खालिस्तानी संकट: कनाडा को प्रवासी राजनीति तक समेटना अनुचित
June 13, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्व

खालिस्तानी संकट: कनाडा को प्रवासी राजनीति तक समेटना अनुचित

कनाडा के गुरुद्वारों और सिख संस्थाओं में खालिस्तानी तत्वों द्वारा कब्जे की कोशिश, धमकियां और असहमति को कुचलने की घटनाएं बढ़ रही हैं। बिल C-9 के पारित होने के बाद 5 अप्रैल को मंदिरों के बाहर विरोध प्रदर्शन ने खालिस्तानी सोच की असली तस्वीर उजागर की।

Written byराकेश सैनराकेश सैन — edited by कुलदीप सिंह
Apr 9, 2026, 12:55 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
Khalistani extremist insulted tricolor

प्रतीकात्मक तस्वीर

इसी पांच अप्रैल को कनाडा के ब्रैम्पटन व सरी में स्थित मन्दिरों के बाहर खालिस्तान समर्थकों ने प्रदर्शन किया। प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिक्खस फार जस्टिस के बैनर तले खालिस्तानी तत्वों ने कनाडा सरकार द्वारा हेट क्राइम एक्ट (सी-9) का विरोध किया। कनाडा के हाऊस आफ कामंस में इस अधिनियम को पारित किया जा चुका है और जल्द ही यह कानून की शक्ल लेने वाला है। इसके तहत धर्मस्थलों, स्कूलों, सामुदायिक केंद्रों के बाहर लोगों को भयभीत करने वाले प्रदर्शन रोकने, लोगों को भयभीत करने, उन्हें रोकने, नफरत फैलाने इत्यादि हरकतों को अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है। इण्डो-कैनेडियन संगठनों, हिन्दू संगठनों ने इसका स्वागत किया है और इसी के विरोध में खालिस्तानी तत्वों ने 5 अप्रैल को विरोध प्रदर्शन किया।

कट्टरवादियों का रंगा सियार सरीखा व्यवहार

कनाडा की सिख संस्थाओं के भीतर खालिस्तानी कट्टरवाद का फैलता खतरनाक जाल कनाडा के ओंटारियो में सिख परवासियों के भीतर उभरा हालिया टकराव कोई सामान्य सामुदायिक विवाद नहीं है। यह उस गहरी बीमारी का खुला प्रकटीकरण है, जिसने वर्षों से सिख समुदाय के नाम पर अपने ही लोगों के भीतर वैचारिक वर्चस्व कायम करने की कोशिश की है। जिन्होंने सिख पहचान, अधिकारों और न्याय की भाषा को अपना आवरण बनाया हुआ था, आज उनके चेहरों से पर्दा हटता दिखाई दे रहा है। दावा सेवा का है पर चाल कब्जे की है; नारा अधिकारों का पर उद्देश्य विरोधियों को भयभीत करने, दबाव डालने और उन्हें चुप कराने का है। कट्टरवादी तत्व सिख हितों के नाम पर रंगा सियार की भूमिका निभा रहे हैं।

इनका दावा कुछ और व उद्देश्य कुछ और है। इस टकराव में कुछ प्रभावशाली गिरोह एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। धमकियां, धार्मिक मंचों का राजनीतिक दुरुपयोग, असहमति को कुचलने का प्रयास और गुरुद्वारों में सवाल पूछने वालों को चुप कराने की कोशिशें—यह सबकुछ साबित करता है कि खालिस्तानी कट्टरवाद अब केवल बाहरी राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। यह अपने ही समुदाय के भीतर भय का वातावरण बनाकर संस्थाओं पर कब्जा करने की रणनीति में बदल चुका है।

