सिलीगुड़ी। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में सात न्यायिक अधिकारियों को नौ घंटे तक बंधक बनाकर रखने के मामले के एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। उसकी तलाश में पुलिस और केंद्रीय एजेंसिया सघन तलाशी अभियान चला रही थी। शुक्रवार सुबह गुप्त सूचना के आधार पर बागडोगरा एयरपोर्ट पर सीआईडी और स्थानीय पुलिस ने मुख्य आरोपी पेशे से वकील मोफक्केरुल इस्लाम को गिरफ्तार किया। वह एआईएमआईएम का नेता बताया जा रहा है।
एआईएमआईएम नेता मोफक्केरुल इस्लाम एयरपोर्ट से हिरासत में
मोफक्केरुल इस्लाम वर्ष 2021 में उत्तर दिनाजपुर जिले के इटाहार विधानसभा सीट से एआईएमआईएम के टिकट पर चुनाव लड़ चुका है। पुलिस के अनुसार, वह कोलकाता से बागडोगरा पहुंचने के बाद अलीपुरद्वार जाने की तैयारी में था। पहले से मिली सूचना के आधार पर एयरपोर्ट पर सादी वर्दी में पुलिस तैनात थी और विमान से उतरते ही उसे हिरासत में ले लिया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपित ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह एक वकील के रूप में केस के सिलसिले में जा रहा था।
इस मामले में अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) भी सक्रिय हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद एनआईए की टीम मालदा पहुंचकर जांच करेगी कि यह पूरी घटना किसी साजिश का हिस्सा थी या नहीं। मोफक्केरुल इस्लाम को पहले भी कालियाचक में एक भीड़ के सामने भाषण देते देखा गया था, जिसे कथित तौर पर भड़काऊ माना गया। आरोप है कि इसी के बाद भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों को घेर लिया था। अब तक इस मामले में 19 केस दर्ज किए गए हैं और 35 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस ने मानी चूक
कालियाचक हिंसा में पुलिस ने अपनी गलती स्वीकार की है। उत्तर बंगाल के एडीजी कलियप्पन जयरामन ने माना कि न्यायाधीशों को सुरक्षित निकालने में प्रशासन से देरी हुई। दरअसल, मतदाता सूची से नाम हटने से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए सात न्यायाधीश कालियाचक गए थे। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने उन्हें करीब सात घंटे तक घेरकर रखा। देर रात उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। न्यायाधीशों ने आरोप लगाया था कि संकट के समय पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद एडीजी ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नाकाम नहीं थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस चूक के कारणों की जांच की जा रही है।
पुलिस ने अदालत को सौंपी विस्तृत रिपोर्ट
कालियाचक में हिंसक घटना को लेकर पुलिस ने अदालत में अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें कई अहम और चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी, जिसमें न्यायिक अधिकारियों, पुलिस और केंद्रीय बलों को निशाना बनाया गया।
मोथाबाड़ी थाने की पुलिस द्वारा शुक्रवार को दाखिल रिपोर्ट में कहा गया है कि बीडीओ कार्यालय से निकलते समय न्यायाधीशों के काफिले पर हमला किया गया। हमलावरों ने बैरिकेड लगाकर काफिले को रोका और पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान केवल जजों का काफिला ही नहीं, बल्कि पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के वाहनों को भी निशाना बनाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, जब केंद्रीय बल के जवान मौके पर बचाव के लिए पहुंचे, तब उन पर भी हमला किया गया। सीआरपीएफ के वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए और उन पर पथराव किया गया। इस घटना में एक चालक घायल हो गया, जबकि सीआरपीएफ के एक सब-इंस्पेक्टर और एक अन्य कर्मी भी जख्मी हुए। कुल मिलाकर दो से तीन केंद्रीय बल के जवानों के घायल होने की बात सामने आई है। बीडीओ कार्यालय के सामने पहले से ही भीड़ जुटाई गई थी। एक अप्रैल की शाम करीब 100 अज्ञात लोग वहां इकट्ठा हुए और सुनियोजित तरीके से काफिले पर हमला किया। इस दौरान सड़क को अवरुद्ध कर दिया गया और लगातार पथराव किया गया।
कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल
इस घटना ने कई सवाल भी खड़े किए हैं, खासकर यह कि चुनाव से पहले राज्य में केंद्रीय बलों की मौजूदगी के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोग कैसे इकट्ठा हो गए और हमला कर पाए। पूरे घटनाक्रम ने राज्य की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

















