पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। आमतौर पर मौन रहने वाले हिंदू मतदाता मुखर दिख रहे हैं। राज्य में बांग्लादेशी मुसलमानों की घुसपैठ, जनसांख्यिकी परिवर्तन, मुस्लिम तुष्टीकरण जैसे मामलों ने हिंदुओं को उद्वेलित कर रखा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के अन्य नेता भी घुसपैठ और तुष्टीकरण पर बेबाक बोल रहे हैं। इससे आम हिंदू मतदाताओं में सरकार बदलने की वैसी ही छटपटाहट दिख रही है, जैसी 2011 में दिखी थी।
उस समय मुख्य रूप से हिंदुओं ने ही तुष्टीकरण और घुसपैठ को लेकर वाममोर्चा सरकार को हरा कर ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री बनाया था। ममता उस समय घुसपैठ का विरोध करती थीं।
सत्ता में आने के बाद वे बदल गईं और अब घुसपैठियों के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहती हैं। यही वजह है कि आम हिंदू तृणमूल कांग्रेस के विरुद्ध लामबंद हो रहे हैं।
यह लामबंदी कैसी है, ममता सरकार ने घुसपैठियों की मदद कैसे की, भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के जरिए जमा किया गया पैसा कहां तक और किन-किन तक जाता है, इन सब पर पाञ्चजन्य के गत अंक में कई शोधपरक लेख और रिपोर्ट प्रकाशित हुए हैं। इस अंक में भी कुछ ऐसे ही लेख दिए जा रहे हैं।

















