ट्रंप को महंगा पड़ा टैरिफ वॉर! 166 बिलियन डॉलर की रकम वापस करने की प्रक्रिया की शुरू, भारत को कितना होगा फायदा?
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ट्रंप को महंगा पड़ा टैरिफ वॉर! 166 बिलियन डॉलर की रकम वापस करने की प्रक्रिया की शुरू, भारत को कितना होगा फायदा?

ट्रंप सरकार के अवैध टैरिफ पर अमेरिका 166 बिलियन डॉलर (15 लाख करोड़ रुपये) वापस कर रहा है। CAPE प्लेटफॉर्म से रिफंड शुरू, भारतीय निर्यातकों को 10-12 बिलियन डॉलर की उम्मीद लेकिन सीधा क्लेम नहीं।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Apr 23, 2026, 09:36 am IST
in विश्व
डोनाल्ड ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब से अपने दूसरे कार्यकाल में आए थे, उन्होंने टैरिफ को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया। उन्होंने न केवल अपने विरोधियों, बल्कि अपने सहयोगी देशों पर भी मनमाने तरीके से टैरिफ लगाए। लेकिन अब उन्हें उसी टैरिफ के पैसे को वापस करना पड़ रहा है। इसकी प्रक्रिया को शुरू भी कर दिया गया है। इसके तहत कुल 166 बिलियन डॉलर (करीब 15 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा की रकम वापस की जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

ट्रंप सरकार ने अप्रैल 2025 से ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ लगाना शुरू किया। शुरू में ये 10% थे, लेकिन बाद में बढ़कर भारतीय सामान पर 25% और फिर 50% तक पहुंच गए। फरवरी 2026 की शुरुआत में कुछ बातचीत के बाद 18% पर आ गए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने पूरी व्यवस्था को ही गैरकानूनी बता दिया। इन टैरिफ की वजह से अमेरिका में आने वाले आयात पर भारी बोझ पड़ा था। कुल 3 लाख 30 हजार से ज्यादा आयातकों ने 5 करोड़ 30 लाख से अधिक शिपमेंट्स पर ये टैक्स चुकाया था।

अब अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने CAPE नाम का नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। 20 अप्रैल 2026 से आयातक इसमें क्लेम फाइल कर सकते हैं। क्लेम में शिपमेंट डिटेल्स, टैरिफ लाइन और पेमेंट का प्रमाण लगाना जरूरी है। मंजूर होने पर रिफंड में ब्याज भी शामिल होगा और 60 से 90 दिनों के अंदर पैसे वापस आने की उम्मीद है।

इसे भी पढ़ें: होर्मुज स्ट्रेट बंदी के बीच ईरानी सेना का एक्शन: दो जहाज कब्जे में, अमेरिका का ब्लॉकेड जारी

भारतीय कंपनियों को कितना मिल सकता है?

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल रिफंड में से 10 से 12 बिलियन डॉलर (करीब 85 हजार से 1 लाख करोड़ रुपये) भारतीय सामान से जुड़ा हो सकता है। भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात का करीब 53% हिस्सा इन टैरिफ से प्रभावित हुआ था। इसमें कपड़ा और परिधान क्षेत्र को करीब 4 बिलियन डॉलर, इंजीनियरिंग सामान — करीब 4 बिलियन डॉलर और करीब 2 बिलियन डॉलर का रसायन है।

असल में ये सेक्टर मुख्य रूप से लेबर-इंटेंसिव हैं, इसलिए भारतीय निर्यातकों पर असर काफी पड़ा था। कई कंपनियों ने उस समय मार्जिन घटाकर या डिस्काउंट देकर सामान बेचा था।

सीधे क्लेम नहीं कर सकते भारतीय निर्यातक

सबसे अहम बात ये है कि रिफंड सिर्फ उन लोगों को मिलेगा जिन्होंने टैरिफ का भुगतान किया था — यानी मुख्य रूप से अमेरिका के आयातक और कंपनियां। भारतीय निर्यातक या सप्लायर सीधे अमेरिकी अथॉरिटी से दावा नहीं कर सकते। उनके पास कोई कानूनी रास्ता नहीं है। कुछ मामलों में अमेरिकी आयातक अपनी मर्जी से भारतीय पार्टनर के साथ रिफंड शेयर कर सकते हैं, लेकिन ये पूरी तरह बिजनेस डील पर निर्भर करता है। इसलिए भारतीय कंपनियों को मिलने वाला फायदा अभी अनिश्चित है। कई एक्सपोर्टर उम्मीद लगा रहे हैं कि उनकी अमेरिकी खरीदारों से बातचीत से कुछ राहत मिलेगी।

बहरहाल, इतनी बड़ी रकम का अमेरिकी खजाने से निकलना ट्रंप प्रशासन और उसकी नीतियों के लिए बड़ा झटका होने जा रहा है।

Topics: Trump Tariff RefundsTariff RefundsUS Tariff Refund CAPE PortalTariff Refunds for Indian Exportersट्रंप टैरिफTrump tariffsट्रंप टैरिफ वापसीटैरिफ वापसीUS टैरिफ रिफंड CAPE पोर्टलभारतीय निर्यातकों को टैरिफ रिफंड
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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