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होर्मुज संकट की भारत ने ढूंढ ली काट: उठाया ऐसा कदम कि 2030 तक नहीं होगी तेल की किल्लत

खाड़ी संकट और होर्मुज में तनाव के बीच भारत सरकार ने रूसी तेल टैंकरों के लिए बीमा कंपनियों की संख्या 8 से बढ़ाकर 11 कर दी है। 2030 तक सस्ता रूसी तेल मिलता रहेगा, पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Apr 22, 2026, 11:37 am IST
inभारत
Donald trump oil tanker

प्रतीकात्मक तस्वीर

खाड़ी संकट के चलते दुनियाभर में तेल का संकट गहरा गया है। इसका असर भारत पर भी पड़ रहा है। क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल होर्मुज से ही आयात करता है। ऐसे में तेल से निकटने के लिए सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए एक स्मार्ट प्लान बनाया है। इसके तहत देश को 2030 तक सस्ता तेल मिलता रहेगा। इसीलिए भारत ने रूसी तेल ले जाने वाले जहाजों के लिए बीमा कंपनियों की संख्या बढ़ा दी है।

इससे पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों या खाड़ी इलाके के तनाव का असर हमारे पेट्रोल और डीजल पर नहीं पड़ेगा। इस फैसले से आने वाले कई सालों तक देश में तेल की सप्लाई बिना रुके चलती रहेगी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है महत्वपूर्ण?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का एक संकरा समुद्री रास्ता है, जहां से खाड़ी देशों का ज्यादातर तेल गुजरता है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही खींचतान की वजह से इस रास्ते पर नाकेबंदी का खतरा हमेशा बना रहता है। अगर यह रास्ता बंद हो गया तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और सप्लाई बाधित हो सकती है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। ऐसे में खाड़ी देशों पर पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा है। इसलिए सरकार रूस से आने वाले सस्ते तेल को बिना किसी रुकावट के जारी रखना चाहती है।

रूसी बीमा कंपनियों पर भरोसा बढ़ाया

भारत सरकार के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) ने रूसी तेल के जहाजों को बीमा देने वाली कंपनियों की संख्या 8 से बढ़ाकर 11 कर दी है। पश्चिमी प्रतिबंधों की वजह से यूरोपीय कंपनियां पीछे हट गई थीं, तो भारत ने सीधे रूसी कंपनियों को मंजूरी दे दी। इनमें गज़प्रोम इंश्योरेंस, रोसगोस्त्राख जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा VSK, सोगाज़ और अल्फास्ट्राखोवानी जैसी कंपनियों को 2030 तक काम करने की अनुमति दी गई है। इससे रूस से तेल लाने वाले टैंकरों को अंतरराष्ट्रीय समुद्र में चलने के लिए जरूरी P&I कवर आसानी से मिल जाएगा और डिलीवरी में कोई देरी नहीं होगी।

आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम

इस फैसले से भारत ने अपनी तेल सप्लाई को कई स्रोतों में बांट दिया है। रूस के अलावा दुबई स्थित इस्लामिक प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी क्लब को भी मंजूरी दी गई है, ताकि विकल्प हमेशा उपलब्ध रहें। रूस से तेल लाने में औसतन 15-18 दिन लगते हैं, लेकिन इस व्यवस्था से सप्लाई सुरक्षित और लगातार बनी रहेगी। पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है, क्योंकि सस्ता तेल मिलने से रिफाइनरियों को फायदा होगा।

भारत ने यह प्लान सिर्फ कुछ महीनों के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय के लिए तैयार किया है। अगले छह सालों तक (2030 तक) रूसी तेल के जहाजों को बीमा के लिए किसी तीसरे देश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और वैश्विक संकट के समय भी अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनी रहेगी।

Topics: स्ट्रेट ऑफ होर्मुजहोर्मुज संकटHormuz Crisisपेट्रोल डीजल कीमतरूसी तेल बीमाभारत रूसी तेल आयातDGS रूसी इंश्योरेंसpetrol and diesel pricesRussian Oil InsuranceStrait of HormuzIndia's Russian Oil Importsभारत ऊर्जा सुरक्षाDGS Russian InsuranceIndia's energy security
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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