पश्चिम बंगाल चुनाव: क्या भाजपा स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाने की ओर है अग्रसर?
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पश्चिम बंगाल चुनाव: क्या भाजपा स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाने की ओर है अग्रसर?

2021 पश्चिम बंगाल चुनाव में 40% से कम मुस्लिम वाली 231 सीटों पर भाजपा-TMC के बीच 31 लाख वोटों का अंतर था। जानिए कैसे भाजपा 2026 में इन सीटों पर फोकस कर TMC को चुनौती दे सकती है और मुस्लिम मतदाताओं के रुझान क्या कहते हैं।

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by कुलदीप सिंह
Apr 22, 2026, 09:56 am IST
inविश्लेषण, पश्चिम बंगाल
भाजपा

भाजपा

पश्चिम बंगाल चुनाव: भाजपा और तृणमूल कांग्रेस पार्टी के बीच 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 5884710 मतों का अंतर था। मगर वैसी 231 सीट जिस पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 40% से कम है। उन पर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच मतों का अंतर लगभग 31 लाख का था। शेष बची 63 सीटों पर भी तृणमूल व भाजपा के बीच वोटों का अंतर लगभग 27 लाख था। अतएव भाजपा उन 231 सीटों पर अपना मत बढ़ाकर तृणमूल कांग्रेस को चुनावी पटखनी देना की स्थिति में दिख रही है। जबकि तृणमूल कांग्रेस पार्टी किसी भी तरह  से इन सीटों को अपने पाले में बनाये रखना चाहती है।

2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा इन 231 सीटों में महज 74 ही जीत सकी थी। जबकि इन 231 सीटों में 156 सीटें तृणमूल को मिली थी। इन 231 सीटों में 154 सीटों पर भाजपा दूसरे पायदान पर थी। भाजपा के साथ मिल कर चुनाव लड़ रही आजसू एक सीट पर दूसरे पायदान पर आयी थी। कांग्रेस पार्टी, आईएसएफ और माकपा भी एक-एक सीट पर दूसरे पायदान पर रही थी। वर्तमान विधानसभा चुनाव में भाजपा पिछली बार जीती हुई 77 सीटों को बनाये रखने के साथ ही दूसरे पायदान वाली अपनी 154 सीटों में से कम से कम 71 सीटें जीतकर 148 सीटों के आंकड़े तक पहुंच सकती है।

राजनीतिक परिस्थितियों के कारण मुस्लिमों की ओर झुकी टीएमसी

तृणमूल कांग्रेस पार्टी के प्रति पश्चिम बंगाल में मुस्लिम मतदाताओं का रुझान तृणमूल राजनीतिक परिस्थतियों के कारण है। इस राज्य में भाजपा जैसे-जैसे मजबूत होते गयी। वैसे-वैसे मुस्लिम मतदाता तृणमूल कांग्रेस की तरफ अपना समर्थन बढ़ाते गये हैं। सर्वेक्षणों के मुताबिक, जहां 2016 के विधानसभा चुनाव में 51% मुस्लिम मतदाताओं ने तृणमूल के लिए मतदान किया था। वहीं 2021 में भाजपा के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए 75% मुस्लिम मतदाताओं ने तृणमूल का साथ दिया। 2024 में तृणमूल को और भी अधिक मुस्लिम मत मिले। इसका एक बड़ा कारण कांग्रेस और वाम दलों का लगभग सफाया हो जाना था। ये चुनावी जंग के मैदान में कहीं दिख नहीं रहे थे और अंतत: मुस्लिम वोटरों ने भाजपा के खिलाफ तृणमूल को ही सबसे मजबूत स्तंभ माना। सेंटर ऑफ स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज के अनुसार, इस चुनाव में तो 84% तक मुस्लिम मतदाताओं ने तृणमूल के लिए मतदान किया।

अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ रही है टीएमसी को

मगर वर्तमान चुनावों में तृणमूल को मुस्लिम मतों को अपने साथ रखने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। उत्तर बंगाल की मुस्लिम बहुल 49 सीटों पर कांग्रेस भी गंभीरता के साथ चुनाव लड़ रही है। इस कारण तृणमूल इस इलाके में 2021 जैसे आश्वस्त नहीं है। भाजपा को कुछ मुस्लिम बहुल सीटों पर कांग्रेस के मजबूती से चुनाव लड़ने के कारण तृणमूल कांग्रेस के साथ मुस्लिम मतों के विभाजन का लाभ उसको मिल भी सकता है। वह ऐसी मुस्लिम मतदाता बहुल कुछ सीटें जीत भी सकती है।

भाजपा 2021 में 40 प्रतिशत से कम मुस्लिम मतदाता वाले 74 सीट ही जीत सकी थी। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सैकड़ों हिंदू बहुल सीटों पर भी हार गयी। क्योंकि इन सीटों पर हिंदू मतदाताओं को उसके जीतने की उम्मीद कम थी या थी ही नहीं। चुनावी राजनीति की समझ रखने वालों की मानें तो 2021 के विधानसभा चुनाव में 77 सीटों पर भाजपा की जीत और नंदीग्राम में भाजपा उम्मीदवार के हाथों राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हार जैसा परिणाम आने से हिंदू बहुल सीटों पर भी मतदाताओं में भाजपा के प्रति विश्वास बढ़ा है।

इससे ऐसी सीटों पर भाजपा की दावेदारी स्वत: ही मजबूत हो गई है। इसीलिए 40% से कम मुस्लिम मतदाताओं वाली जिन 155 सीटों पर भाजपा पिछली बार दूसरे पायदान पर थी, उनमें अधिक से अधिक सीटों पर भाजपा जीतने की कगार पर है। भाजपा अपने पूर्व के सीटों को बनाये रखने के साथ ही इन सीटों को जीतकर स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाने की ओर अग्रसर है।

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अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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