जर्मनी में सेना के नए नियम को लेकर क्यों हो रहा हंगामा ?
September 25, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्व

जर्मनी में सेना के नए नियम को लेकर क्यों हो रहा हंगामा ?

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि इस नियम से काफी लोगों का बाहर पढ़ाई का, नौकरी का सपना टूट जाएगा।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Apr 8, 2026, 07:12 pm IST
inविश्व
जर्मनी

जर्मनी

जर्मनी में इन दिनों सेना के नियम को लेकर हंगामा हो रहा है। पुरुषों में आक्रोश है। इस नियम के अनुसार 17-45 वर्ष के पुरुष अब यदि तीन महीने से ज्यादा समय के लिए देश छोड़ेंगे तो उन्हें सेना से अनुमति लेनी होगी। फिर वह शांति काल ही क्यों न हो।

1 जनवरी से प्रभावी इस कानून का उद्देश्य है कि सेना को मजबूत किया जाए। इसके तहत 18 साल के सभी पुरुषों के लिए एक प्रश्नावली भरना अनिवार्य है, ताकि सशस्त्र बलों में सेवा देने के लिए उनकी उपयुक्तता का आकलन किया जा सके; हालाँकि, इसमें अनिवार्य सैन्य भर्ती (conscription) का प्रावधान नहीं है।

हालांकि इसमें अनिवार्य सैन्य भर्ती का प्रावधान नहीं है फिर भी लोग विरोध कर रहे हैं। जो मसौदा अभी मीडिया के माध्यम से सामने आया है उसमें यह लिखा है कि 17 से 45 वर्ष की आयु के बीच के पुरुषों के लिए तीन महीने से अधिक देश से बाहर रहने के लिए सेना की अनुमति की आवश्यकता होगी।

विदेशों में पढ़ाई और नौकरी पर पड़ेगा असर

इसका विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि इस नियम से काफी लोगों का बाहर पढ़ाई का, नौकरी का सपना टूट जाएगा। उनका जीवन कठिन हो जाएगा। उनका कहना है कि यह जांच क्यों हो कि व्यक्ति की फिटनेस क्या है और क्या वह सेना में जा सकते हैं? इस कानून का उद्देश्य है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए लगभग 260,000–270,000 सैनिकों की नियुक्ति की जाए।

लैंगिक समानता पर उठे प्रश्न?

इस नए नियम को लेकर लैंगिक समानता पर प्रश्न उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि 17 से 45 वर्ष के केवल युवकों के लिए ही ये नियम क्यों हैं? लड़कियों को इससे क्यों बाहर रखा गया है? क्या सेना में लड़कियों की आवश्यकता नहीं है?

अनिवार्य सैन्य सेवा नहीं

जर्मनी में अनिवार्य सैन्य सेवा नहीं है। ये कानून इसलिए है कि जिससे यह पता चल सके कि संकट के समय जर्मनी में सरकार को यह पता होना चाहिए कि आखिर कौन लंबी अवधि तक देश से बाहर है। इस आवश्यकता का कानूनी आधार जर्मनी के 1956 के अनिवार्य सैन्य भर्ती में है। इसमें समय-समय पर संशोधन होते रहे हैं और हाल ही में दिसंबर में संशोधन हुए थे।

युवाओं में इस नियम का विरोध क्यों

जर्मनी में बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं जो इस अनिवार्यता का विरोध कर रहे हैं। जब यह कानून संसद में पास हुआ था तो कई युवाओं ने इस संशोधन के खिलाफ सोशल मीडिया पर विरोध दर्ज किया। बीबीसी के अनुसार एक आयोजक ने कहा कि “हम अपना आधा जीवन बैरक में रहकर बर्बाद नहीं कर सकते हैं। हमें ड्रिल में और हत्या करने में प्रशिक्षित होने में अपना जीवन बर्बाद नहीं करना है,”

