लखनऊ । । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि वर्ष 1947 से लेकर अभी तक संभल में 209 हिंदुओं की जान दंगों में गई। संभल में पलायन करने वाले जिन परिवारों के पास दस्तावेज है, उनको संभल में बसाया जायेगा।
1978 के दंगे और आगजनी की घटनाएं
29 मार्च 1978 को दंगे के दौरान आगजनी की घटनाएं हुई थीं। इस घटना में कई हिंदू मारे गए। जान बचाने के लिए 40 रस्तोगी परिवारों को घर छोड़कर भागना पड़ा था। मंदिर में पूजा पाठ भी बंद हो गया था। संभल 1978 के दंगे में हिंदुओं को अपने मकान बेचकर पलायन करना पड़ा था। इस दंगे में कई परिवार उजड़ गए थे।
रामशरण रस्तोगी परिवार की दर्दनाक कहानी
उन्हीं पीड़ितों में से एक व्यापारी रामशरण रस्तोगी का परिवार था। रस्तोगी परिवार कोटपूर्वी मोहल्ले में रहता था। उस मोहल्ले में रस्तोगी परिवार का घर था और नक्खास तिराहे पर रामशरण रस्तोगी की जनरल मर्चेंट की दुकान थी। 29 मार्च 1978 को दंगों के दौरान हिंसक भीड़ ने राम शरण रस्तोगी की दुकान में लूटपाट करने के बाद दुकान में आग लगा दिया और राम शरण की हत्या करके उनका शव कुएं में फेंक दिया।
परिवार का पलायन और जनहानि
इनके परिवार में जनहानि हुई और फिर पलायन भी करना पड़ा। अब उनके पोते कपिल रस्तोगी ने संभल में फिर से बसने की मांग की है। वर्तमान समय में कपिल रस्तोगी दिल्ली के उत्तम नगर में रह रहे हैं। कपिल का कहना है कि दंगे में तीन दिन बाद इनके दादा का शव बरामद हुआ तो चाकुओं के कई घाव और पैरों पर कुल्हाड़ी के निशान थे। इस घटना के बाद परिवार को संभल छोड़कर हटना पड़ा।
पुनर्वास की मांग और प्रशासन का आश्वासन
कपिल का कहना है जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर पुनर्वास की मांग की है। जिलाधिकारी ने दंगा पीड़ितों को संभल में बसने के लिए जमीन आवंटित करने का आश्वासन दिया है।