इसे भी पढ़ें: असम में बदलती जनसांख्यिकीय और सामाजिक दुष्प्रभाव

खालिस्तान व सिख पहचान दो अलग विषय

यह समझने की आवश्यकता है कि सिख पहचान और खालिस्तानी कट्टरवाद दो अलग विषय है। खालिस्तानी कट्टरवाद की आलोचना को अक्सर अलगाववादी समर्थक तत्वों द्वारा सिखों की आलोचना के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन खालिस्तानी हिंसक सोच की आलोचना करना सिखों की आलोचना बिल्कुल नहीं है। दुनिया भर का सिख समाज इस हिंसक एजेंडे से न तो सहमत है और न ही उसका इससे कोई सामूहिक सरोकार है। सिख किसान हैं, सैनिक, उद्यमी, विद्वान और राष्ट्रनिर्माता हैं। लेकिन कुछ गिरोह सिख पहचान, सिख भावनाओं और 1984 की ऐतिहासिक पीड़ा का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए करते हैं। वे धर्म और भावनाओं को हथियार बनाते हैं, गुरुद्वारों को मंच बनाते हैं और समुदाय को अपनी वैचारिक धक्केशाही के अधीन लाने की कोशिश करते हैं। खालिस्तानी सोच से जुड़े ये तत्व धार्मिक संस्थाओं की आड़ लेकर अपने आपको वैध साबित करने की कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन सिख समुदाय के भीतर जवाबदेही से बचना भी चाहते हैं।

पंजाब ने कट्टरपंथियों की हरकतों की भारी कीमत चुकाई

इन रंगे सियारों से जो खतरा नजर आ रहा है, वह कोई कल्पना नहीं है। पंजाब का खूनी इतिहास इसकी सबसे बड़ी गवाही है। साऊथ एशिया टेररिज्म पोर्टल के अनुसार 1981 से 2000 तक पंजाब में आतंकवाद से जुड़ी 21,630 मौतें दर्ज हुईं। 11,782 आम लोग और 1,753 सुरक्षाकर्मी इस हिंसा का शिकार बने। सबसे बुरा दौर 1990 के दशक की शुरुआत में आया, जब वार्षिक मौतों का आंकड़ा 4,000 से ऊपर चला गया, 1991 में 5,265 के शिखर पर पहुंचा और 1992 में 3,883 रहा। ये आंकड़े केवल एक विद्रोह के उभार और पतन की कहानी नहीं बताते, बल्कि यह भी साबित करते हैं कि इस हिंसा का सबसे बड़ा नुकसान पंजाबियों ने स्वयं झेला।

वह ऐसा दौर था, जब आम पंजाबियों ने हत्याओं, जबरन वसूली, बम धमाकों, डराने-धमकाने और नागरिक जीवन की तबाही के जरिए कांग्रेस बनाम कट्टरपंथी राजनीति की कीमत चुकाई। इसलिए अलगाववादी बयानबाजी को साफ-सुथरा दिखाने की किसी भी कोशिश से पहले यह तथ्य मानना होगा कि उस दौर में हिंसा के सबसे बड़े शिकार चाहे हिंदू हों या सिख—वास्तव में पंजाबी ही थे। इसलिए आज जो लोग इसे ‘भावनात्मक राजनीति’ या ‘आत्मनिर्णय’ के नारे के रूप में पेश करते हैं, वे दरअसल ऐतिहासिक सच्चाई से मुंह मोड़ने की गुस्ताखी कर रहे हैं।

कनाडा में भी खालिस्तानी हिंसा के गंदे निशान

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और खासकर कनाडा में भी, इसका भयावह रिकॉर्ड मौजूद है। 23 जून 1985 को एयर इंडिया की कनिष्क फ्लाइट 182 को उड़ाने की खूनी साजिश, जिसमें 268 कनाडाई नागरिकों सहित 329 बेगुनाह लोग मारे गए, कनाडाई धरती से ही रची गई और अंजाम तक पहुंचाई गई। यह कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकवादी हमला था। यह तथ्य स्पष्ट करता है कि यह मसला केवल नारों, पोस्टरों या प्रतीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि खुली हिंसा में बदल सकता है। कनाडा में यह बहस तो बहुत पहले ही खत्म हो जानी चाहिए थी कि खालिस्तानी कट्टरवाद केवल एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन है; सच्चाई यह है कि इसने बड़े पैमाने पर खून-खराबे को जन्म दिया है।

कनाडा समझ रहा है इनकी असलियत

लेकिन अब कनाडा को भी इसकी समझ आ रही है। मार्च 2026 में कनाडाई संसद कंबेटिंग हेट एक्ट अर्थात बिल सी-9, पारित किया, जिसके तहत खालिस्तानी आतंकवादी संगठनों से जुड़े झंडों या प्रतीकों का प्रचार—यदि वे नफरत फैलाने के लिए इस्तेमाल किए जाएं—अपराध घोषित किया गया। इसी तरह 2025 और 2026 की शुरुआत में कनाडा की सरकार और सुरक्षा एजेंसी कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस ने अपनी रिपोर्टों में आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि कनाडा में खालिस्तानी गिरोह मौजूद हैं, जो भारत में हिंसा को प्रोत्साहित करने, फंडिंग करने और योजना बनाने के लिए कनाडा की धरती का न केवल इस्तेमाल कर रहे हैं, बल्कि ‘राजनीति से प्रेरित हिंसक अतिवाद’ में भी शामिल हैं और देश की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं।

