गत 21 अप्रैल को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश रविंद्र कुमार अग्रवाल ने बिलासपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.) शिविर के दौरान गैर-मुस्लिम छात्रों को नमाज पढ़ने के लिए मजबूर करने के मामले में आरोपी प्रोफेसर दिलीप झाा के विरुद्ध दर्ज एफ.आई.आर. और उसके बाद की आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से मना कर दिया।
न्यायालय ने कहा कि जांच पहले ही पूरी हो चुकी है और आरोपी दिलीप झा के विरुद्ध आगे बढ़ने के लिए काफी प्रमाण इकट्ठा कर लिए गए हैं। न्यायालय ने कहा कि आरोपपत्र से पता चलता है कि जांच में प्रथम दृष्टया ऐसे प्रमाण मिले हैं, जिनके आधार पर मुकदमा चलाया जा सकता है।
बता दें कि यह मामला मार्च में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सात-दिवसीय एन.एस.एस. शिविर से जुड़ा है, जिसके दौरान गैर-मुस्लिम छात्रों से नमाज़ पढ़ने के लिए कहा गया। यह भी आरोप लगाया गया कि जिन लोगों ने इसका विरोध किया, उन्हें बुरे परिणामों की धमकी दी गई।
शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने एक एफ.आई.आर. दर्ज की और एक आरोपपत्र दायर किया। इसमें ‘प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर’ के तौर पर काम करने वाले दिलीप झा को भी आरोपियों में शामिल किया गया है।

















