नई दिल्ली: भले ही अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम हो गया है लेकिन दोनों देशों की बातचीत आगे बढ़ेगी इसे लेकर पूरी तरह से संशय बना हुआ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर ईरान युद्धविराम पर असली समझौता नहीं करता है तो उसके खिलाफ संघर्ष और अधिक तेज होगा। ‘अल जजीरा’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि सीजफायर पर असली समझौता पूरी तरह से लागू नहीं होने पर यह युद्ध और अधिक तेज होगा। दरअसल, अभी दोनों देशों के बीच युद्धविराम कुछ दिनों तक है और दोनों एक-दूसरे की सभी शर्तों को मानने को तैयार नहीं हैं।
ट्रंप बोले- स्थायी युद्धविराम तक ईरान के आसपास ही तैनात रहेंगे अमेरिकी विमान
रिपोर्ट कहती है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि सभी अमेरिकी विमान और सैन्य कर्मी युद्धविराम के असली समझौते के पूरी तरह से लागू होने तक ईरान के आसपास ही रहेंगे। अमेरिका ने ईरान को 15 सूत्रीय योजना दी है और ईरान ने अमेरिका को दस सूत्रीय योजना। अभी इस युद्धविराम योजना को लेकर भी अस्पष्टता बनी हुई है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल से लेबनान में भी युद्ध रोकने की बात कही थी। लेकिन इजरायल ने साफ कर दिया था कि वो हिजबुल्लाह के खिलाफ जमीनी और हवाई हमले जारी रखेगा। इसके बाद इजरायल ने हिजबुल्लाह चीफ के भतीजे को भी हमलों में मार गिराया। दरअसल न ही अमेरिका और न ही इजरायल पाकिस्तान को भरोसेमंद मानता है।
भारत में इजरायल के राजदूत रियुवेन अजार का भी कहना है कि हम पाकिस्तान को विश्वसनीय तौर पर नहीं देखते हैं। अमेरिका ने अपने ही कारणों के कारण पाकिस्तान की मध्यस्थता स्वीकार की है। यह बात सच है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ट्रंप की चमचागिरी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं। यही कारण हो सकता है कि ट्रंप ने मध्यस्थता के लिए उनपर भरोसा जताया हो।
लेबनान में इजरायली हमले मे एक दिन में ही 200 की मौत
लेबनान में इजरायली हमले में एक दिन में ही 200 की मौत हो गई है। जिसके बाद वहां एक दिन का राष्ट्रीय शोक की घोषणा किया गया है। सीजफायर के बाद भी इजरायल ने हिजबुल्लाह पर भीषण हमले किए जिनमें एक हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं। इससे पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम समझौते में लेबनान को शामिल नहीं किया गया था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा था कि हमने कभी ऐसा कोई वादा नहीं किया था। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि लेबनान के मुद्दे पर अमेरिकी-ईरान के नियम साफ हैं। उन्होंने कहा है कि वॉशिंगटन को युद्धविराम या इजरायल के जरिए जारी युद्ध में से किसी एक को चुनना होगा। दोनों चीजें एक साथ नहीं मिल सकतीं।
ईरान पर है लेबनान की रक्षा का दबाव….इसलिए विफल भी हो सकती है वार्ता
अल जजीरा की एक रिपोर्ट कहती है कि ईरान पर लेबनान की रक्षा करने का भारी दबाव है। इजरायल लेबनान में हमले किये जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान में होने वाली वार्ता विफल भी हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब अस्थायी समझौते के बाद भी इजरायल लेबनान में भीषण हमले कर रहा है तो ऐसे में क्या गारंटी है कि स्थायी युद्धविराम के बाद इजरायल ईरान पर हमले नहीं करेगा?













