पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष, ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार भारत न केवल इन चुनौतियों का सामना कर रहा है, बल्कि दुनिया के लिए एक भरोसेमंद विकास इंजन बनकर उभर रहा है।
भारत की आर्थिक वृद्धि तेज- आईएमएफ के मुताबिक, 2025 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रही, जो काफी प्रभावशाली है। यह दिखाता है कि वैश्विक संकटों के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है। आगे भी यह रफ्तार बनी रहने की उम्मीद है। 2026 में विकास दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो स्थिर और संतुलित विकास की ओर इशारा करता है। भारत की मजबूती के पीछे सबसे बड़ा कारण है मजबूत घरेलू मांग। देश में मध्यम वर्ग तेजी से बढ़ रहा है, शहरों का विस्तार हो रहा है और लोगों की खरीदने की क्षमता भी बढ़ रही है। इसके अलावा, सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे में निवेश और स्थिर नीतियों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। निजी कंपनियों की भागीदारी और नए-नए नवाचार भी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहे हैं।
महंगाई और वैश्विक अवसर- हालांकि कुछ चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चिंता महंगाई है। अनुमान है कि 2026 में महंगाई दर 4.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसका मुख्य कारण बढ़ती ऊर्जा कीमतें और खाद्य वस्तुओं की महंगाई है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से परिवहन और उत्पादन महंगा हो जाता है, जिससे आम चीजों की कीमतें भी बढ़ती हैं। भारत की एक बड़ी कमजोरी उसकी ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भरता है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा बाहर से आने वाले तेल पर निर्भर करता है। ऐसे में अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है, तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई, चालू खाते का घाटा और सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। इसके बावजूद कुछ अच्छे संकेत भी हैं। अमेरिका के साथ बेहतर होते व्यापारिक संबंध भारत के लिए अवसर लेकर आए हैं। इससे निर्यात और निवेश बढ़ने की उम्मीद है।

















