खाड़ी युद्ध के बीच अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में चल रही बातचीत अभी के लिए रुक गई है। दोनों पक्षों दोनों तरफ अभी भी कुछ मतभेद बाकी हैं। ईरान की सरकार ने रविवार सुबह बताया कि 14 घंटे से ज्यादा चली मीटिंग खत्म हो गई है। लेकिन, दोनों पक्षों के बीच आज भी बातचीत जारी रहेगी।
इस्लामाबाद में हुई ये बातचीत पिछले दस साल में अमेरिका-ईरान की पहली डायरेक्ट मीटिंग थी और 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे ऊंचे स्तर की चर्चा है। पाकिस्तान इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, लेकिन हकीकत ये है कि इसमें उसकी काफी फजीहत हो रही है।
क्या है इस बातचीत का मकसद
बातचीत का मकसद छह हफ्ते के युद्ध को खत्म करना है। ये युद्ध 28 फरवरी को इजरायल के हमलों से शुरू हुआ था, जिसमें अमेरिका भी शामिल हो गया। युद्ध में हजारों लोग मारे गए और दुनिया भर में तेल की कीमतें बहुत बढ़ गईं। अभी दो हफ्ते का नाजुक सीजफायर चल रहा है। ईरानी डेलिगेशन शुक्रवार को काले कपड़ों में आया। वो अपने दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और युद्ध में मारे गए दूसरों के लिए शोक मना रहे थे। उन्होंने एक स्कूल पर अमेरिकी बमबारी में मारे गए छात्रों के जूते और बैग भी साथ लाए थे। पेंटागन ने कहा है कि उस हमले की जांच चल रही है, लेकिन रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिका की जिम्मेदारी ज्यादा लगती है।
होर्मुज स्ट्रेट रहा बड़ा मुद्दा
इस बातचीत का बड़ा केंद्र होर्मुज स्ट्रेट है। ये समुद्री रास्ता दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल सप्लाई के लिए बहुत जरूरी है। ईरान ने युद्ध शुरू होने से इसे ब्लॉक कर रखा है। अमेरिकी मिलिट्री ने कहा कि वो स्ट्रेट साफ करने की तैयारी कर रही है। दो अमेरिकी युद्धपोत वहां से गुजरे हैं और माइन्स हटाने की प्रक्रिया शुरू हो रही है। लेकिन, ईरानी स्टेट मीडिया ने इनकार किया कि कोई अमेरिकी जहाज गुजरा हो। ईरान स्ट्रेट पर अपना कंट्रोल चाहता है और ट्रांजिट फीस लेना चाहता है। अमेरिका चाहता है कि ग्लोबल शिपिंग के लिए रास्ता पूरी तरह खुला हो।
ईरान की कुछ और मांगें हैं—लेबनान में सीजफायर, युद्ध के मुआवजे और विदेशी बैंकों में उसके फ्रोजन एसेट्स रिलीज करना। मीटिंग से पहले एक ईरानी सूत्र ने कहा था कि अमेरिका ने कतर और दूसरे बैंकों में फंसे पैसे छोड़ने पर हामी भरी है, लेकिन अमेरिकी अधिकारी ने इसे इनकार कर दिया।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम रोकना चाहता है अमेरिका
अमेरिका का फोकस ईरान के न्यूक्लियर एनरिचमेंट प्रोग्राम को कमजोर करने पर भी है, ताकि वो परमाणु बम न बना सके। इजराइल, जो युद्ध में अमेरिका का साथी था, लेबनान में हिजबुल्लाह पर हमले जारी रखे हुए है और कहता है कि ये ईरान-अमेरिका सीजफायर का हिस्सा नहीं है।

















