प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) देश के छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता देने के लिए शुरू की गई एक महत्वपूर्ण सरकारी योजना है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की सहायता तीन बराबर किस्तों में दी जाती है। हाल के वर्षों में सरकार ने इस योजना को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए कई बदलाव किए हैं। इन्हीं बदलावों में सबसे महत्वपूर्ण है ‘फार्मर रजिस्ट्री’ या यूनिक फार्मर आईडी को अनिवार्य करना।
फार्मर रजिस्ट्री का उद्देश्य और लाभ- फार्मर रजिस्ट्री का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक और पात्र किसानों तक ही पहुंचे। पहले कुछ मामलों में फर्जी या अपात्र लोगों द्वारा योजना का गलत लाभ लेने की शिकायतें सामने आती थीं। इन्हें रोकने के लिए सरकार ने हर किसान के लिए एक यूनिक पहचान (आईडी) देने की व्यवस्था शुरू की है। यह आईडी किसान की पहचान के साथ-साथ उसकी जमीन और खेती से जुड़ी जानकारी को भी एक जगह दर्ज करती है। यह यूनिक फार्मर आईडी एक डिजिटल पहचान पत्र की तरह काम करती है। इसमें किसान का नाम, आधार विवरण, जमीन का रिकॉर्ड, फसल की जानकारी, पशुपालन और उर्वरक उपयोग जैसी जानकारी शामिल होती है। इससे किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होती है। आगे चलकर खाद सब्सिडी, बीज वितरण और फसल बीमा जैसी सुविधाएं भी सरल तरीके से मिल सकेंगी।
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फार्मर आईडी आवेदन- फार्मर आईडी बनवाने की प्रक्रिया भी आसान रखी गई है। किसान अपने राज्य के एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं या नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय में जाकर ऑफलाइन भी आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, आधार से लिंक मोबाइल नंबर और जमीन के दस्तावेज जरूरी होते हैं। जांच पूरी होने के बाद किसान को यूनिक आईडी मिल जाती है। सरकार ने पीएम किसान योजना के नियमों को भी सख्त किया है ताकि केवल सही लाभार्थियों को ही सहायता मिले। अब एक ही परिवार के अलग-अलग सदस्यों द्वारा गलत तरीके से लाभ लेने के मामलों की जांच की जा रही है। इसके अलावा जमीन से जुड़ी पात्रता की भी अच्छी तरह जांच की जा रही है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे समय-समय पर अपनी लाभार्थी स्थिति जांचते रहें। इसके लिए योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर ‘फार्मर्स कॉर्नर’ और ‘Know Your Status’ विकल्प का उपयोग किया जा सकता है। इससे यह पता चलता है कि किस्त उनके खाते में आई है या नहीं। योजना के अनुसार, हर चार महीने में किस्त जारी की जाती है। अगली किस्त की जानकारी सरकार द्वारा समय-समय पर जारी की जाती है। किसी भी समस्या की स्थिति में किसान हेल्पलाइन या कृषि विभाग से सहायता ले सकते हैं।















