अमेरिका पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं किया जा सकता है। आज हालात ये हो गए हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति कहलाने वाले अमेरिका की नीतियां बहुत ही अस्थिर हैं। डोनाल्ड ट्रंप कब क्या कर दें, कोई नहीं जानता है। वे टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने एक बार फिर से भारत, चीन और कई अन्य देशों की व्यापार नीतियों पर नई जांच शुरू कर दी है। इससे इन देशों पर नए टैरिफ (आयात शुल्क) लगने का खतरा मंडरा रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पहले लगाए गए कुछ टैरिफ को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। जांच में लगभग 60 देश शामिल हो सकते हैं, जिसका असर वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है।
16 बड़े व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ जांच
ट्रंप प्रशासन ने 16 बड़े व्यापारिक साझेदार देशों की नीतियों की जांच शुरू की है, क्योंकि उन्हें ये नीतियां अमेरिका के लिए अनुचित लग रही हैं। मुख्य फोकस दो बातों पर है – पहला, उद्योगों में क्षमता से ज्यादा उत्पादन होना, और दूसरा, जबरन मजदूरी से बने सामान का आयात। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि पहली जांच ज्यादा उत्पादन पर केंद्रित है, जबकि दूसरी जबरन मजदूरी पर होगी। ये जांचें गर्मियों तक पूरी हो सकती हैं और नए टैरिफ का रास्ता साफ कर सकती हैं।
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जांच में शामिल देशों में भारत, चीन, यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, ताइवान, वियतनाम, थाइलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे जैसे नाम हैं। कनाडा को इस सूची से बाहर रखा गया है। जबरन मजदूरी वाली जांच कल दोपहर के बाद शुरू हो सकती है।
अमेरिका पहले से ही ‘उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट’ के तहत चीन के शिनजियांग इलाके से आने वाले सोलर पैनल और अन्य सामानों पर कार्रवाई कर रहा है। वहां उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों के जबरन मजदूरी कैंप होने का आरोप है, हालांकि चीन इन आरोपों से इनकार करता है।
किन देशों पर असर
इस जांच का सीधा असर भारत, चीन, EU, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, ताइवान, वियतनाम, थाइलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे पर पड़ सकता है। कुल मिलाकर 60 व्यापारिक साझेदार देशों तक यह पहुंच सकती है, जिससे पूरी दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
















