हाल ही में ईरान ने दावा किया था कि ‘गत दिसम्बर, जनवरी में पूरे ईरान में हुए सत्ता विरोधी प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका था जिसने विरोधियों को हथियार दिए थे’। अब अमेरिकी राष्ट्रपति ने माना है कि ‘बेशक, उसने उन प्रदर्शनों के दौरान ईरानी कुर्द विपक्षी समूहों को हथियार दिए थे।’ ट्रंप की इस स्वीकारोक्ति से ईरान के दावों की पुष्टि ही होती है।
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने फॉक्स न्यूज पर दो दिन पहले एक साक्षात्कार में उक्त बात कही थी। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका ने दिसंबर और जनवरी में ईरान सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के दौरान ईरानी विपक्षी समूहों और प्रदर्शनकारियों को हथियार प्रदान किए थे। इन प्रदर्शनों में सरकारी बलों के हाथों हजारों लोग मारे गए थे।
साक्षात्कार में ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका ईरान सरकार को अस्थिर करने और उखाड़ फेंकने के प्रयासों में सीधे शामिल था, जो 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राएल द्वारा ईरान पर हमलों से शुरू भी हो चुके हैं।
ट्रंप का कहना है कि उन्होंने बहुत सारी बंदूकें भेजी थीं। ये कुर्दों को भेजी गई थीं। ट्रंप ने वर्तमान में चल रही लड़ाई को हमेशा ही इस्लामिक रिपब्लिक की सरकार से ईरानियों को ‘मुक्त’ करने की अपनी इच्छा से जोड़ा है। इस खुलासे के बाद कुछ विश्लेषकों ने कहा कि ट्रंप ईरान को लेकर अपने बयान बार-बार बदलते रहे हैं, इसलिए ठीक ठीक नहीं का जा सकता कि उस सबमें अमेरिका किस हद तक शामिल था।
क्या हुआ था प्रदर्शनों के दौरान
ईरान में सत्ता विरोधी प्रदर्शन 28 दिसंबर को तेहरान शहर में बाजार से शुरू हुए थे, कारोबारी आर्थिक संकट और ईरानी रियाल की कीमत गिरने से नाराज थे। जल्द ही ये असंतोष देश के बड़े—छोटे शहरों में फैल गया, लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। कुछ प्रदर्शनकारी तब सरकार बदलने की मांग करने लगे।

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने विशेष रूप से 8 और 9 जनवरी को प्रदर्शनों पर कड़हर बरपाया था। उस हिंसा में हजारों युवा ईरानी मारे गए, और दसियों हजार गिरफ्तार किए गए। एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने ‘अपने अपराधों को छिपाने’ के लिए इंटरनेट काट दिया, जिससे देश सूचना अंधकार में डूब गया।
एक विशेषज्ञ के अनुसार, ये प्रदर्शन 2022 के सितंबर माह में महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद हुए महिला अधिकार प्रदर्शनों के बाद सबसे बड़े थे। महसा को हिजाब का विरोध करने के ‘अपराध’ में गिरफ्तार किया गया था, जिससे राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन भड़के थे। अधिकारियों पर प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने, गिरफ्तारी और फांसी देने के आरोप लगे थे।
तत्कालीन सुप्रीम लीडर खामेनेई ने ट्रंप को ‘अपराधी’ कहा था और जनता को भड़काने में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने का आरोप लगाया था। वैसे भी, तेहरान लंबे समय से घरेलू संकटों के लिए अमेरिका और इस्राएल को दोषी ठहराता रहा है, लेकिन तब दावा किया गया कि इस बार के प्रदर्शनों में अमेरिकी संलिप्तता हद से कहीं ज्यादा थी।
उस वक्त ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका ईरानी जनता की मदद के लिए आएगा। ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट किया था, बिना ‘मदद’ की जानकारी दिए “हम लॉक एंड लोडेड और तैयार हैं। 13 जनवरी को उन्होंने लिखा, ‘मदद आ रही है।’ उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपने संस्थानों पर कब्जा करने की अपील की थी।
साक्षात्कार में अमेरिका ने ईरान पर वर्तमान हमलों का मकसद ‘ईरान के परमाणु हथियार खत्म’ करना बताया। उन्होंने इसे जनवरी के प्रदर्शनों से जोड़ा। राष्ट्रपति ने कहा, ‘तेहरान ने अपने दसियों हजार नागरिकों को मार डाला। अमेरिका अब वह दे रहा है जो आप चाहते हैं।’
यह किसी से छिपा नहीं है कि ईरानी कुर्द समूह लंबे समय से ईरान सरकार का विरोध करते आ रहे हैं और स्वायत्तता चाहते हैं। उनके इराकी कुर्दों से गरहे संबंध हैं, जिन्होंने दशकों पहले अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र के लिए लड़ाई लड़ी थी। ऐसे कई समूह इराक-ईरान सीमा पर और उत्तरी इराक में सक्रिय हैं।
हालांकि वे लंबे समय से बंटे हुए थे, लेकिन अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने से कुछ दिन पहले कई ईरानी कुर्द समूहों ने गठबंधन बनाया है। युद्ध के पहले सप्ताह में, तेहरान ने इराक में कुर्द ठिकानों पर हमले बोले थे। अमेरिकी मीडिया ने उससे ठीक पहले रिपोर्ट दी थी कि कुछ कुर्द विपक्षी नेताओं ने ट्रंप से बात की है।
विश्लेषकों का मानना था कि अमेरिका ईरानी कुर्दों को समर्थन देकर इराक सीमा वाले ईरान के हिस्सों पर कब्जा कराने की कोशिश कर सकता है, ताकि इराक से इस्राएली या अमेरिकी जमीनी सेनाओं के लिए बफर क्षेत्र बन सके। इधर अमेरिकी कांग्रेस में विपक्षी डेमोक्रेट युद्ध के खिलाफ हैं, वे विशेष रूप से जमीनी सैनिक भेजने के खिलाफ हैं।
अब ईरानी कुर्दिस्तान डेमोक्रेटिक पार्टी (KDPI) के वरिष्ठ कार्यकर्ता ने इराक में कहा है कि ट्रंप के फॉक्स चैनल पर दिए बयान कोरे झूठ हैं। KDPI उन समूहों में से एक है, जिनसे मार्च में ट्रंप की बातचीत की अमेरिकी मीडिया ने रिपोर्ट की थी। कोमाला पार्टी जैसे अन्य विपक्षी समूहों ने भी ट्रंप के बयानों का खंडन किया है।

