जब दिसंबर में यह संशोधन हुआ था तो उस समय हर स्कूल के विद्यार्थियों ने कहा था कि वे इस कदम के खिलाफ हर शहर में विरोध प्रदर्शन करेंगे और उन्होंने ऐसा किया भी था।
इनका कहना था कि युद्ध भविष्य के लिए कोई संभावना नहीं देता है, बल्कि यह हमारे जीवन को नष्ट करता है। अधिकतर यूरोपीय देश सैन्य सेवाओं को लेकर संशोधन कर रहे हैं।

हालांकि अभी यह योजना पूरी तरह से स्वैच्छिक है, परंतु यदि सुरक्षा स्थितियां बदलती हैं, या फिर कुछ ही लोग अपने मन से सामने आते हैं तो एक प्रकार की अनिवार्य सैन्य सेवा लागू कर दी जाएगी। अनिवार्य सैन्य सेवा को जर्मनी में वर्ष 2011 में चांसलर एंजेला मर्केल ने समाप्त कर दिया था।

परंतु अब जिस प्रकार से वैश्विक स्थितियों में परिवर्तन आ रहा है और जिस प्रकार से युद्ध का माहौल है, उसे देखते हुए यूरोपीय देश अनिवार्य सैन्य भर्ती या ऐसे ही नियमों पर विचार कर रहे हैं। ग्रीस ने भी और कठिन कानून लागू किये हैं, और जिनमें स्पष्ट सैन्य स्थिति के बिना विदेशों में स्थाई निवास के लिए कानूनी दंड है। स्विट्जरलैंड में यदि कोई व्यक्ति बाहर निवास करने की योजना बनाता है तो उसे पहले रिपोर्ट करना होगा और उसके बाद उसकी ड्यूटी और कामों को किसी वैकल्पिक सेवा के साथ समायोजित करना होगा, या फिर टालना होगा या फिर उसके जगह पर किसी को रिप्लेस करना होगा।

वहीं इसे लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि कानून में स्पष्टता लाई जानी चाहिए, जिससे कि लोगों को यह पता लग सके कि उनके दायित्व क्या हैं।

ये भी पढ़ें – जर्मनी में बर्लिन में यूथ सेंटर में मुस्लिम बलात्कारियों के कारण छात्रा के साथ बलात्कार की रिपोर्टिंग नहीं?

Topics: जर्मनी सेना अनुमतिजर्मन सेनाजर्मनी की सेनासैन्य अनुमति
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

No Content Available
Load More

ताज़ा समाचार

लोकसभा में राहुल गांधी

राहुल गांधी का भाजपा और सरकारों के एंटी-इंकम्बेंसी पर मिथ्या प्रलाप

बहुआयामी वीर सावरकर : ‘भारतीय संवत्सर’ के स्वप्नद्रष्टा

चक्रवात अर्नब ने मचाई तबाही: 22 राज्यों में बारिश का अलर्ट, ओडिशा-आंध्र सबसे अधिक प्रभावित, 5000 लोगों का रेस्क्यू

बेंजामिन नेतन्याहू, प्रधानमंत्री, इजरायल

UNGA में नेतन्याहू का तीखा भाषण: यहूदियों के खिलाफ साजिश का आरोप, बाहर भारी प्रदर्शन भी

Iran plans Digital tax in hormuz strait

ईरान का अमेरिका को नया प्रस्ताव: होर्मुज जलडमरूमध्य 6-7 दिनों में खोलने और परमाणु वार्ता शुरू करने की पेशकश

व्हाइट हाउस में ही शी जिनपिंग ने ट्रंप को ताइवान पर दे दी चेतावनी, जानिए क्या है पूरा मामला?

आज का श्लोक : अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्

Rajasthan Weather: 25 सितंबर को राजस्थान के इन जिलों में ‘भारी बारिश’ का अलर्ट

faridabad illegal mosque demolition palla ganpati colony muncipal action

फरीदाबाद में अवैध मस्जिद ध्वस्त: गणपति कॉलोनी में मुस्लिम महिलाओं ने किया हंगामा, पुलिसकर्मियों से की हाथापाई

FSSAI Paneer Draft Rules Non Dairy

अब बिना दूध के नहीं बिकेगा ‘पनीर’! FSSAI का बड़ा फैसला: जारी हुआ सख्त मसौदा नियम, जानें किसे होगा असर

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies