खालिस्तानी कंवलजीत को Canada में 'शरण' नहीं, बड़ा फैसला ​लेते हुए अदालत ने Pannu से जुड़े होने पर खारिज की अर्जी
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खालिस्तानी कंवलजीत को Canada में ‘शरण’ नहीं, बड़ा फैसला ​लेते हुए अदालत ने Pannu से जुड़े होने पर खारिज की अर्जी

पंजाब निवासी 39 साल की कंवलजीत कौर फरवरी 2018 में कनाडा पहुंची थी। सितंबर 2019 में उसने वहां स्थायी रूप से शरण पाने की अपील दाखिल की थी जिसमें उसने खुद को खालिस्तान से जुड़ा बताया था

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Sep 8, 2025, 03:17 pm IST
inविश्व, विश्लेषण
कनाडा में कई बार भारत विरोधी खालिस्तानी रैलियां और भाषण हुए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में खटास आई है (File Photo)

कनाडा में कई बार भारत विरोधी खालिस्तानी रैलियां और भाषण हुए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में खटास आई है (File Photo)

कनाडा की फेडरल कोर्ट द्वारा भारतीय नागरिक कंवलजीत कौर की शरण की अपील को खारिज कर दिया गया है। उस देश में जहां खालिस्तानियों के विरुद्ध कदम उठाने से परहेज किया जाता था अब भारत विरोधी तत्वों पर लगाम कसी जाती दिखाई ​दे रही है। बात कंवलजीत कौर से कहीं आगे बढ़कर है, और वह यह है कि खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू उनके जैसे न जाने कितने सिख अनुयायियों को अपने खालिस्तानी सपने दिखाकर पथभ्रष्ट कर चुका है और उनके भारत के प्रति नफरत भर चुका है। लेकिन अब अगर अदालत का रुख ऐसा ही कड़ा रहा तो शायद उस देश में खालिस्तानियों के कारनामों पर आगे रोक लग जाए। इससे भारत-कनाडा संबंधों में और प्रगाढ़ता ही आएगी।

दरअसल, पंजाब निवासी 39 साल की कंवलजीत कौर फरवरी 2018 में कनाडा पहुंची थी। सितंबर 2019 में उसने वहां स्थायी रूप से शरण पाने की अपील दाखिल की थी। अपील में उसने लिखा था कि अगर वह भारत लौटी तो उसे अपने पति से उत्पीड़न का सामना करना पड़ेगा क्योंकि वह खालिस्तान आंदोलन की समर्थक बन चुकी है और प्रतिबंधित संगठन “सिख्स फॉर जस्टिस” से जुड़ी है। यह उग्र खालिस्तानी संगठन भारत सरकार द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित किया जा चुका है। इसे गुरपतवंत सिंह पन्नू संचालित करता है।

कनाडा के कई गुरुद्वारों को खालिस्तानी तत्वों ने अपने प्रचार का अड्डा बना रखा है। (File Photo)

कनाडा की फेडरल कोर्ट ने कंवलजीत कौर की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि उनके दावे पर पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता है। अदालत ने यह भी माना कि केवल एसजेएफ से जुड़ाव या खालिस्तान जनमत संग्रह में हिस्सा लेने का प्रमाण यह साबित नहीं करता कि भारत में उन्हें किसी बड़े खतरे का सामना करना पड़ेगा। अदालत ने यह भी कहा कि खालिस्तान से वह ताजा जुड़ी हैं और ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है कि भारत जाने पर उन्हें कोई खतरा होगा। इतना ही नहीं, अदालत ने उसके दावे को छल से भरा और सद्भावना में कमी दिखाने वाला कहा है।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण बन गया है क्योंकि भारत और कनाडा के संबंध अभी पूरी तरह सुधरे नहीं हैं। खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर कनाडा में कई बार भारत विरोधी रैलियां और भाषण हुए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में खटास आई है। खासकर पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन त्रूदो की सरकार के दौरान यह मुद्दा संबंधों बहुत चुभन पैदा कर गया था।

कनाडा जैसे लोकतांत्रिक देश में शरणार्थी नीति का उद्देश्य उन लोगों को सुरक्षा देना है जिन पर उनके देश में उत्पीड़न होने के आसार रहते हैं। लेकिन जब कोई व्यक्ति प्रतिबंधित या आतंकवादी संगठन से जुड़ाव का दावा करता है, तो यह नीति थोड़ी जटिल हो जाती है। अदालत को यह तय करना होता है कि व्यक्ति वास्तव में खतरे में है या वह शरण पाने के लिए उस देश की नीति का फायदा उठाना चाह रहा है।

कंवलजीत कौर ने अपनी अपील में खुद लिखा था कि कनाडा में आने के बाद वह खालिस्तान आंदोलन में सक्रिय हुई है। यह बात अदालत को जरूर गलत लगी होगी। उधर अदालत को यह भी पता रहा होगा कि भारत सरकार ने एसजेएफ को एक खालिस्तानी आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है, और इसका सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू भारत विरोधी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार बताया गया है। ऐसे में यह मामला जरूर भारत की सुरक्षा एजेंसियां के लिए गंभीर बन जाता है।

बेशक, कनाडा की अदालत का यह निर्णय भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत हो सकता है कि वह खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर गंभीर है और ‘शरण नीति’ का दुरुपयोग नहीं होने देगा। साथ ही, यह भारत-कनाडा संबंधों में सुधार की दिशा में एक कदम हो सकता है।

Topics: भारतKhalistanगुरपतवंत सिंह पन्नूखालिस्तानकनाडाcanadaIndiapannufederal court
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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