या आदि है। भारत में विचार सामूहिक है परिवार है, सामंजस्य आदि है ।

मां प्रथम गुरु, संयुक्त परिवार है। कुल गांव प्रदेश देश एक परिवार है और अंत में वसुधैव कुटुंबकम्। हमने पशुओं,ग्रहों से संबंध जोड़ा नर्मदा मैया चन्दा मामा बिल्ली मौसी है लेकिन आधुनिकरण में हम सब भूल रहे है। भारतीय परिवार एवं समाज के वैशिष्ट्य को पुनर्जीवित करना है तो परिवार को पुनर्जीवित करना होगा।

समरसता तत्व ज्ञान में सब एक है लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं है, सबको एक मानना और जानना है।

स्वदेशी जीवन शैली

अंत में उन्होंने कहा कि स्व के आधार पर चिंतन करना वेशभूषा , खान पान, आदि सब स्वदेशी हो। पर्यावरण दृष्टि पंच पेड़ लगाए, नदी तालाब की पूजा प्रकृति से जुड़ाव जरूरी है। नागरिक कर्तव्य बोध होना चाहिए। सब एक है सब में एक है सब में ईश्वर है, स्वच्छता नियमों आदि का पालन करे जो करे देश हित में करे निष्ठा पूर्वक करे।

जिज्ञासा समाधान सत्र

कार्यक्रम में साहित्यकारों एवं इतिहासकारों के प्रश्नों का उत्तर मुख्य वक्ता सुरेश जी सोनी ने जिज्ञासा – समाधान सत्र में दिया।

सहभागिता एवं समापन

इस प्रमुख जन गोष्ठी में लगभग ढाई सौ साहित्यकारों एवं इतिहासकारों ने सहभागिता की। सम्पूर्ण कार्यक्रम आभार डॉ. अभिजात कृष्ण त्रिपाठी एवं संचालन डॉ. आनंद सिंह राणा ने किया। प्रमुख जन गोष्ठी का का समापन राष्ट्रगान से हुआ।

Topics: जबलपुर समाचारसुरेश सोनीSuresh SoniPanch ParivartanRSS Centenary YearRSS JabalpurSanghika BookDr. Anand Singh Ranaसंघिका पुस्तक
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