खालिस्तानियों की स्थानीय मदद

हालिया रिपोर्टों और जांचों ने यह भी दिखाया है कि ये हिंसक और अलगाववादी तत्व कनाडाई संस्थाओं से जुडक़र काम कर रहे हैं। वे गैर-लाभकारी संस्थाओं और चैरिटी ढांचों का दुरुपयोग करके अपने एजेंडे के लिए पैसा इक_ा करते हैं। कनाडा के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंस की रिपोर्ट 2025 एसेसमेंट आफ मनीलॉंडरिंगस एण्ड टैरोरिस्ट फाइनेंसिंग रिस्कस कनाडा में स्पष्ट रूप से बब्बर खालसा इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन को ऐसी आतंकवादी संस्थाओं के रूप में दर्शाया गया है, जिन्हें कनाडा के भीतर से ही वित्तीय सहायता मिल रही है। इन इकाइयों को फंडिंग से जोड़ा जाना यह दर्शाता है कि मसला केवल भाषणों या नारों का नहीं, बल्कि संगठित रूप से चल रहे ढांचों का है।

गुरुद्वारों का दुरुपयोग

कनाडा के कुछ गुरुद्वारों में खालिस्तानी प्रचार और युवाओं को कट्टरवाद की ओर धकेलने के आरोप सामने आए हैं, हालांकि यह भी उतना ही सत्य है कि कनाडा के बहुत बड़े हिस्से के सिख इस विचारधारा का समर्थन नहीं करते। गुरुद्वारों में, जहां संगत को जोडऩे की बात होनी चाहिए थी, वहां डर और गुटबंदी का माहौल बनाया जा रहा है। जहां गुरु घर में नम्रता, सेवा और साझेदारी का संदेश होना चाहिए था, वहां वैचारिक गिरोहबंदी ने अपना डेरा जमा लिया है। यह केवल धार्मिक संस्थाओं के साथ ही नहीं, बल्कि संगत के विश्वास के साथ भी धोखा है।

खालिस्तानी गतिविधियों ने कनाडा की राजनीति में जिस तरह पहुंच बनाई है, आलोचक उसे ‘लॉंग-डिस्टेंस नेशनलिज्म’ कहते हैं—अर्थात विदेश में बैठकर किसी दूसरे देश की राजनीति, सुरक्षा और मनोविज्ञान पर असर डालने की कोशिश। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एक ओर कनाडा अपने देश में खालिस्तानी समर्थक गिरोहों की मौजूदगी को स्वीकार करता है, और दूसरी ओर इन्हीं धड़ों के दबाव में भारतीय एजेंसियों पर ऐसे आरोप लगाता है, जिनमें कनाडा में प्रो-खालिस्तान तत्वों के खिलाफ हत्याओं और जबरन वसूली जैसी गतिविधियों के आरोप शामिल हैं। यह दोहरा मापदंड भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता का विषय है।

भारत-कनाडा संबंधों पर पश्चिमी जगत की गलत दृष्टि

अफसोस कि पश्चिमी दुनिया के कई हिस्से इस मसले को लंबे समय तक केवल भारत-कनाडा कूटनीतिक तनाव के रूप में ही देखते रहे हैं। भारत की कानूनी प्रतिक्रिया भी इसी खतरे की पहचान पर आधारित है। सिक्खस फार जस्टिस पर प्रतिबंध, बब्बर खालसा से जुड़े मॉड्यूलों पर कार्रवाई, सीमा पार हथियार तस्करी और ड्रोन नेटवर्क का पर्दाफाश—यह सब कुछ एक ही बात की ओर इशारा करता है कि आज का खतरा 1980 के दशक की याद भर नहीं, बल्कि मौजूदा सुरक्षा वास्तविकता है। भारत को आपत्ति धार्मिक वकालत से नहीं, बल्कि उन गतिविधियों से है, जो भारत की प्रभुसत्ता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा के लिए हानिकारक मानी जाती हैं। कानूनी भाषा के दायरे पर अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन मुख्य बिंदु नहीं बदलता। भारत एक ऐसी अलगाववादी व्यवस्था का जवाब दे रहा है, जिससे बार-बार उकसावे, अस्थिरता और हिंसा के समर्थन का संबंध रहा है।

हालात होने लगे हैं गंभीर

अब हालात और भी गंभीर हो गए हैं। आईएसआई-प्रायोजित तत्व और खालिस्तानी हिंसक नेटवर्क सिर्फ वैचारिक जहर ही नहीं फैला रहे, बल्कि एक बार फिर जमीनी हमलों तक उतर आए हैं। बीते दिनों चंडीगढ़ स्थित पंजाब भाजपा दफ्तर पर ग्रेनेड हमला किया गया। ये हमले सिर्फ इमारतों पर नहीं होते—ये राज्य की अथॉरिटी, लोकतांत्रिक ढांचे और जन-मानस के विश्वास पर हमले होते हैं। राजनीतिक दफ्तर पर ग्रेनेड फेंकना लोकतंत्र को डराने की कोशिश है। इसी तरह पिछले महीने एक सीमावर्ती पुलिस चौकी को निशाना बनाते हुए एक ए.एस.आई. सहित एक पुलिसकर्मी को गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। सुरक्षित पुलिस खुफिया मुख्यालय, पुलिस थानों और चौकियों पर हमले सुरक्षा तंत्र को चुनौती हैं। ऐसी वारदातें इस बात को पुष्ट करती हैं कि सीमा पार से चलाया जा रहा नशे, हथियारों, ड्रोन, ग्रेनेड और प्रचार का जाल पंजाब की धरती को फिर से अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। अब इसे केवल ‘फ्रिंज एक्टिविटी’ कहकर टाला नहीं जा सकता। जब यह सब कुछ उसी समय हो रहा हो, जब विदेशी धरती पर बैठे कुछ कट्टर गिरोह गुरुद्वारों, सामुदायिक संस्थाओं और प्रवासी सिख समुदाय के भीतर प्रभाव के लिए लड़ रहे हों, तो तस्वीर और भी स्पष्ट हो जाती है—यह केवल विचारधारा नहीं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़ा हुआ नेटवर्क है।

कनाडा की धरती केवल प्रवासी राजनीति का केंद्र नहीं रही

कनाडा में उभरा यह विवाद विशेष ध्यान मांगता है और यह संकेत देता है कि कनाडा की धरती अब केवल प्रवासी राजनीति का केंद्र नहीं रही, बल्कि एक ऐसा मंच बनती जा रही है, जहां कुछ अलगाववादी गिरोह प्रचार, फंडिंग और योजना बना रहे हैं। जब डायस्पोरा के भीतर से ही डराने-धमकाने, संस्थाओं के दुरुपयोग और असहमति के खिलाफ कार्रवाई के आरोप सामने आ रहे हों, तो यह मुद्दा किसी एक धड़े या एक घटना से कहीं बड़ा हो जाता है। कनाडा में धड़ों का एक-दूसरे से भिडऩा केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक बड़े और गहरे खतरे का संकेत है।

मामले को गंभीरता से लेना होगा

इस मामले में दो बातें बहुत जरूरी हैं। पहली—सिख समुदाय को शक के घेरे में लाना गलत होगा। दूसरी—खालिस्तानी हिंसक कट्टरवाद को छोटा मसला समझकर छोड़ देना और भी बड़ी गलती साबित होगी। क्योंकि जहां समाज चुप रहता है, वहां कट्टरपंथी अपनी जड़ें और गहरी कर लेते हैं। असल सवाल यह नहीं कि कितने लोग नारे लगाते हैं। असल सवाल यह है कि क्या लोकतांत्रिक समाज ऐसी हिंसक राजनीति को धर्म, पहचान और अधिकारों की भाषा की ढाल के नीचे आगे बढऩे देंगे? क्या गुरुद्वारे सामुदायिक केंद्र बने रहेंगे या गुटबंदी के अड्डे बनने दिए जाएंगे? क्या कनाडा की धरती आजादी का मंच रहेगी या भारत-विरोधी हिंसा की पिछली पंक्ति? क्या पंजाब को फिर से खून और बारूद की छाया में धकेलने की कोशिशों को केवल ‘प्रवासी राजनीति’ कहकर टाल दिया जाएगा?

चुप रहना इस समस्या का हल नहीं है। जब अलगाववाद धार्मिक संस्थाओं की ढाल ले लेता है, विदेशी सहायता से मजबूत होता है और समुदाय के भीतर ही डर का माहौल बनाता है, तो चुप्पी एक तरह की इजाजत बन जाती है। कनाडा सरकार के रवैये में आया परिवर्तन जहां सराहनीय तो है परंतु अभी इस दिशा में बहुत कुछ किया जाना जरूरी है, ताकि भारत विरोधी कोई भी शक्ति अपने उद्देश्य के लिए वहां की धरती का इस्तेमाल न कर पाए।

Topics: कनाडा हेट क्राइम एक्टखालिस्तानी कट्टरवादKhalistani Protests in CanadaKhalistanBrampton Mandir Protestखालिस्तानHindu Temples in CanadaSikhs for JusticeCanada Hate Crime ActKhalistani extremismखालिस्तानी प्रदर्शन कनाडाब्रैम्पटन सरी मंदिर प्रदर्शनसिक्खस फॉर जस्टिसहिंदू मंदिर कनाडा
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Karnataka news, Karnataka Crime, Crime in Karnataka, Mysuru news, Father murder son, Father killed son, Murder over mobile

अमृतसर थाने पर हमला : खालिस्तान लिब्रेशन आर्मी के तीन आतंकी पकड़े गए

Khalistan Refferendom Otawa Canada

कनाडा के ओटावा में खालिस्तानी ‘जनमत संग्रह’: तिरंगे का अपमान, भारतीय नेताओं को घेरो-मारो के हिंसक नारे

'रेफरेंडम' का पोस्टर

क्या खालिस्तानियों के आगे फिर बिछ गई Canada सरकार! Pannu ने ‘Referendum’ की इजाजत के लिए किया PM Carney का शुक्रिया

बिश्नोई (बाएं) गैंग पर आरोप था कि उसने खालिस्तानी आतंकी 'निज्जर (दाएं) की हत्या की योजना' बनाई थी

बिश्नोई गैंग पर रोक, तो खालिस्तानियों पर क्यों नहीं? क्या खालिस्तानियों के कहने पर Canada ने लगाई ‘बिश्नोई’ पर पाबंदी?

पंजाब में ट्रेन पर लिखें जहरीले खालिस्तानी नारे, गुरपतवंत पन्नू ने ली जिम्मेदारी

कनाडा में कई बार भारत विरोधी खालिस्तानी रैलियां और भाषण हुए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में खटास आई है (File Photo)

खालिस्तानी कंवलजीत को Canada में ‘शरण’ नहीं, बड़ा फैसला ​लेते हुए अदालत ने Pannu से जुड़े होने पर खारिज की अर्जी

Load More

ताज़ा समाचार

RSS Sangh Shiksha Varg Haridwar Lt Gen Ajay Kumar Singh Dr Shailendra BHEL

हरिद्वार: संघ शिक्षा वर्ग संपन्न, ले. जनरल अजय कुमार सिंह बोले- “अंदर बैठे राष्ट्रद्रोहियों से भी रहना होगा सावधान”

RSS Vikas Varg Munger Concludes Sah Sarkaryavah Alok Kumar

मुंगेर: संघ कार्यकर्ता विकास वर्ग का भव्य समापन, आलोक कुमार जी बोले- “हिन्दुत्व का चिंतन ही विश्व शांति का आधार”

14 जून का पंचांग

14 जून का पंचांग: जानिए कल की तिथि, नक्षत्र, शुभ-अशुभ योग और ग्रहों की चाल

VHP Jodhpur Milind Parande Pakistani Hindu Migrants Self Employment Sanskarshala 4

जोधपुर: VHP ने विस्थापित परिवारों को दी स्वरोजगार की सौगात, बच्चों के लिए शुरू होंगी 15 संस्कारशालाएं

cm yogi adityanath

अखिलेश, अपने लोगों को संस्कारित करें, न कर पायें तो हमारे हवाले करे दें : सीएम योगी

गोष्ठी को संबोधित करते हुए श्री अतुल लिमये

‘सज्जनों की सक्रियता से मिलती है समाज को दिशा’

Shooter Jaspal Rana Passed Away Dronacharya Awardee RSS Condolence

खेल जगत को अपूरणीय क्षति: जसपाल राणा के निधन पर संघ ने जताया गहरा शोक, कहा- ‘उन्होंने भारत का गौरव बढ़ाया’

Vijnana Bharati National Session Varanasi: BHU में विज्ञान भारती अधिवेशन का शुभारंभ, CM योगी ने बताया शोध का असली ध्येय

विधायक को इस्लाम से बाहर करने की धमकी

Explainer: क्या है भारत का ‘प्रोजेक्ट कुशा’? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्यों की गोवर्धन पर्वत से इसकी तुलना?

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies