जिसे दुनिया ने कहा असंभव, पतंजलि ने किया साकार : अब गूगल मांग रहा अपने लिए डेटा, आचार्य बालकृष्ण का बड़ा खुलासा
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जिसे दुनिया ने कहा असंभव, पतंजलि ने किया साकार : अब गूगल मांग रहा अपने लिए डेटा, आचार्य बालकृष्ण का बड़ा खुलासा

दून बुक फेस्टिवल में आचार्य बालकृष्ण का बड़ा खुलासा, कहा- वैश्विक स्तर पर सिर्फ तीन वॉल्यूम ही निकाल पाया था डब्ल्यूएचओ। जानिए विश्व भेषज संहिता के 109 खंड के पीछे की असली कहानी

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Shivam Dixit
Apr 8, 2026, 04:34 pm IST
inभारत, उत्तराखंड

हरिद्वार । कभी दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य संस्था ने जिस काम को ‘असंभव’ मानकर बीच रास्ते में छोड़ दिया था, उसी कार्य को भारत में एक संकल्प ने न केवल आगे बढ़ाया बल्कि उसे इतिहास में दर्ज कर दिया। यह कहानी है उस अद्भुत पुरुषार्थ की, जहां तप, शोध और दूरदर्शिता ने मिलकर ‘विश्व भेषज संहिता’ जैसा महाग्रंथ रच दिया और आज हालात यह है कि डिजिटल युग की दिग्गज कंपनी गूगल भी उसी ज्ञान को प्राप्त करने के लिए पतंजलि के दरवाजे पर दस्तक दे रही है।

जब डब्ल्यूएचओ ने खड़े कर दिए हाथ

वर्ष 1999 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की। लक्ष्य था, दुनिया भर की वनस्पति आधारित चिकित्सा पद्धतियों, औषधीय पौधों और पारंपरिक ज्ञान को एकत्रित कर एक वैश्विक दस्तावेज तैयार करना।

करीब 11 वर्षों की मेहनत के बाद 2010 में डब्ल्यूएचओ ने इस परियोजना को रोक दिया। कारण साफ था, यह कार्य अत्यधिक व्यापक, जटिल और लगभग असंभव प्रतीत हो रहा था। अंततः डब्ल्यूएचओ केवल तीन सीमित वॉल्यूम तक ही सिमट गया।

भारत में चुपचाप चल रही थी दूसरी कहानी

उसी समय, बिना किसी वैश्विक शोर-शराबे के पतंजलि योगपीठ ने 2003-04 से इसी दिशा में काम शुरू कर दिया था। संस्थान को यह भी ज्ञात नहीं था कि डब्ल्यूएचओ इस पर पहले से कार्य कर चुका है। लेकिन अंतर था, दृष्टिकोण, धैर्य और तपस्या का। जहां वैश्विक संस्थान रुक गया, वहीं से पतंजलि की यात्रा तेज होती चली गई।

तपस्या से तैयार हुआ वैश्विक ज्ञानकोश

करीब दो दशकों की निरंतर शोध और संकलन के बाद 2022 में यह कार्य अपने पूर्ण स्वरूप में सामने आया। इस दौरान

  • 3.60 लाख पौधों में से 50 हजार औषधीय पौधों की पहचान
  • 2000+ जनजातियों के पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण
  • 964 हीलिंग प्रैक्टिसेस का संकलन
  • 9+ चिकित्सा पद्धतियों का समावेश
  • 12 लाख से अधिक स्थानीय (वर्नाक्युलर) नामों का संग्रह
  • 2200 से अधिक स्रोतों पर आधारित शोध

इन सबको समेटकर तैयार हुआ लगभग 1.25 लाख पृष्ठों का ‘विश्व भेषज संहिता’।

दून पुस्तक मेले में हुआ खुलासा

देहरादून के दून बुक फेस्टिवल में आचार्य बालकृष्ण ने स्वयं इस महाग्रंथ के 109 खंडों के पूर्ण होने और पीछे किए गए पुरुषार्थ की कहानी बताई। यह केवल एक प्रकाशन नहीं, बल्कि वैश्विक चिकित्सा ज्ञान को संरक्षित करने का ऐतिहासिक क्षण था।

अब गूगल को भी चाहिए ‘पतंजलि का संग्रहित डेटा’

इस कहानी का सबसे दिलचस्प मोड़ यहीं आता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा के इस युग में, जब दुनिया डिजिटल ज्ञान पर निर्भर है, तब गूगल जैसी टेक दिग्गज कंपनी ने पतंजलि से एविडेंस-बेस्ड डेटा के लिए संपर्क साधा है। यानि गूगल एआई के प्रयोग के लिए पतंजलि का संग्रहित साक्ष्य आधारित डेटा मांग रहा है। ताकि वह इस डेटा से एआई को और मजबूत कर सके। यह केवल एक सहयोग नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि भारत का पारंपरिक ज्ञान अब वैश्विक टेक्नोलॉजी के केंद्र में पहुंच चुका है।

क्या बोले आचार्य बालकृष्ण

देहरादून के दून बुक फेस्टिवल में आचार्य बालकृष्ण ने कहा- यह केवल एक ग्रंथ की कहानी नहीं है, यह उस सोच की कहानी है जो असंभव को चुनौती देती है। जहां वैश्विक संस्थाएं सीमाओं में बंध गईं, वहां भारतीय परंपरा, तपस्या और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने मिलकर एक ऐसा इतिहास रचा, जिसे अब दुनिया न केवल पढ़ रही है, बल्कि उससे सीख भी रही है।

उन्होंने कहा- ‘विश्व भेषज संहिता’ इस बात का प्रमाण है कि जब संकल्प अडिग हो, तो अधूरी कहानियां भी इतिहास बन जाती हैं। पतंजलि इस तरह के ज्ञान पर बीते कुछ समय से बहुत काम कर रहा है। गूगल जैसी टेक संस्था का पतंजलि के डेटा पर भरोसा करना यह हम भारतीयों के लिए गौरव की बात है।

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