लखनऊ । एटीएस ने वर्ष 2021 के जुलाई माह में लखनऊ के काकोरी और मड़ियांव इलाके से अल कायदा से जुड़े दो आतंकियों मिन्हाज अहमद और मुशीरउद्दीन को गिरफ्तार किया था। दोनों आतंकियों के कब्जे से दो प्रेशर कुकर बम बरामद हुए थे। दोनों आतंकी कश्मीर के एक हैंडलर के संपर्क में थे। आतंकी मुशीरउद्दीन, एक ई-रिक्शा में बम प्लांट करने का षड्यंत्र रच रहा था। एटीएस ने बाद में इस मामले में जुड़े आतंकी तौहीद को कानपुर से गिरफ्तार किया था। आतंकी संगठन अल कायदा से जुड़े आतंकी मुसीरुद्दीन उर्फ राजू, मिनहाज अहमद और तौहीद अहमद शाह को न्यायालय ने यूएपीए, विस्फोटक पदार्थ कानून और आर्म्स एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में दोषी पाया है। न्यायालय ने इन तीनों आतंकियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
पूछताछ में सामने आए आतंकी नेटवर्क के संबंध
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 के जुलाई माह में यूपी एटीएस ने मुशीरुद्दीन और मिनहाज को गिरफ्तार किया था। यूपी एटीएस की पूछताछ में यह सामने आया था कि ये दोनों अल कायदा से जुड़े हुए थे। अल कायदा से जुड़ने के बाद ये दोनों लखनऊ में मुस्लिम युवाओं को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसा रहे थे।
स्वतंत्रता दिवस से पहले बड़े हमले की साजिश
विवेचना में पाया गया था कि अभियुक्तों ने वर्ष 2021 के स्वतंत्रता दिवस के ठीक पहले उत्तर प्रदेश के कई शहरों में बड़े आतंकी हमलों का षड्यंत्र रचा था। एनआईए ने अपनी विवेचना में पाया था कि मिनहाज को तौहीद और आदिल नबी उर्फ मूसा ने आतंकी गतिविधियों में शामिल किया था। ये तीनों मिलकर अन्य युवाओं की भर्ती कर रहे थे और आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे। इसी कड़ी में मुशीरुद्दीन को भी शामिल किया गया था। मुशीरुद्दीन ने आतंकी संगठन के लिए निष्ठा की शपथ भी ली थी। इसके पश्चात उसको हथियार और विस्फोटक सामग्री दी गई थी।
स्थानीय सहयोगियों और अन्य संगठनों से जुड़े तार
लखनऊ के शकील, मुस्तकीम और मोइद ने भी मुशीरुद्दीन की मदद की थी। आदिल नबी उर्फ मूसा टीआरएफ से जुड़ा घोषित आतंकी था। टीआरएफ को लश्कर ए तैयबा का हिस्सा माना जाता है।











