पाकिस्तान में इस्लामिक कट्टरता अपने चरम पर है। वहां गैर-मुस्लिम लड़कियों के साथ अपहरण, रेप और कन्वर्जन के बाद जबरन निकाह की घटनाएं आम है। इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर जबरन शादी और धर्म परिवर्तन की घटनाएं सालों से चल रही हैं। इनमें खास तौर पर हिंदू और ईसाई समुदाय की बेटियां प्रभावित होती हैं।
मारिया शाहबाज का मामला
ताजा मामला पाकिस्तान की ईसाई लड़की मारिया शाहबाज का है। जिनका इस्लामिक कट्टरपंथियों ने अपहरण कर लिया और जबरन उसका निकाह करा दिया। इसके साथ ही उसे इस्लाम में कन्वर्ट कर दिया गया। अहम बात ये है कि जिस वक्त मारिया के साथ ये सब हुआ था, वो नाबालिग थी। उसके पिता ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को जबरदस्ती शादी के लिए मजबूर किया गया और उसका मजहब भी उसकी मर्जी के बिना बदल दिया गया।
पाकिस्तान की फेडरल कांस्टीट्यूशनल कोर्ट ने इस शादी को वैध मान लिया। परिवार को न्याय नहीं मिल सका। इस फैसले के बाद परिवार और समुदाय में काफी निराशा फैली।
ब्रिटिश सांसदों की चिंता
दूसरी ओर इस घटना पर ब्रिटेन के सांसदों ने गहरी चिंता जताई। ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप (APPG) फॉर पाकिस्तानी माइनॉरिटीज ने बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में ईसाई और हिंदू लड़कियों का अपहरण कर बुजुर्ग मुस्लिम पुरुषों द्वारा जबरन शादी, बलात्कार और धर्म परिवर्तन कराने का पैटर्न सालों से चल रहा है।
इसे भी पढ़ें: असैन्य परमाणु ऊर्जा में भारत की बड़ी छलांग: कल्पक्कम रिएक्टर का दूसरा चरण आगे बढ़ा, पीएम मोदी ने दी बधाई
APPG के को-चेयर लॉर्ड अल्टन ने कहा, “बच्चों की सुरक्षा और धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा किसी भी कानूनी व्यवस्था का बुनियादी सिद्धांत होना चाहिए। जबरन शादी और धर्म परिवर्तन के मामलों में सबसे ऊंचे स्तर की जांच, पारदर्शिता और संवेदनशीलता जरूरी है ताकि न्याय हो और दिखे भी।” ग्रुप ने बताया कि ऐसी घटनाओं में पीड़ित परिवारों को कानूनी और सामाजिक रुकावटों का सामना करना पड़ता है। अदालतें अक्सर अपहरणकर्ताओं के पक्ष में फैसला दे देती हैं।
धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा की अपील
APPG ने पाकिस्तानी सरकार से अपील की कि वह नाबालिग लड़कियों से जुड़े सभी ऐसे मामलों की सख्त जांच करे और कानूनों को सही से लागू करे। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की बात भी कही ताकि धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा हो सके।
इन दोनों खबरों से साफ है कि पाकिस्तान में ईसाई और हिंदू लड़कियों के साथ यह समस्या नई नहीं है। परिवार न्याय के लिए लड़ते हैं, लेकिन अक्सर कोर्ट का रुख उनके खिलाफ होता है। APPG ने एक और मुद्दा भी उठाया। इस्लामाबाद की कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी (CDA) गरीब ईसाई परिवारों वाले इलाकों को तोड़ने की तैयारी कर रही है। वहां रहने वालों को नोटिस दिए गए हैं, लेकिन वैकल्पिक जगह या सुरक्षा नहीं दी जा रही। APPG ने कहा कि ऐसा करना पाकिस्तान के संविधान और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन हो सकता है। उन्होंने सरकार और CDA से अनुरोध किया कि ये कार्रवाई रोकी जाए और प्रभावित परिवारों से बातचीत की जाए।
















