बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 : ममता बनर्जी का पश्चिम बंगाल में आधार वोट मुस्लिम मतदाताओं को ही माना जाता है। इसके बावजूद भी ममता बनर्जी की सर्वाधिक चिंता मुस्लिम मतदाताओं के कारण ही है। ममता बनर्जी इस बार 2021 के विधानसभा और 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों की तरह मुस्लिम मतदाताओं को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। इसके कई कारण हैं। पहला कि उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल के मुस्लिम मतदाता वर्ग के राजनीतिक चरित्र और मतदान शैली में असमानता है। उत्तर बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर जिले के मुस्लिम मतदाओं का मतदान उत्तर और दक्षिण 24 परगना, कोलकाता, हावड़ा और नादिया जिलों के मुस्लिम वर्ग से बिल्कुल ही अलग है।
ममता की परेशानी का कारण
ममता बनर्जी को नादिया, हावड़ा, कोलकाता, उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों के मुस्लिम मतदाताओं पर ज्यादा विश्वास है। बनिस्पत कि मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर के मुस्लिम मतदातओं की अपेक्षा। उत्तर बंगाल के इन जिलों के मुस्लिम मतदाताओं का कांग्रेस पार्टी की ओर ज्यादा रुझान रहा है। यद्यपि 2021 के विधानभा और 2024 के लोकसभा के चुनावों में इस इलाके के मुस्लिम मतदातओं ने भी तृणमूल कांग्रेस को बड़े पैमाने पर मतदान किया था। मगर ममता बनर्जी को लगता है कि उत्तर बंगाल के मुस्लिम मतदाताओं ने इन दोनों चुनावों में उनके समर्थन में कम, बल्कि भाजपा के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस के मुख्य प्रतिद्वंदी होने के कारण मतदान किया था। उन्हें इस तथ्य का भान है कि अगर कांग्रेस पार्टी मजबूत होती तो इस इलाके का मुस्लिम वर्ग उनके पार्टी के लिए नहीं, बल्कि कांग्रेस के लिए मतदान करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाएंगे।
कांग्रेस ने बढ़ाई ममता की सिरदर्दी
कांग्रेस पार्टी को ममता बनर्जी के द्वारा दिए गए जख्मों जैसे सागरदिघी उपचुनाव में निर्वाचित बायरन विश्वास को तृणमूल कांग्रेस पार्टी में शामिल करना और दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के बदले आप को समर्थन देना है। ममता बनर्जी को इस चुनाव में उत्तर बंगाल के तीन जिलों और मुर्शिदाबाद जिले सहित कुल 49 सीटों पर ममता बनर्जी को मुस्लिम मतदाताओं के लिए परेशानी कांग्रेस पार्टी ने बढ़ा दी है। इसके अलावा राहुल गाँधी को ममता बनर्जी का कद भी राजनीति में सीमित करना है, क्योंकि अगर ममता बनर्जी विधानसभा चुनाव में 2021 की तरह ही इस बार भी प्रदर्शन करती हैं तो राष्ट्रीय फलक पर उनके कद के आगे राहुल गांधी का कद बौना हो जाएगा।
अतएव गांधी परिवार का पूरा प्रयास है कि ममता बनर्जी को किसी भी प्रकार से रोका जा सके। इसके लिए कांग्रेस पार्टी ने अधीर रंजन चौधरी को मैदान में उतार कर अपने कुनबे को मजबूत कर दिया है। साथ ही कांग्रेस पार्टी ने मौसम नूर को अपने पार्टी में वापस शामिल करवा लिया है। मौसम नूर 2019 में कांग्रेस पार्टी को छोड़कर तृणमूल कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गई थीं और इसका लाभ भी पार्टी को मिला था।
मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में पैठ बनाने की कोशिश में कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी उत्तर बंगाल के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में अपने मजबूत प्रदर्शन की बदौलत 2014 के लोकसभा चुनाव में 28 विधासभा की सीटों पर बढ़त बनाते हुए चार सीटों पर जीत दर्ज़ करने में सफलता प्राप्त करने के साथ ही 2016 में 44 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज़ करके मुख्य विपक्षी पार्टी बनी थी। मगर मौसम नूर के पार्टी छोड़ने के बाद, वही कांग्रेस पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ दो सीटों पर सिमट गई थी। साथ ही महज 9 सीटों पर प्रथम पायदान पर रही थी। 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी शून्य सीटों पर सिमट गई थी। इसके अलावा ममता बनर्जी 2023 में मुर्शिदाबाद जिले की सागरदिघी विधानसभा सीट के परिणाम और मौसम नूर के पार्टी छोड़कर कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के कारण भी परेशानी में हैं।

















