हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में 3 से 5 अप्रैल 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय साहित्यिक-सांस्कृतिक महोत्सव ‘अक्षरम्’ अपने दूसरे दिन पूरे उत्साह और भव्यता के साथ आगे बढ़ा। इस अवसर पर पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर जी ने अपने विचार साझा करते हुए कार्यक्रम की महत्ता को गहराई से समझाया।
सूचना युग में ‘अक्षरम्’: बौद्धिक संवाद और पीढ़ियों को जोड़ने वाला सशक्त मंच
उन्होंने कहा कि आज के समय में, जब दुनिया सूचनाओं से भरी हुई है, ‘अक्षरम्’ एक ऐसा मंच है जो केवल जानकारी नहीं देता, बल्कि बौद्धिक संवाद को बढ़ावा देता है और पीढ़ियों के बीच की दूरी को कम करता है। यह मंच हमें सोचने, समझने और सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। ‘अक्षरम्’ शब्द का अर्थ भी अपने आप में बहुत गहरा है। ‘अक्षर’ का मतलब होता है- जो कभी नष्ट नहीं होता। यही इस आयोजन की सबसे बड़ी ताकत है। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जो समय के साथ और मजबूत होती जाएगी।
श्री हितेश शंकर जी ने समझाया कि अक्षर से शब्द बनते हैं, शब्दों से विचार, विचारों से विमर्श और विमर्श से समाज की व्यवस्था बनती है। यानी समाज की पूरी संरचना विचारों और संवाद पर आधारित होती है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि हम सही विचारों को अपनाएं और स्वस्थ विमर्श को आगे बढ़ाएं। उन्होंने यह भी कहा कि आज कुछ लोग विचारों का इस्तेमाल समाज में भ्रम और असंतुलन पैदा करने के लिए करते हैं। ऐसे समय में यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम सच्चाई को समझें और सही दिशा में सोचें। समाज और राष्ट्र की यात्रा कोई छोटी दौड़ नहीं, बल्कि एक लंबी रिले रेस की तरह होती है, जिसमें हर पीढ़ी अपनी जिम्मेदारी अगली पीढ़ी को सौंपती है।
सोशल मीडिया के दौर में सीमित सोच से निकलकर सही विमर्श और गहरी समझ की जरूरत
आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया से बहुत प्रभावित है। फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म हमें तुरंत जानकारी और मनोरंजन देते हैं, लेकिन वे पूरी सच्चाई नहीं दिखाते। हम अक्सर यह सोचते हैं कि हमारे कितने फॉलोअर्स हैं, लेकिन इससे ज्यादा जरूरी यह है कि हम किसे अपना आदर्श मानते हैं और किससे सीखते हैं। तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग पर भी उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने बताया कि कई बार ये तकनीकें हमें वही जानकारी देती हैं, जो हमें पसंद आती है। इससे हम एक सीमित सोच के दायरे में फंस सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम किताबों और गहराई से पढ़ने की आदत को अपनाएं, ताकि हम सही और गलत में फर्क कर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि आज के समय में खबरों की बाढ़ आ गई है। पहले लोग “ताजा खबर” सुनने के लिए उत्साहित रहते थे, लेकिन अब इतनी ज्यादा जानकारी मिलती है कि लोग उससे परेशान हो जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि हम खबर और सच्चाई के बीच के अंतर को समझें। खबर और सच्चाई के बीच जो छिपा होता है, वही ‘विमर्श’ है। विमर्श हमें यह समझने में मदद करता है कि किसी भी स्थिति में हमारे, हमारे परिवार, समाज और देश का भला किसमें है। कई बार इसके लिए हमें अपने व्यक्तिगत हितों को भी पीछे रखना पड़ता है।












